Bhupesh Pratap Singh भूपेश प्रताप सिंह
भूपेश प्रताप सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जनपद के पहलमापुर गाँव में 5 सितम्बर सन् 1977 को हुआ। इनके पिता शेर बहादुर सिंह कृषक थे और इनकी माता शान्ति देवी साहसी और धैर्यवान गृहणी थीं। सम्प्रति भूपेश प्रताप सिंह पाठ्यक्रम आधारित पुस्तकों का लेखन एवं सम्पादन करते हैं। विभिन्न समाचार पत्र ,पत्रिकाओं के लिए कविता ,कहानी ,आलेख ,निबंध आदि के लिए निरतंर लेखन करते हैं l इनके लिखे काव्य संग्रह 'हिमकिरीट' का प्रकाशन हो चुका है l अन्य कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन हैंl
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हिन्दी कविताएँ : Hindi Poetry
- बह रही आज जब मधुर वात
- आज नई ज्योति भरो
- पावनता के लिए बहो
- मैंने काँटों पर जिस दिन चलना सीखा
- जग जीवन में रस भर दो
- भारती के लाल
- कोई आज मुझे बतला दे
- डरावना सच
- जीवन पथ पर बढ़ना सीखो
- आज प्रभाकर जाग उठा
- कालकूट पीना होगा
- फूलों ने हँस कर समझाया
- धेय जब तक मिल न जाए
- जीवन-राग
- सोने का पहाड़
- भीग गई चूनरी
- भारतवर्ष हमारा है
- मानवता के लिए जियो
- हिन्द के जवान तुम बढ़े चलो
- मुझे न रोको बढ़ जाने दो
- जीवन के अनुराग
- भारत के गीत गाना
- आकाश सबका है
- बादल और बारिश
- वासन्ती उषा आई
- किताब के पन्ने
- रंग लिए होली आई है
बाल कविताएँ : भूपेश प्रताप सिंह
Baal Kavitayen : Bhupesh Pratap Singh
- मुस्काती कलियाँ कहती हैं
- ऐसी वर्षा फिर फिर आए
- अपने बल से बढ़ने वाला
- खुशबू खूब लुटाते फूल
- नदियाँ सबको समझाती हैं
- रंग- बिरंगे हैं गुब्बारे
- चलता ऊँट
- सूरज का गोला
- हँसने लगता बचपन
- मन में पछताया खरगोश
- मेरी पुस्तक
- मोटे नाना
- मेहनती चिड़िया
- अच्छे -अच्छे काम करें
- मेरे हाथों पर आ जाओ
- तितली
- सूरज आया
- चलो उपवन सजाएँ
- सीखो
- आसमान से गिरती ओस
- तितली रानी
- गर्मी आई गर्मी आई
- बेच रहा हूँ मैं गुब्बारे
- जब मुर्गे ने बाँग लगाई
- शहद का छत्ता
- बादल
- सूरज दादा
- अच्छे -अच्छे काम करें
- अभिलाषा
- सजीली धरती
- जब भी मुझको आती छींक
- मेरे प्यारे चंदा मामा
- मेढक जागे
- अब मैं जाऊँगा स्कूल
- उनसे हाथ मिलाना होगा
- बीती रात हुआ उजियारा
- अगर न होते
- सबको वर दो हे भगवान
- सूरज चन्दा सबको भाते
- बिना रुके जो बढ़ता रहता
- बादल काका जल्दी आओ
- मोटा गैंडा
- धूप किरण
- पहली वर्षा
- नन्दू का कैलेंडर
- किसे खरीदूँ ?
- सबके अपने-अपने काम
- चंदू का इनाम
- सूरज क्यों दादा कहलाते
- रंग लिए होली आई है