Jaychand Prajapati Jay (जयचन्द प्रजापति 'जय')
जन्म: जुलाई 1984 (गाँव जैतापुर, तहसील हंडिया, जिला प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
शिक्षा: स्नातक, पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा एवं मास कम्यूनिकेशन कोर्स
लेखन विधाएँ: कविता, बाल कविता, लघु कहानी, हास्य-व्यंग्य एवं लेख
व्यवसाय/सम्प्रति: निजी स्कूल में अध्यापन, साप्ताहिक समाचार पत्र का सम्पादन एवं प्रकाशन
उपलब्धियां एवं सम्मान: देश के विभिन्न समाचार पत्रों तथा साहित्यिक पत्रिकाओं में रचनाएँ निरंतर प्रकाशित। अनेक साहित्यिक मंचों द्वारा 'श्रेष्ठ रचनाकार सम्मान' से सम्मानित।
हिन्दी कविताएँ (Hindi Poetry)
- एक नाबालिक लड़की
- हम फुटपाथ के आदमी हैं
- बचपन
- एक उदास जज
- वे दौर थे पहली कक्षा का
- हँसने दो
- पीढ़ियाँ
- वह मजदूर
- हम वेश्या हैं
- छेड़छाड़ का दंश
- मुझे अनाथालय नहीं जाना है
- नारी की वेदना
- क्या मेरी कीमत नही है?
- मां
- नारी
- गांव का भोला भाला
- दादा जी
- दादी जी
- आदिवासी बच्चियां
- मैं भागकर शादी कर ली
- चंदामामा जी
- फूल
- सुनो हवा
- प्रेमिका की मौत
- श्रृंगार रस की कविता की ताकत
- बन गया कवि
- उठो
- लिखो खत
- मेरी माँ
- सुंदर मन
- मजदूर
- अध्यापक
- रिक्शा चालक
- माँ की कीमत
- पर्वत,जो मूक खड़े हैं
- सर्दी में एक स्त्री
- एक थे अटल
- एक पूर्ण स्त्री
- मेरी कवितायें
- मेरी दृष्टि
- मत सताना
- देश के नेताओं
- दिव्य पुरुष
- वे लोग
- ठंड की रात
- ये जिंदगी
- कुतरी जिंदगी
- कर्म सर्वोपरि
- गुब्बारावाला
- जिंदगी तुम्हारे बिना
- अपनापन
- कोहरे में लिपटी सुबह
- थके हारे लोग
- एक गरीब लड़की
- छ: मासूम बच्चे
- अनाथ लड़की
- जागो तुम
- मदहोश
- तुम कहां हो
- एक स्त्री घर में
- सब कुछ ठीक है
- मकर संक्राति
- जानवर और आदमी
- कोहरा
- कोहरे में
- उषा का आगमन
- हे पंछी!
- रात में
- परदेसी का संदेश
- छात्र का गुण
- सत्य
- भरोसा
- एक अभागन मां
- बसंत का आगमन
- सरस्वती वन्दना
- चाहत
- नफ़रत छोड़ो
- देश हमारा
- सभ्यता
- रोटियां
- उनकी बेबसी पर
- पुरुष का हुकुम
- साहस
- धैर्य
- समय की कीमत
- दिखावा
- जरा तुम सोंचो
- अपने घर में
- धूप-छांव
- पढ़ा-लिखा गंवार
- निश्चल प्रेम
- अपनी-अपनी खुशी
- कुछ चेहरे
- मजेदार पैग
- वे हंसते हैं
- खामोशी
- तुम्हारी सुन्दरता
- एक रंग जो मुझ में रहता है
- नारी के बिना अधूरा संसार
- महिला को जो सताता है
- मेरा दिन
- बस चलता जा रहा हूं
- तुम्हारी कविता का प्रकाश
- युद्ध मत करो
- सबसे बड़ा सबूत
- हाँ, मैं मजदूर हूँ
- मां वीर योद्धा होती है
- विचारों का हथियार
- प्रतापगढ़ की बिटिया
- मिलीभगत का परिणाम
- पिता
- कलम
- उनका हिस्सा
- निष्ठुर समय
- हे नवांकुरों
- किशोर की ललकार
- हारे लोग
- हे कवि नीरज
- कितना लिखूँ
- मेहनत से मत भागो
- सावन की फुहार
- वे किसान
- तुम्हारी अकड़
- आरक्षण की हल्दी
- शराब मत पियो यारों
बाल कविताएँ (Baal Kavitayen)
- चाचा नेहरू
- बंदर मामा
- चूहा बेचारा
- जाड़ा आया
- चीकू-मीकू
- काला चींटा
- मूली और बैंगन
- आलू
- मैं हूँ घर का राज दुलारा
- मुर्गी और उसके चूजे
- गर्मी का मौसम आया
- मम्मी और बच्चों का खेल
- बसंती हवा चली है
- पिज़्ज़ा और बर्गर की लड़ाई
- चींटी गुड़ खाती है
- नन्हा मोनू
- मेढकी मेढक से बोली
- काग़ज़ का नाव बनाते
- भोली-सी चिड़िया
- बादल
- मेढक
- तितली
- नानी
- जुगनूं
- रिमझिम बरस रहे बादल
