Rajagopal | राजगोपाल
जन्म: 11 मार्च, 1957 (जगदलपुर, छत्तीसगढ़, भारत)
शिक्षा: पी.एच.डी. (1984), पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर (छत्तीसगढ़)
सम्मान एवं पुरस्कार:
राष्ट्रीय: भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान हेतु "प्रवासी भारतीय सम्मान" (10 जनवरी 2023) - प्रवासी भारतीयों के लिए सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान।
अंतर्राष्ट्रीय: National Researcher-SNI Level-III (National Council of Science and Technology, Mexico, 2013), Life Fellow of the Royal Society (RSA, London, 2016), Distinguished Professor, EGADE Business School (2020)।
सम्प्रति:
डॉ. राजगोपाल इगादे बिज़नस स्कूल, मेक्सिको सिटी में प्रोफेसर हैं एवं बोस्टन यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर भी हैं। उन्होंने व्यवसायिक प्रबंधन पर 83 पुस्तकें एवं 450 से अधिक शोध पत्र लिखे हैं।
साहित्यिक परिचय:
इनकी पहली कविता 1970 में साप्ताहिक समाचार पत्र 'सबेरा संकेत' में प्रकाशित हुई थी। अध्ययन काल में वे 'मध्य प्रदेश क्रोनिकल' और 'युगधर्म' के संपादकीय विभाग में कार्यरत रहे। इनकी प्रमुख काव्य-कृतियों में प्रारब्ध, मधुबाला, धूप-छांव, सानिध्य एवं मंजूषा शामिल हैं (राजमंगल प्रकाशन)।
राजगोपाल की प्रमुख रचनाएँ
(Literary Works)- प्रारब्ध (काव्य संग्रह)
- अब नहीं (काव्य संग्रह)
- तुमसे क्या बोलूँ (काव्य संग्रह)
- छोटा सा आकाश (काव्य संग्रह)
- किस करवट जीवन (काव्य संग्रह)
- एक प्रयाण (काव्य संग्रह)
- मौन प्रसंग : एक प्रणय काव्य-कथा
- तर्पण : एक छिपा हुआ यथार्थ
- अल्पविराम
- निशांत तक
- नीड़
- पहचान
- अंतिम पड़ाव
- निष्कर्ष
- अधिवास
- मुक्त-कंठ
- निष्कृति
- अनुरोध
- घर-आँगन
- धूप-छांव
- मधुबाला
- निरुत्तर
- निशा निवेदन
- प्रणय-पटल
- मंजूषा
- दिनमान (काव्य संग्रह)
- स्वप्न-छाया (काव्य संग्रह)
- मानस का मृग (काव्य संग्रह)
- रंगमंच (काव्य संग्रह)
- प्रवाह (चौदह अभिव्यक्तियाँ)
