हरियाणवी लोकगीत
Haryanvi Lok Geet
- जन्म गीत : हरियाणवी लोक गीत
- शादी-ब्याह गीत : हरियाणवी लोक गीत
- मृत्यु गीत : हरियाणवी लोक गीत
- राम गीत : हरियाणवी लोक गीत
- देवी माँ के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- भजन : हरियाणवी लोक गीत
- देवठणी के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- कातक न्हाण के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- सांझी के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- फागण के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- सावन के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- प्रेमगीत : हरियाणवी लोक गीत
- खेती-बाड़ी के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- पनघट के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- चक्की के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- महात्मा गांधी के बारे में गीत : हरियाणवी लोक गीत
- रहन-सहन के गीत : हरियाणवी लोक गीत
- सैनिक गीत : हरियाणवी लोक गीत
- विविध : हरियाणवी लोक गीत
जन्म के समय गाए जाने वाले गीत : हरियाणवी लोकगीत
- अजी केले से आवै हमें बांस
- इस इमली के ओड़े चोड़े पात
- कहियो सुसरा जी से मेरा दिल खट्टे बेरां नै
- कित तै आए अर्जन पांडे
- कित रै घडिये कढाईयां
- किधर तै आई दाई किधर ते आया नाई
- कुरडी कूड़ा हे जी गेरती
- के दुःख री तन्नै सास का, के तेरे पिया परदेस
- कोई मांगी कढ़ाई ना देय मेरा दिल हलुवै नै
- कोड्डी कोड्डी बगड़ बुहारूँ
- चंदन रुख कटाय कै
- चलो म्हारा राजीड़ा जी सहरां मैं चाली
- चुप चुप खड़े हो जरूर कोई बात है
- छम छम छनन अटरिआ चढ़गी गोदी में
- जच्चा की चटोरी जीभ जलेबी मंगवा द्यो नां
- जच्चा तै म्हारी याणी भोली जी
- जच्चा तो मेरी भोली भाली री
- जच्चा ने बच्चा जाया है, दिन खुसी का आया है
- जच्चा हाय मैया हाय दैय्या करती फिरै
- जन्में हैं राम अजुध्या मैं
- जिद्दिन लाडो तेरा जनम हुआ
- जी पहला मास जै लागिया, दूध दही मन जाय
- जै री माता तू सतजुग की कहिए राणी
- तेरा दादा घढ़ावै अटल पलना
- दरद हमने सहे ये सैयां के लाल कैसे कहाये
- दिल्ली सहर से पति खद्दर मंगा द्यों जी
- दूर दिसावर सै आई नणंदिया, भाई भतीजे के चाव
- नणन्द भावज का था प्यार दोनों रल कातती
- पलंग पर खेल रहो मेरो नन्दलाल
- पायां में पैजणियां लाला छुन्नक डोलेगा
- पांच मोहर का साहबा! पीला मंगाद्यो जी
- पड़दा ओल्है जच्चा बोलै राजन उरै बुलाओ जी
- पीला तै ओढ म्हारी जच्चा पाणी नै चाली जी
- बड़ए बगड़तै सती राणी नीसरी भर गोबर की हेल
- मन खोल के मांगो नन्दी लेना हो सो लेय
- मन्नै भावें कराले के बेर रुपये सेर, मेरा री मन बेरां नै
- मांगो मांगो म्हारी नणन्द थारा मांगण का ब्योहार
- मेरा पिरस चढन्ता सुसरा न्यू कवै
- मेरा भंवर ने भेजी निसानी एक ताला एक छुरी
- मैं आई थी मीठियां की लालच
- मैं तो थारा हाजिर बन्दा जी, हमारी धन रूस क्यों गई
- मैं तो रूस रहूंगी बालम हरगिज बोलूं ना
- रसीणे के कमरे में जच्चा हमारी री
- रहो रहो बांझड़ली दूर रहियो
- राजा जी जे थारै जन्मैगा पूत
- राजे गंगा किनारे एक तिरिया सू ठाड़ी अरज करे
- वृन्दावन से चलिये गवन्त्री
- ससुर जी आगे सात प्रणाम
- सासू म्हारी आवै
- सिया खड़ी पछताय कुस बन में हुए
- सुसरै जी से अरज करूं थी
- हम धनी जी खिचड़ी की साध
- हां जी बमण बैठो अंगणा धी रै जमूंगी बमणा
- हांसी सहर से पाते मंगवा दो
- हे री खत भेज रही पीहर मैं
- हैं घूंघर वाले बाल मेरे ललना के
- होलर कहै री अम्मा! तुझे झुंझणा मंगा दे
शादी-ब्याह के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- अपने बाबा के खड़ी चबूतरे रूप देख वर आये
- अमर बेल उदय पै छाई
- अरे भैया रघुबीर भात सवेरे ल्याइयो
- आइये बहुअड़ इस घरां
- आओ री राधे बैठो पिलंग पर
- आगे घोड़ी तुम चलोगी पीछे बाबा हुसियार घोड़ी
- आज बागां मेरे बीरा उणमणी
- आज बागां मैं ए जीजी जगमगी
- आयो परदेसी सूबटो ले ग्यो टीली में
- आले गीले चन्दन कटाय मेरे बाबा
- आंगन बरसै सोहाग बदरी भीतर दुलारी न्हाय
- इन घर की मैंड़ी ऊंचे बंके बार
- इस पेड़ नीचै आओ हे रुकमण
- इस सागर के कारने बाबा जी
- इसी थलियां मैं इसे टीब्यां मैं
- उठ पिया आधी सी रात
- उठ ले रे ऊठ ले रोसन बांन बठावांगे
- ऊंची तेरी खाई ऊंचा नीचा कोट
- ऊंची हे दोघड़, नीचा ए बारणा
- एक घोड़ी नजारे ते आई
- ए बेबे गोरे गोरे देवर जेठ
- एरी बनड़ा चलै नां चलणदे
- ऐसा काला तूं बना रे
- ऐसी के जल्दी मचाई हरियाली
- ऐसी चुंदड़िया लाओ मेरे बाबा
- ओहो चणे वाले रे गलियों में आ के सोर किआ
- कचनार बैठी लाडो पान चाब
- कद की देखूं थी बाट माई
- कहिये री उस खाती के लड़के ने
- क्या कहूं रानी! तुम्हारा भाग
- क्याहै की तेरी चिलम तमाखू
- क्यांहे तै न्योदूं बाबल राजा
- काये कटोरी में बटणां काये कटोरी में तेल
- काहे को तेरी ओबरी
- किन्नै यो मांढा पिछवाडिआं
- किस नींद सूत्या मेरा लक्खी ओ दादा
- किस रुत बाड़ी बोईएगी
- किसिआं बान्ना हे न्योंदिए
- की नै यो बाग लगाया
- कोरो घड़ियों बीरा पीली हल्दी
- खोल उधली की कांगना
- गढ़ छोड़ रुकमण बाहर आई
- गोरी सई सांज की कहां गई
- घन गजरत आवै सोहाग बिरवा
- घुड़ला तै बल ल्याइओ घुड़ला रे चाबक आओ
- घोड़ी बने की आ गई देखो कैसी सजे
- घोड़ी सोवै दादा दरबार
- चक्ले मैं राछ घलादो री चकले में
- चढ़ज्या रे बन्दड़े तावला
- चंचली घोड़ी चांदनी मथुरा तै आई
- छज्जै तो बेठी लाडो कुंवर निरखै
- छतर फिरे चर्खी घरणावै
- छन्न पक्कियां छन्न पक्कियां
- जिद्दिन लाडो तेरा जन्म हुआ है
- जीजी रलमिल गुड़ियां खेलती तूं चाली जीजा के साथ
- जौ गीवहां को उबटणों राय चमेली का तेल
- झूमर तो पिया! तुम गढ़वाओ
- टीके पै लग रही चांदनी
- ठुमक चलती चाल घोड़ी
- डोले तै तलै उतरिया हे बहुअड़
- ढोला मारूनी दोनों बातां नी लागे
- तीतर रै तूं बामै दाहने बोल
- तू देख बीबी राधिके! यह कैसे वर आये
- तूं क्यूँ रे पूत अकेलड़ा तेरा लाखी रे दादा तेरे साथ
- तूं क्यों लाडो डगमगी तेरे समरथ बाबा जी
- तूं तै चाल घोड़ी चाल मेरे दादा कै दरबार
- तेरा तीजन सूना होय
- तेरा दादा रै बरजै बन्दड़े सांझै चढ़िये
- तेरा हर्या पीपल सौंपल डाली भौं पड़ै
- तेरो हरयो ए पीपल संपुल
- तोरो जरा हुक्म मिल जाये सास
- दसमास रे बेटा बोझ मरी थी
- दादा जी नै गोद भरी मेवा सै
- दीवा किसने बैठ घड़ाइआं
- दीवा कै मण रै दीवा कै मण
- दुराणी जिठानी बाबुल बोली हो मारैं
- दूधी की धार मारूं माता नै
- दो खरबूजे एक से क्या जी
- धण पिआ मताए मताइआं जी
- नगरी नगरी द्वारे द्वारे
- नीम्ब के लागी निम्बोली दादा हो
- परोस दिये भाजी लड्डू पूरी पकवान जी
- पहला फेरा लीजिए दादा की है पोती
- पड़ै बुन्दियां भरैं क्यारी समय बरसा लगे प्यारी
- पाँच पतासे पान्या का बिड़ला
- पाँचू तेरे कापड़े कोनै सिमाए ए बना
- पिया मेरी किलफां ले जा
- पूछें अपनी गोरड़ी कैसा रानी जी थारा भाग
- फलाणे की बहु का घागरा
- बनड़ी! चलो जी हमारे साथ
- बनड़े की घोड़ी बिदकै मेरा कलेजा धड़कै
- बनड़े सीस तेरे का सेहरा
- बन्ना ए कित बाजा रे बाजिया
- बन्ना काली रे बदरिआ गोरा चन्दा
- बन्ना जी मैं तो राज घर सै आई
- बन्ना तो हांडे अपने बाबा जी की गलियां
- बनी ए थारे बाबा जी से कहियो
- बनी ए बाबा उमराओ मंगाओ हीरां की चूड़ी
- बागां में मेंहा बरसै सरवर पै मेंहा बरसै
- बाजा है नघारा रणजीत का है
- बाबल साहब की बांकी हवेली
- बाबा जी के कमरै मैं बन्ना जी बुलाए
- बाबा देस जांदा परदेस जाइयो
- बाबे तेरे की दोय क्यारियां
- बीबी की दादी रानी जी से अरज करै
- बीबी तेरे बाबा जी खड़े
- बीबी तो म्हारी जैसे चन्दा चकोर
- बीबी दूर खेलण मत जा
- बीबी हमारी है चांद तारा
- बीरा थे दाम्मण भल ल्याईओ
- मनैं बहली दीखी आवती साथिण के आए लणिहार
- म्हारे आंगण कीचड़ा
- म्हारे घेर में आ रह्या री बटेऊ
- म्हारे बंदड़े का सोन्हा जामां
- म्हारै आंगणा बाजा बाजिया जी मंकारा
- मुबारिक सादी हो बनड़े ये घोड़ी नाचती आई
- मुरकियां बारो आयो री मरोड़ घणी
- मेरा री हरियाला बन्ना लाख करोड़ी
- मेरा सुसरा बरजै हे बहू!
- मेरी बन खंड को कोयल बन खंड छोड़ कहां चली
- मेरी बीबी सोवै अटरिया
- मेरी मालन रंगीली गून्थ लायी री सेहरा
- मेरी मेहंदी के औड़े चौड़े पात
- मेरी सांझे तील दिखा दई कर दिया मकर कसार
- मेरी सोने की सलाई साजन लेन चले
- मेरे दादा के पछवाड़े आले आले बांस खड़े
- मेरे दादा जी चितर एक जस ल्यो
- मेरे नौसे का रूमाल खुसी से रंग दे री
- मेहंदी बोई दिल्ली आगरा जी
- मैंडे के नीचे लाडो दो जणें खेलें
- मैं तो थारा डेरा निरखण आई हो
- मैं तो बीस बरस की होली
- राजी हुए ऊं के दादा दादी खुसी हुई महतारी जी
- रावटड़ी चढ़ सूत्या बाई का बाबा जी
- रे बीरा साढ़ तो पहलड़ा मास
- ल्हुक बैठ हे राणी रुकमण राणी
- लाडो ए बागां का जाना छोड़ दो
- लाडो खेलै लौंग के बिरवे तल
- लाडो दूर मत खेलण जा हे
- लाडो पूछै बाबा से ए बाबा
- लाडो सोई सोई उठि जांगियां
- ले रे बाबुल आपना मैं चली हूं सजन के दैस रे
- सखी री मेरे उमड़ आये बदरा
- सखि हे मेरी राम राम ले ल्यो
- सदा थिर रहियो जी अविचल रहियो
- साथिण का जंचा दिया ठीक मावस कै अड़कै
- सीस तेरे चीरा हरियाले बन्ने पेची अजब बहार
- सीस बनै के सेहरा सोए
- सुण सुण मौसा सुणी’क नां
- सुहाग मांगण गई आं
- सुहाग मांगण दादी पै गई
- हथलेवो दादा को ए पोती कर हथलेवो कराइयो
- हमने बुलाये सुथरे सुथरे भूंडे भूंडे आये री
- हरजी उगन तै परभात
- हरियाले बन्ने चीरा तो ले दूं तेरी मौज का
- हरे हरे बांस छवाय दई राय बटियां
- हरे हरे बांसों का बंगला छवा दो जी
- हलबल हलबल नदी बह सै
- हाथों जरी का रूमाल बन्ना री मेरा मेवा ल्याया
- हुआ नगर सब सूना
- हुई है सुनहली रात सजन आए हरे हरे
- हे कपड़े तों क्यूं ना धुआए मेरा ए बाबा
- हे दादा कै छजै लाडो तूं क्यूं खड़ी
- हे फुलड़े तो बीन्हण
- हे मनै ल्याओ न हल्दी की गांठ रे
- हो सून्ने की कुंडली घड़ा तेरे दादा
मृत्यु गीत : हरियाणवी लोकगीत
राम गीत : हरियाणवी लोकगीत
देवी माँ के गीत : हरियाणवी लोकगीत
हरियाणवी भजन : हरियाणवी लोकगीत
- ईसवर के गुण गाइये मेरी बहना
- उठ जाग रै मुसाफिर किस नींद सो रह्या है
- ए जी जित बांटे झोली भर फूल
- कित रम गया जोगी मंढी सूनी
- गजराई नै टेर लगाई गज घंटा दिया बजाई
- गलती मैं जो कुछ बणी सो बणी
- तू परेम के रंग मैं रंग दे चोला आण रे बनवारी
- दुख देते मात पिता को वे नहीं धरम के लाल जी
- दुनिआं मैं रे बाबा नहीं रे गुजारा किसी ढब तै
- दे दे करण तैं दान जाचक खड़े साह्मणै
- बहणो सुणो लगा के कान
- बागां मैं दुख सै बगीचां मैं दुख सै
- बेबे हे करम्यां की गत न्यारी
- भजन हरि का कर प्राणी
- मन डटदा कोन्या डाटूं सूं रोज भतेरा
- मुख तै बोलो रे जै जै सीता राम
- मेरी तेरी कोन्या बणै रे मन ऊत
- या पंचाती धरमसाला क्यूं करदा झूठी मेर रे
- लोभ मोह उड़ै दोनूं ए कोन्यां धर्म तुलै सै हमेस
- सात सखिआं के झूमके राधे न्हाण चाली हो राम
- हरि भज ले हरि भज ले
- हे राजा राणी चले बनबास बड़ तले ला लिया डेरा
- हे हर जी ल्याए हैं झोली भर फूल
देवठणी के गीत : हरियाणवी लोकगीत
कातक न्हाण के गीत : हरियाणवी लोकगीत
सांझी के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- आरता ए आरता संझा माई आरता
- आरता हे आरता सांझी माई आरता
- जाग सांझी जाग तेरे मात्थे लाग्या भाग
- डूंगी सी डाबर रे कै फूलां की महकार
- नौ नौ नौरते संझा माई के
- म्हारी सांझी ए के ओढैगी के पहरैगी
- मेरी सांझी के औरे धोरै फूल रही कव्वाई
- सांझी सांझा हे कनागत परली पार
- हे खड़िआं थी सिरस तलै
- हे मेरी सांझी तेरी चम्पा फूली
फागण के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- उड़े हो गुलाल रोली हो रसिया
- ऊंचा रेड़ा काकर हेड़ा विच विच बोदी केसर
- एकली घेरी बन में आन स्याम
- ए मेरी पतरी कमर नारो झुब्बादार लाइयो
- काची अम्बली गदराई सामण मैं
- कान्हा बरसाणे में आ जाइयो बुलागी राधा प्यारी
- कांटो लागो रे देवरिया
- कुरड़ी कूड़ा मां गेरती, कुरड़ी लागी आग
- गोदी के अंदर भगत राम राम रह्या टेर
- जब साजन ही परदेस गये मस्ताना फागण क्यूँ आया
- ढुंढ़वा दो बंसी मोरी जी
- फागण के दिन चार री सजनी
- माता यसोदा दही बिलोवे
- मेरी नई नई जवानी बिगाड़ी रसिया
- यासोदा तेरे लाल ने मेरी दी है मटकिया फोड़
- रसिया को नारी बनाओ री
- रै चुन्दड़ी तेरा जुलम कसीदा
- लिछमन के बाण लगा रै सक्ती लिछमन कै
- समझा ले अपनो लाल री
- होली आई रे फूलां री जोड़ी झरमटीयोले
- होली खेल रहे शिव शंकर
- होली बी खेले ढप बी बजा
सावन के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- आठ बुल्दां का रे हालिड़े नीरणा
- आई री सासड़ सामणिया री तीज
- आया तीजां का त्योहार
- आया आया री सासड़ सामण
- ऊंची कीकर हे मां मेरी पालना री
- कच्चे नीम्ब की निम्बोली
- कड़वी कचरी हे मां मेरी कचकची जी
- घड़ा ए घड़े पै दोघड़ चन्दो पाणी नै जाये जी
- घोलो री नंणद मेंहदी के पात
- झुक जाय बादली बरस क्यूँ ना जाय
- झूलण आली बोल बता के बोलण का टोटा
- झूलण जांगी ऐ मां मेरी बाग में री
- झोलै मैं डिबिआ ले रह्या
- तीजां का त्योहार रितु सै सामण की
- तीजां बड़ा त्योहार सखी हे सब बदल रही बाना
- नांनी नांनी बूंदियां मीयां बरसता हे जी
- नांनी नांनी बूंदियां हे सावन का मेरा झूलणा
- बर के गोदे झूलती रे बिटाऊ ढोला सात सहेलिन बीच
- मुड़ मुड़ डालै झूलती सुनहरी ढोला
- मीठी तो कर दे मेरी मां कोथली
- मीट्ठी तो कर दे री मोस्सी कोथली
- मेरी पींघ तले री लांडा मोर
- मेरे गोरे बदन पै रंग बरसै
- मोटी मोटी बून्दां झले पै आई
- रे गगन गरजै झिमालै बिजली
- लाट्टू मेरा बाजणा, बजार तोड़ी जाइयो जी
- लाल कुसमियां पुगाइयो मेरे बाबल
- सात जणी का हे मां मेरी झूलणा जी
- सामण आया हे मां मेरी मैं सुण्या जी
- सामण आया हे सखी सामण के दिन चार
- सामण का महीणा मेघा रिमझिम रिमझिम बरसै
- सासड़ नै भेजी हे मां मेरी चुंदड़ी जी
- सासू तो बीरा चूले की आग
- हरी ए झंजीरी मनरा न पहरूं
- हरी ये जरी की हे मां चुन्दड़ी जी
- हे री आई सै रंगीली तीज
- हे री सखी सावन मास घिरण लाग्यो
हरियाणा के प्रेमगीत : हरियाणवी लोकगीत
- आणे का वायदा किया, हो आए ना बालमा
- आया था ओ गेहूं काट कै
- ऊंची सी अटारी मेरी पानै फूले
- ए परदेसी चाल्या जाइये
- क्या यह किसमत की खूबी बालमा खोटे मिले
- खिल खिल गए दो दाणे अनार के
- खूंटी पै तै झोला तार कै रै
- गांधी का फोटू खिंचा है सांवरिआ
- जानी छज्जै तै ईंट गिरी होती
- जीजे कै सिरहाणे साली कद की खड़ी
- जैपर जाइओ जी ढोला
- झिल मिल साफा बांध दिखे री
- ठहर बटेऊ ठहर बटेऊ के नै जाइये
- तेरे पकडूं घोड़े की लगाम जाण न दूं पिया नौकरी
- नाई की तेरे लाम्बे लाम्बे खेस
- पिया पतले जी पतंग जैसे पैर
- बागां के मैं मत जाइये नार सैन मार तक लेगा
- बेकदर को दिल दिया है देखना कैसे निभे
- बोये चले थे भंवर जी पीपली
- मेरा नैफा डिगर ग्या भरतार मेरे तै लड़कै
- मेरी भूरी भूरी पींडी री सासड़ काली जराब
- मेरे टांडै मैं सोला सै राणी
- मेरे राजा भीजै मेरी चम्पा साड़ी
- ये जुल्मी नैण बुरे कोए दिन याद करो
- राजा गर्मी के मारे अंगिया भीजै हमारी
- राजा पतले रे राजा पतले रे
- राधा चली गई मेले
- रोटी पूई धरी तड़के की देखूं बाट तेरे लड़के की
- लम्बी नाड़ लटकमा चोटी
- ले ले हे गोरी म्हारी नमस्ते हम तो नौकर चाल पड़े
- सरवर पाणी नै गई सुण आई नई नई बात
- सुसराल पणै मैं चाल पड़ा रे
- सोह्रा मेरा लोभी बेटे न भरती घालै सै
- हाय ला दो पान पिटारी, हमारे जाने की तैयारी
- हार सै सिंगार छोरियो कुरता ढीला हे
- हे मेरा पति बड़ा धोखे बाज मिरै तै दे गया धोखा
- हे मेरे नौकर गए भरतार
- हो बरसाणे वाली कदम्ब नीचे आइयो री
- हो रास्ते में पड़ गयो झील, छेल तेरे आने जाने में
खेती-बाड़ी के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- अरे न्यूं रोवै बुड्ढा बैल
- ईख नलाई के फल पाई
- उड़ जा रे कागा लेजा रे तागा
- ऊपरां बादलिड़ा ऊपरां क्यूं जा
- एक रोटी को बैल बिका
- कात्यक बदी अमावस आई
- ताकतवर बलवान बना
- धरती माता नै हर्यो कर्यो
- न्यूं कह रही धौली गाय
- पड़ते अकाल जुलाहे मरे
- पड़ा रहा छप्पनियां का काल
- पांच पंचास की नाथ घड़ाई
- बनवारी हो लाल कोन्या थारै सारै
- बाजरे की रोटी पोई रे हालिड़ा
- बोया बोया री मां मेरी बणी
- बोहत सताई ईखड़े तन्नै बोहत सताई रे
- हालिड़े हालिड़े हल घड़वा ले ओरणा
पनघट के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- अंबर बरसा बड़ा चिवा मेरी सासड़
- उठ उठ री नणदल पानी ने चाल
- कोई सात जणी पाणी जायं री
- खिल रहा चान्द लटक रहे तारे
- चारों सखी चारों ही पनियां को जायें
- टोकणी पीतल की रे
- तू पाणी पाणी कर रह्या बटेऊ
- पनियां भरन चली बांकी रसीली
- मुझे पानी को जाने दो
- मेरा मन ते रपटा पैर फूट गई झारी
- मेरी नाजुक नरम कलाई रे
- मेरी बावन गज की बूंद
- मेरे सीस पै घड़ा घड़े पै झारी
- मैं तो धुर टांडे तै आया परी
- रसीले नैन गोरी के रे
- सिर पर दोगढ़ ठा नणद री
- सिर पै बंटा टोकणी
- हे री सासड़ आजपाणी नै जांगी
चक्की के गीत : हरियाणवी लोकगीत
महात्मा गांधी के बारे में गीत : हरियाणवी लोकगीत
- अमीर गरीब में पड़ी जो खाई
- अहिंसा परम धरम कहलाया
- आजादी की हुई लड़ाई
- एक जलेबी तेल में
- कोरी कोरी चांदी की कांगणी
- गंगा नीर जणो सोभा पा रिहा
- गांधीजी के बारे में
- गांधी था सत का मतवाला
- गांधी बाब्बू का आया जमाणा
- घर घर लन्दन मेमां रोवैं
- जवाहर लाल भी रह्या करें थे
- तेरे घर में घुस गए चोर
- देख कै ने गांधी का चरखा
- देस के हो रे थे बारां बाट
- नत्थू राम! तन्नै सरम ना आई
- पिया मन्नै इक चरखा ल्यादे
- हथ करघे का कपड़ा पावैं
- हरणे नै भारत का कलेस
रहन-सहन के गीत : हरियाणवी लोकगीत
- आध पाव बाजरा कूट्टण बैठी
- इब की छोरी न्यूं बतलाई
- उजला भोजन गाए धन
- काला दाम्मन चक्कर काटै
- जाड़ा लागै पाला लागै खीचड़ी निवाई
- दिल्ली की दलाली
- देसां मैं देस हरियाणा
- नाई के रे नाई के ल्याइए कमला नैं
- बाजरा कह मैं बड़ा अलबेल्ला
- बाजरे की रोटी पोई रै हलिड़ा
- म्हारो मीठो लागै खीचड़ो
- मीठी लागै बाजरे की राबड़ी रै
- सास री भार्या सा दामण सिमा
- सुण कमला गोरी भाण हे बेबे
सैनिक गीत : हरियाणवी लोकगीत
विविध : हरियाणवी लोकगीत
- अच्छे लीला गोद मेरी
- अरे निऊँ रौवै बूढ़ बैल
- अरै मैं बुरी कंगाली धन बिन
- अली - गली अरी नणदी मनरा फिरै
- एक जाट और एक जाटणी बालक बनायो
- एक दिन करो सिंगार नार ने
- एक दिन होगा ढेर मैदान में
- ए बहू आई असल गंवार
- ओ नये नाथ सुण मेरी बात
- और जाल सब भिणभिणी तूं क्यों हे हरियाली
- कदिया ना गये राजा नौकरी
- कृष्ण जन्म
- कात्तिक बदी अमावस थी और दिन था खास दीवाळी का
- काला बहल जुड़ाइयां मैं
- कोई तौ दिन हाँड़ लै गलिएँ
- कोई बरसन लागी काली बादली!
- कोण ज खेलै मां गींड खुली
- गहनो दे घरवाई मरद ते कह लुगाई
- गंगा जी तेरे खेत मैं
- गाड़ी तलै मनै जीरा बोया
- गोपीचन्द
- चन्दा तेरो चान्दणे कोयली बोले
- जरमन तेरा जाइयो राज
- जरमन नैं गोला मारिया
- जाट का मैं लाडला
- जेवर की झंकार नै डोब दिया
- जोडूं हाथ बलम तैं तेरे आगे
- झूठ तै मैं बोलूं कोन्या झूठ की म्हारै आण
- टोकणी पीतल की कुआं का रे जल भर लाई
- तिरिया एक चतर पर बहना
- तेरा मारिया ऐसे रोऊँ
- थोड़ा-सा नीर पिला दै
- दोनू हाथ्थाँ के म्हाँ ले री लोटा पाणी का
- धन जोबन में सन्नाई
- नथली के जुलमी तोता
- नर नारी की हो गई इक दिन
- निऊँ कह रही धौली गाय
- पांच बरस की ब्याह के उठ गए
- पिया, भरती मैं हो लै ने
- पीतल की बालटी आले
- पीहर मेरो मालवो
- बरस्या बरस्या रे झंडू मूसलधार
- बस देख ली आजादी हामनै म्हारे हिन्दुस्तान की
- बहुत सताई ईखड़े रै तैने
- बहू हे तेरा नाम चमेली
- बाजरा कहे मैं बड़ा अलबेला
- बाबा मांडा बल ग्या मैं खा ल्यूंगा
- बांदी भेजूं हो साहब
- बिन मिलती जोट मिलाई
- भरती हो लै रे थारे बाहर खड़े रंगरूट
- मन्नै तो पिया गंगा न्हुवादे
- महलां तै बैठी तेरी माता झरुवै
- माता पिता ने धरम डिगा दिया
- मेरा कैहा मान पिया
- मेरी सास ने सात जाये
- मेरे आगे तेरी उठे कहा है
- मेरे आंगण मां मेरी कड़वा-सा नीम
- मेरो गढ़ ददरेड़ी बड़ो सहर हिन्दुवाना
- मैं अंग्रेजी पढ़ गई बालम
- मैं तो पाडूं थी हरी हरी दूब
- मैं बैठ्या खेत के डोले पै
- मैं हूर परी बाँगर की
- मोटी सी साड़ी ल्या दै हो
- मोरे क्यों गेरेस भूल
- रंडुवा तो रोवै आधी रात
- रूप तेरा चन्दा-सा खिल रिया
- रोहतक में पाणी बड्ग्या
- लाला लाला लोरी दूध भरी कटोरी
- सामण आयो रंगलो कोई
- साढ़ जे मास सुहावणा सुआ रे
- सास मन्ने नेवरी घड़ा दे री
- सास मैं तो पाणी नै गई थी री
- सासू बी बहरी सुसरा भी बहरा
- सुणिये मेरे मिन्त कथा
- सूरत सिंह पहुंची बन्धवा ले रे
- हालत एक गरीब किसान की
- हो दिल्ली में बिक रही छींट
