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सावन/बरसात/वर्षा ऋतु पर कविताएँ
Poems on Sawan/Barsat/Varsha Ritu in Hindi
अमीर खुसरो
अम्मा मेरे बाबा को भेजो री कि सावन आया
आ घिर आई दई मारी घटा कारी
नज़ीर अकबराबादी
बरसात की बहारें
सुमित्रानंदन पंत
सावन
बादल
काले बादल
कृष्ण घन
बदली का प्रभात
मेघों के पर्वत
रामधारी सिंह दिनकर
पावस-गीत (नील कुसुम)
राजा वसन्त वर्षा ऋतुओं की रानी
सावन में
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला
बादल राग
घन, गर्जन से भर दो वन
बादल छाये
लू के झोंकों झुलसे हुए थे जो
फिर नभ घन घहराये
मालती खिली, कृष्ण मेघ की
महादेवी वर्मा
कहाँ गया वह श्यामल बादल
कहाँ से आये बादल काले
मैं नीर भरी दुख की बदली
लाए कौन संदेश नए घन
श्याम घटा
जयशंकर प्रसाद
पावस-प्रभात
हरिवंशराय बच्चन
आज मुझसे बोल, बादल
वर्षा समीर
यह पावस की सांझ रंगीली
आज घिरे हैं बादल, साथी
भीग रहा है भुवि का आँगन
यह पपीहे की रटन है
है पावस की रात अँधेरी
पपीहा
दुष्यंत कुमार
वर्षा
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
बादल
भारतेंदु हरिश्चंद्र
हरी हुई सब भूमि
त्रिलोक सिंह ठकुरेला
सावन बरसा जोर से
शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'
वर्षा