बसंत / वसंत / बहार पर कविताएँ और निबंध (Poems and Essay on Basant/Vasant Ritu)
वसंत पर निबंध
बसंत / वसंत / बहार पर कविताएँ
नज़ीर अकबराबादी
- आलम में जब बहार की आकर लगंत हो
- फिर आलम में तशरीफ लाई बसंत
- जहां में फिर हुई ऐ यारो आश्कार बसंत
- गुलशने-आलम में जब तशरीफ़ लाती है बहार
- मिलकर सनम से अपने हंगाम दिल कुशाई
- जब फूल का सरसों के हुआ आके खिलन्ता
- जोशे निशातो ऐश है हर जा बसंत का
- निकले हो किस बहार से तुम ज़र्द पोश हो
- करके बसंती लिबास सबसे बरस दिन के दिन
- आने को आज घूम इधर है बसंत की
- चम्पे का इत्र मलकर मौके़ से फिर खुशी हो
