Isuri | ईसुरी

ईसुरी का जन्म चैत्र शुक्ल १० संवत १८९५ विक्रमी (सन् १८३८) को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के मऊरानीपुर के गांव मेंढ़की में हुआ था। उनका पूरा नाम हरताल ईसुरी था। इनके पिता का नाम भोलेराम अरजरिया था। वे कारिन्दा स्वरूप चतुर्भुज जमींदार के पास कार्य करते थे। उन्हें बगौरा गाँव बहुत प्रिय था। उनका निधन अगहन शुक्ल ६ संवत १९६६ विक्रमी (सन १९०९) में हुआ।

भारतेन्दु युग के लोककवि ईसुरी पं. गंगाधर व्यास के समकालीन थे और आज भी बुंदेलखंड के सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हैं। ईसुरी की रचनाओं में ग्राम्य संस्कृति एवं सौंदर्य का वास्तविक चित्रण मिलता है। उनकी ख्याति 'फाग' के रूप में लिखी गई उन रचनाओं के लिए है जो विशेष रूप से युवाओं में बहुत लोकप्रिय हुईं।

गौरी शंकर द्विवेदी ने उनकी फागों का प्रथम संकलन तैयार किया था। ईसुरी को बुंदेलखंड में जितनी ख्याति प्राप्त हुई उतनी किसी अन्य लोककवि को नहीं मिली। अपनी काल्पनिक प्रेमिका 'रजऊ' को संबोधित करके लिखी गई रचनाओं के लिए ईसुरी को लोक में विशेष पहचान और आलोचना दोनों का सामना करना पड़ा।

लोककवि ईसुरी

ईसुरी की फाग Isuri Ki Phaag : Isuri

ईसुरी की रचनाएँ Isuri Ki Rachnayen : Isuri