हिंदी कविताएँ : सुरेंद्र कल्याण 'बुटाना'
Hindi Poetry : Surender Kalyan Butana
1. समय की सीढ़ियाँ
समय सीढ़ियों की तरह होता है। हम चढ़ते जाते हैं, और सोचते हैं कि अभी बहुत रास्ता बाकी है। फिर एक दिन पीछे मुड़कर देखते हैं, तो पाते हैं कि बचपन नीचे छूट गया, युवावस्था भी धीरे-धीरे दूर हो गई। तब समझ आता है— समय को जीना चाहिए, सिर्फ़ बिताना नहीं।
2. पृथ्वी का गीत
पृथ्वी हर सुबह एक नया गीत गाती है। कभी फूलों में, कभी पक्षियों में, कभी खेतों की हरियाली में। पर मनुष्य इतना व्यस्त हो गया है कि उसे यह संगीत सुनाई नहीं देता। जिस दिन वह रुककर सुनेगा, उसे पता चलेगा कि प्रकृति ही जीवन की सबसे बड़ी कविता है।
3. माँ की रसोई में
माँ की रसोई में सिर्फ़ भोजन नहीं पकता। वहाँ चिंता भी पकती है, ममता भी, और परिवार के लिए अनगिनत प्रार्थनाएँ भी। रोटी के साथ वह अपना प्रेम परोसती है। इसीलिए माँ के हाथ का स्वाद किसी होटल में नहीं मिलता।
4. बारिश
बारिश आकाश का उपहार है। वह सूखी धरती को फिर से जीवित कर देती है। पत्तों को धोती है, नदियों को भरती है, और मनुष्य को याद दिलाती है कि जीवन में नई शुरुआत हमेशा संभव है।
5. करुणा का दीप
अँधेरे समय में सबसे अधिक आवश्यकता करुणा की होती है। एक सच्चा शब्द, एक सहारा, एक संवेदनशील व्यवहार— कई बार इतना ही पर्याप्त होता है किसी टूटते हुए मनुष्य को फिर से खड़ा करने के लिए।
6. किसान
किसान धरती पर विश्वास करता है। वह बीज बोता है, और प्रतीक्षा करता है। उसे मालूम है कि हर फल के पीछे धैर्य छिपा होता है। उसके हाथों में मिट्टी होती है, और उसी मिट्टी से सभ्यता का भविष्य जन्म लेता है।
7. पुस्तक
एक अच्छी पुस्तक मित्र की तरह होती है। वह बोलती कम है, सिखाती अधिक है। वह समय के पार ले जाती है, और मनुष्य को अपने भीतर झाँकना सिखाती है।
8. गाँव की सुबह
गाँव की सुबह धीरे-धीरे खुलती है। मुर्गे की आवाज़, पेड़ों पर पक्षियों का कलरव, और खेतों की ओर बढ़ते कदम। वहाँ दिन की शुरुआत प्रकृति के साथ होती है, घड़ी के साथ नहीं।
9. आशा
जब सब रास्ते बंद दिखाई दें, तब भी आशा का एक द्वार खुला रहता है। वही मनुष्य को गिरकर उठना सिखाता है। और वही बताता है कि कोई भी रात स्थायी नहीं होती।
10. मनुष्य की विरासत
मनुष्य अपने पीछे धन नहीं छोड़ता, वह स्मृतियाँ छोड़ता है। उसका व्यवहार, उसकी करुणा, उसके शब्द, और उसके कर्म— यही उसकी वास्तविक विरासत हैं। समय बीत जाता है, पर अच्छे मनुष्य अपनी अच्छाइयों में जीवित रहते हैं।
11. हिसाब
एक दिन समय ने मुझसे कहा— "चल, आज हिसाब करते हैं।" मैंने जेब टटोली, कुछ सिक्के निकले, कुछ नोट, कुछ अधूरे सपने। समय मुस्कराया। बोला— "मैंने धन का हिसाब नहीं माँगा। मैं यह जानना चाहता हूँ— तूने कितने मनुष्य बचाए, और कितनों को अपने अहंकार में खो दिया।" मैंने पहली बार जाना— जीवन का सबसे कठिन लेखा मृत्यु से पहले बनता है।
12. भूख
भूख केवल रोटी की नहीं होती। किसी को नाम की भूख है, किसी को कुर्सी की, किसी को दूसरों से बड़ा दिखने की। और इन्हीं भूखों के बीच एक आदमी सचमुच भूखा था। वह रोटी माँग रहा था। लोग उसे भाषण दे रहे थे।
13. विरासत
पिता ने घर छोड़ दिया। दादा ने ज़मीन छोड़ दी। माँ ने आशीर्वाद छोड़ दिया। पर हमने अपने बच्चों के लिए क्या छोड़ा? एक ऐसा समय, जहाँ विश्वास सबसे महँगी चीज़ हो गया।
14. दर्पण
आईना कभी झूठ नहीं बोलता। इसलिए लोग अब तस्वीरों पर ज़्यादा भरोसा करते हैं। तस्वीरें मनचाही बनाई जा सकती हैं। आईना अब भी सिर्फ़ सच दिखाता है। और सच आज भी सबसे कम पसंद किया जाने वाला चेहरा है।
15. मनुष्य
ईश्वर ने धरती बनाई। मनुष्य ने सीमाएँ बना दीं। प्रकृति ने नदियाँ बहाईं। मनुष्य ने उनमें नफ़रत घोल दी। समय ने सबको बराबर रखा। मनुष्य ने अपने लिए ऊँच-नीच गढ़ ली। फिर भी वह स्वयं को सृष्टि की सबसे बुद्धिमान रचना कहता रहा। और यहीं से उसकी सबसे बड़ी भूल शुरू हुई।
