Mohanjeet Kukreja | मोहनजीत कुकरेजा
मोहनजीत कुकरेजा (‘एमके’) दिल्ली विश्वविद्यालय से एक भेषजी स्नातकोत्तर (एम. फ़ार्म.) हैं, व्यवसाय से दवा-उद्योग से सम्बंधित हैं और लेखन तथा शायरी में बेहद दिलचस्पी रखते हैं। जब ‘एमके’ की पहली कविता प्रकाशित हुयी थी, वह अभी ग्यारहवीं कक्षा में ही थे। छंदमुक्त कविता से शुरुआत करने के बाद इतने अंतराल में आज-कल उनको काव्य की सबसे जटिल शैली, ग़ज़ल लिखना पसंद है। हिंदी और उर्दू के बहुत ख़ूबसूरत मिश्रण से मोहनजीत तक़रीबन हर विषय पर कविताएँ और कहानियाँ लिखते हैं, फिर चाहे वो रूमानी हो, ज़िन्दगी का फ़लसफ़ा या सूफ़ी। अपनी ठहरी हुयी, धीर-गंभीर आवाज़ में बहुत ही प्रभावशाली तलफ़्फ़ुज़ के साथ, अपनी और दुसरे प्रतिष्ठित शायरों की चुनिंदा रचनाओं को, पढ़ कर की गयी रिकॉर्डिंग को भी अक्सर साझा करते हैं।
मोहनजीत कुकरेजा की रचनाएँ
हिन्दी ग़ज़लें मोहनजीत कुकरेजा
- वाइज़ और मैं…
- लोग कहते हैं इश्क़ छोड़ !
- ज़िन्दगी में हर एक को...
- मुंतज़िर
- अंजाम..
- वारदात...
- अंदाज़-ए-ज़िन्दगी
- ऐ ख़ुदा तेरा शुक्रिया !
- वक़्त से...
- तो बात बने…
- हिम्मत-अफ़्ज़ाई !
- उसका निज़ाम...
- दौर-ए-आइंदा
- अभी था...
- फ़ितरत पे सवाल…
- फ़रियाद नहीं थी...
- खुला आसमान...
- दिल से गुफ़्तुगू
- बरसात का मौसम
- उम्र-क़ैद…
- सफ़र का सामाँ तो है !
- गुज़रते हैं हम
- सूरत-ए-अहवाल
- चलो सजदों में झुक जायें
- हाकिम-ए-आ'ला
