बाल कविताएँ : जयचन्द प्रजापति 'जय'

Baal Kavitayen : Jaychand Prajapati Jay


चाचा नेहरू

चाचा नेहरू सबको अच्छे लगते हैं, बच्चे उनको चाचा नेहरू कहते हैं। चाचा को बच्चे खूब अच्छे लगते हैं, चाचाजी बच्चों को फूल समझते हैं। बच्चों को देश की फुलवारी कहते हैं, बच्चे चाचाजी को दिल में रखते हैं। चाचा बच्चों संग बच्चे बन जाते हैं, बच्चे भगवान का रूप कहे जाते हैं। जहां बच्चों को प्यार नहीं मिलता है, वह घर-आंगन सूना-सूना रहता है।

बंदर मामा

बंदर मामा बंदरिया लाये, ढोल,मजीरा साथ भी लाये। बंदर ढोल मजीरा बजाया, बंदरिया ने नाच दिखाया। सब ने ताली खूब बजाई, बच्चों ने हल्ला खूब मचाई। बंदर ने ऐसा खेल खेला, लग गया लोगों का मेला। बंदरिया ने सबसे मांगा पैसा, सबने दिया उसको छुट्टा पैसा।

चूहा बेचारा

चूहा को लालच आया, चूहेदानी में रोटी खाया। चूहेदानी में अटक बेचारा, चूहा दिनभर रोया बेचारा। मम्मी-मम्मी कहकर रोया, इतने में गोलू दौड़ा आया। चूहे की मदद करना चाहा, सिर हिलाकर बोला आहा। धीरे से चूहेदानी को खोला. चूहा गोलू को थैंक्यू बोला।

जाड़ा आया

देखो बच्चों,जाड़ा आया। सबसे प्यारा मौसम आया।। स्वेटर, टोपी साथ में लाया। हल्की-हल्की छींक भी लाया।। रजाई और तकिया भी लाया। शादी की शहनाई भी लाया।। हरी-हरी तरकारी भी लाया। जाड़ा गली-मोहल्ले से आया।।. हरी मटर की फलिया लाया। सरसो की पीली चादर लाया।। घर में नया-नया मेहमान आया। देखो प्यारे ये ठंडी हवा लाया।। धरती पर कोमल मुस्कान लाया। देखो बच्चों, मस्ती में जाड़ा आया।।

चीकू-मीकू

चीकू-मीकू दो भाई थे, रोज सुबह-सबेरे उठते थे। एक-दूसरे से गले मिलते थे, आपस में वे खूब हंसते थे। नहीं करते झगड़ा-लड़ाई, दोनों करते खूब पढाई। दोनों भाई मिल बांटकर खाते, आपस में छीना-झपटी नहीं करते। रोज दोनों भाई खूब मस्ती करते, किसी को कभी गाली नहीं देते।

काला चींटा

काला चींटा एक दिन मां से बोला, ठंडी के मौसम में दे दो एक झोला। आलू, गोभी, टमाटर, बैंगन लाऊंगा, रोज-रोज, हरी-हरी सब्जी खाऊंगा।। बड़ा होकर मैं रोज स्कूल जाऊंगा, रोज-रोज गिनती पहाड़ा सुनाऊंगा। लड़ाई-झगड़ा जो बच्चे करते हैं, सरजी की डंडी रोज खाते हैं।। और बड़ा होकर नानी के घर जाऊंगा, बड़े बड़ों का सम्मान हर पल करूंगा। और बड़ा होकर खूब कमायेंगे पैसा, पैसा कमाकर हो जाऊंगा बड़ो जैसा।। पान, गुटखा, तम्बाकू नहीं खाऊंगा, चोरी, बेईमानी कभी नहीं करूंगा। प्रेम का सच्चा जीवन अपनाऊंगा, छोटे, बड़े सबको गले लगाऊंगा।।

मूली और बैंगन

बच्चों,मूली है गोरी-गोरी दिखती है प्यारी-प्यारी रोज खूब नहाती-इतराती खूब हंसकर नखरे करती काले बैगन को चिढाती मस्ती में मुँह खूब बनाती मूली बैगन को काला कहती मूली बैगन को भाव नहीं देती बैगन ने जब आंख दिखायी मूली शरमा कर भाग गयी बैगन खिलखिलाकर हंसा बच्चों मजा आ गया ढेर सा

आलू

सुनों बच्चों, मैं आलू हूं बहुत सयानी आलू हूं सब सब्जी की खालू हूं समझो मैं बहुत चालू हूं मेरे बिन नहीं सब्जी बनती सबकी चाची यही कहती जो मुझसे मिलके रहता है उसका स्वाद बढ जाता है जो मिलकर नहीं रहते हैं वे अलग थलग रहते हैं

मैं हूँ घर का राज दुलारा

मैं घर का सबसे प्यारा हूं इसलिए सबका राज दुलारा हूं सबकी आंखों का तारा हूं पूरे घर में सबसे न्यारा हूं तब बहुत मजा आता है रोज मम्मी-पापा करते मेरी खोज छुपकर बैठ जाता आलमारी में मिठाई खाता रोज आलमारी में जब मिठाई खाते पकड़ा जाता तब खूब डंडों से पिटाई होता

मुर्गी और उसके चूजे

मुर्गी रोज दाना चुगती अपने चूजे के साथ रहती चूजे खूब मस्ती करते इधर-उधर दौड़ करते मुर्गी रोज चूजों से कहती मैं किसी से नहीं डरती एकदिन बिल्ली मौसी आई सारे चूजों में डर समाई मुर्गी बोली डरो नहीं प्यारे आओ पंखों में छिपो प्यारे

गर्मी का मौसम आया

गर्मी का मौसम आया, आइसक्रीम वाला आया। बच्चों ने आइसक्रीम खाया, मोनू आइसक्रीम नहीं पाया। जोर से मोनू आंसू बहाया, सारे बच्चों ने हंसी उड़ाया। मम्मी ने दहीबड़ा खिलाया, मोनू खूब ठहाका लगाया। सारे बच्चों ने मुंह लटकाया, मोनू ने खूब ताली बजाया।

मम्मी और बच्चों का खेल

मम्मी बच्चों की प्यारी मम्मी होती है, रोज बच्चों से ही मम्मी दुलराती है। बच्चे मम्मी के कंधे पर चढ़ जाते हैं, सारे बच्चे मिलकर खूब मस्ती करते हैं। मम्मी बच्चों की कितनी प्यारी होती है, तभी बच्चों को सबसे ज्यादा भाती है। जब मम्मी दूध-भात की कटोरी लाती है, नन्ही गुंजा छत पर चढ़कर खूब हंसती है। बंदर सा मुंह बनाकर खूब चिढ़ाती है, मम्मी नन्ही गुंजा को पास बुलाती है।

बसंती हवा चली है

बसंती हवा चली है झूम के चली है। गीत गाकर चली है, खिलखिलाकर चली है। खेतों से होकर, बागों से मिलकर। गलियों में चली है, फूलों पर चली है। सखियों से मिलने, साथ-साथ चलने। बच्चों से खेलने चली है, मेंहदी रचाने चली है। खुशबू तन में लपेटे हुए बारात में झूमते हुए। सबको हिलाते चली है, शीतल हवा चली है। सबको हंसाते हुए, अंजुरी में पानी लेते हुए। सब पर छिड़कते चली है, बसंती हवा मुस्काते चली है।

पिज़्ज़ा और बर्गर की लड़ाई

एक बार सुबह-सुबह पिज़्ज़ा, बर्गर में हुई लड़ाई पिज़्ज़ा बोला-- मुझको जो खाता है, वह मेरा गुण गाता है। बर्गर तुनककर बोला-- तुझसे ज्यादा मुझको खाते हैं, बच्चे मेरे नाम का माला जपते हैं। इतने में सारे बच्चे भी आ गये। मंटू, चंपू, सोना, मोना सब आ गये। सब बच्चे बोले-- बर्गर, पिज़्ज़ा भैया क्यों लडते हो? हम सब को दोनों टेस्टी लगते हो। बच्चों की सुनकर बात, पिज़्ज़ा, बर्गर हो गये शांत सारे बच्चे खाये पिज़्ज़ा, बर्गर, बड़ा मजा आया पूरी रातभर।

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