Kisan Majdoor Sangharsh 2020
किसान मजदूर संघर्ष 2020

किसान मजदूर संघर्ष 2020 से सम्बंधित कविताएँ हम 'हलधर फिर हुंकार उठे' कृति में प्रकाशित कर रहे हैं । जो भी कवि महोदय हमें इस विषय पर अपनी रचनाएँ भेजना चाहें उनका सहृदय स्वागत है ।

हलधर फिर हुंकार उठे

Haldhar Phir Hunkar Uthe

  • हम लौट जाएँगे-नरेंद्र कुमार (जलंधर)
  • टीवी चैनलों पर-नरेंद्र कुमार (जलंधर)
  • पहली बार-गुरभजन गिल
  • कोरा जवाब-गुरभजन गिल
  • अब आगे की बात करो-गुरभजन गिल
  • संघर्षनामा-गुरभजन गिल
  • ये आग अब हो गयी बड़ी-भूपिन्दर सिंघ 'बशर'
  • सरहद पे नित मरते वीर-भूपिन्दर सिंघ 'बशर'
  • हमारे नुमाइंदे बन हमारी ही गर्दनों पर-भूपिन्दर सिंघ 'बशर'
  • जुल्म की हुई इन्तेहा-गुरप्रीत कौर
  • बड़ा विचलित है देश का चौकीदार-जोगिंदर आजाद
  • दिल जैसा तेरा नाम री दिल्ली-अरतिंदर संधू
  • मेरे गांव का किसान-सुभाष भास्कर (चंडीगढ़)
  • हल-मनोज छाबड़ा
  • किसान (1)-प्रियंका भारद्वाज
  • किसान (2)-प्रियंका भारद्वाज
  • मेरे पिता-प्रियंका भारद्वाज
  • शाही फ़कीर-मदन वीरा
  • ज़मीन से उठती आवाज़-बल्ली सिंह चीमा
  • लूट गेहूँ, बाजरे औ' धान की-प्रेम साहिल देहरादून
  • हलधर दोहे-डॉ. जसबीर चावला
  • भीष्म हलधर की निष्ठा-डॉ. जसबीर चावला
  • एक असभ्य सवाल-हूबनाथ
  • जलियांवाला बाग बना दो-डॉ. जसबीर चावला
  • खूनी रजाई, नेताजी!-डॉ. जसबीर चावला
  • हमारे पास खेत हैं-दीप इन्दर
  • यह एक कील मुबारक हो !-बोधिसत्व (मुंबई)
  • समर्पण-डॉ. जसबीर चावला
  • कोई को दुःख नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • मैं कौन हूं-नरेन्द्र कुमार
  • बौखला गया है चौकीदार-जोगिंदर आजाद
  • निर्मम हाकिम-जोगिंदर आजाद
  • हलधर मेल-डॉ. जसबीर चावला
  • उम्मीद की उपज-गोलेन्द्र पटेल
  • गाँव से शहर के गोदाम में गेहूँ?-गोलेन्द्र पटेल
  • ईर्ष्या की खेती-गोलेन्द्र पटेल
  • उर्वी की ऊर्जा-गोलेन्द्र पटेल
  • किसान है क्रोध-गोलेन्द्र पटेल
  • जवानी का जंग-गोलेन्द्र पटेल
  • बारिश के मौसम में ओस नहीं आँसू गिरता है-गोलेन्द्र पटेल
  • ऊख-गोलेन्द्र पटेल
  • जोंक-गोलेन्द्र पटेल
  • सावधान-गोलेन्द्र पटेल
  • किसान की गुलेल-गोलेन्द्र पटेल
  • हमारा अन्नदाता-दीपक शर्मा
  • होरियों ! सावधान हो जाओ-दीपक शर्मा
  • नई-पुरानी जमीन का रिकॉर्ड बतानेवाले-वसंत सकरगाए
  • दौड़ो, ट्रैक्टर दौड़ो !-वसंत सकरगाए
  • रोड़ा हटाने के बाद किसान जोत रहा है खेत-वसंत सकरगाए
  • दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर विष्णु नागर-वसंत सकरगाए
  • कल-परसों-वसंत सकरगाए
  • सिंघु बॉर्डर से लाइव-वसंत सकरगाए
  • जिस किसान की फसल-कवि स्वप्निल श्रीवास्तव
  • मेरे पिता किसान थे-कवि स्वप्निल श्रीवास्तव
  • किसान-श्रीप्रकाश शुक्ल
  • हम अन्नदाता कहेंगे तुम्हें-प्रोफेसर चंद्रेश्वर
  • किसान-रेनू
  • किसान-प्रोफेसर शशिकला त्रिपाठी
  • सरकारी बसंत-सीमांकन यादव
  • मिट्टी का स्वाद-सुरेन्द्र प्रजापति
  • क्या तुम सही कर रहे हो?-अरविन्द कालमा
  • हलधर-परचम-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधरों का अमृत-महोत्सव-डॉ. जसबीर चावला
  • आकर राजधानी के तट पर-डॉ. जसबीर चावला
  • तू खेती आंसुओं की कर--राम नारायण मीणा 'हलधर'
  • अश्रुज्वाला-डा-एनुगु नरसिंहा रेड्डी
  • यह भारत किस राह पर चल पड़ा है-डॉ. जसबीर चावला
  • किसान की चाह-डॉ. जसबीर चावला
  • अपने अपने दुःख हैं अपने ही सहने हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • हर चौराहा काला कानून वापस चाहता है-डॉ. जसबीर चावला
  • राजधानी की सरहदों पर कैद हुए हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • आज एक लंबी सैर का इरादा लेकर निकला हूं-डॉ. जसबीर चावला
  • काला धन जो बाहर पड़ा है-डॉ. जसबीर चावला
  • किसानों के समर्थन में-डॉ. जसबीर चावला
  • जितना धूप में है उतना उजाला-डॉ. जसबीर चावला
  • दुई कर हलधर जोरि के-डॉ. जसबीर चावला
  • देते रहे जो दे रहे देते भी रहेंगे-डॉ. जसबीर चावला
  • जहाँ सवाल पूछने के भी पैसे लगते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • संसद का बोझ किसानों के सर-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधरों ने व्हिप जारी किया-डॉ. जसबीर चावला
  • यह दर्द क्यूं किस बात का है-डॉ. जसबीर चावला
  • आकाश बांट दिया खांचों में-डॉ. जसबीर चावला
  • हम अपने घरों को जलता हुआ पाते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • इंदिरा इज़ इंडिया कहने वाले भी थे इस देश में-डॉ. जसबीर चावला
  • आज़ादी के महोत्सव में हलधर ने-डॉ. जसबीर चावला
  • अपने प्यारे देश वासियों को-डॉ. जसबीर चावला
  • बड़ी मुश्किल से सहर आई है-डॉ. जसबीर चावला
  • कच्चा भी खोलेंगे पक्का भी खोलेंगे-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर स्तुति-डॉ. जसबीर चावला
  • पूंजी की लाठी मेहनत के सर-डॉ. जसबीर चावला
  • हे हलधर, हमारी उलझन समझो-डॉ. जसबीर चावला
  • एक गुजराती ने एक कर दिया था-डॉ. जसबीर चावला
  • घोर गलत हुआ है-डॉ. जसबीर चावला
  • सांसद और विधायक क्या कर रहे हैं?-डॉ. जसबीर चावला
  • थैली वही एक है-डॉ. जसबीर चावला
  • वे सिर्फ कहते थे-डॉ. जसबीर चावला
  • महज पत्थर नहीं हलधर ने उछाला यारो-डॉ. जसबीर चावला
  • रौशनी इस तरह छिन जायेगी-डॉ. जसबीर चावला
  • फूट डालो राज करो-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर को डर है-डॉ. जसबीर चावला
  • विजय दिवस मनाना जब-डॉ. जसबीर चावला
  • वे साम-दाम-दंड-भेद कूटनीति-डॉ. जसबीर चावला
  • ये पेड़ क्यों चिल्लाने लगे हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • अब जो भी मंज़र नज़र आयेंगे हलधर वेख लेंगे-डॉ. जसबीर चावला
  • रात लंबी थी मील के पत्थर जैसी-डॉ. जसबीर चावला
  • दुनिया का सबसे ऊँचा स्टैचू-डॉ. जसबीर चावला
  • वो कल जो था आज कहां है-डॉ. जसबीर चावला
  • मुँह पे तारीफ पीठ पीछे जड़ ही काटेंगे-डॉ. जसबीर चावला
  • तेरी गठरी में लागा चोर-डॉ. जसबीर चावला
  • सर्व-विक्रय-साधना-तंत्र में-डॉ. जसबीर चावला
  • इतना ही गर है प्यार अहंकार क्यों है-डॉ. जसबीर चावला
  • धन्यवाद-डॉ. जसबीर चावला
  • आज़ादी के अमृत महोत्सव पर-डॉ. जसबीर चावला
  • कब बोलना कब चुप रहना-डॉ. जसबीर चावला
  • भेड़िए की नीयत खराब हो-डॉ. जसबीर चावला
  • नफरत भरी हुई प्यार से फैली-डॉ. जसबीर चावला
  • बीती विभावरी जाग री!-डॉ. जसबीर चावला
  • गांधी बिरहमन था कि हिंदू था-डॉ. जसबीर चावला
  • किसान मजदूर का संयुक्त समाज है-डॉ. जसबीर चावला
  • सियासत के खेतों में पूंजी की पराली है-डॉ. जसबीर चावला
  • ऐम ऐस पी थी ऐमेसपी है एमसपी रहेगी-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर सिंहासन नहीं दिलों पर विराजता है-डॉ. जसबीर चावला
  • बड़ी संजीदगी से मन की बातें करने आये थे-डॉ. जसबीर चावला
  • चश्मा नहीं फिर से, आंखों को अपनी खोज-डॉ. जसबीर चावला
  • सारे सपने उड़ा दे ऐसी थकान हो-डॉ. जसबीर चावला
  • दल बदलते जैसे कबूतर मुंडेरे-डॉ. जसबीर चावला
  • लड़ने का सिर्फ नाटक करना-डॉ. जसबीर चावला
  • काले कानूनों के दौर से अभी उबरे नहीं हो-डॉ. जसबीर चावला
  • सत्ता का खेल इस सफाई से खेला गया-डॉ. जसबीर चावला
  • हर जगह पूंजी का बोल बाला है-डॉ. जसबीर चावला
  • धुंध जिधर से मर्जी देख लो धुंध है-डॉ. जसबीर चावला
  • समाज के सारे दलित वंचित ,हलधर के साथ हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • आठ सौ शहीदों के लिए-डॉ. जसबीर चावला
  • कोई जोर जबरदस्ती नहीं कर सकता-डॉ. जसबीर चावला
  • वादे नेता करता है-डॉ. जसबीर चावला
  • बात सामाजिक समता की होगी-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर बुद्धू, तुमसे धोखा हुआ है-डॉ. जसबीर चावला
  • महज़ लफ़्ज़ नहीं लिखकर मिटा दिया-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर, चुनाव इस बार बहुत आसान है-डॉ. जसबीर चावला
  • डबल इंजन वाली सरकार-डॉ. जसबीर चावला
  • सरकारें हिल गईं-डॉ. जसबीर चावला
  • मर्यादा घातक हो जाती है जब-डॉ. जसबीर चावला
  • ऊपर आओ ठंढे जल!-डॉ. जसबीर चावला
  • हा दा नारा देकर सियासत कर लेते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • पहले शोर की धुंध थी,अब चुप्पी की धुंध है-डॉ. जसबीर चावला
  • बाईस जीरो बाईस जीरो बाईस-डॉ. जसबीर चावला
  • फूल, तुम उगे हो, अच्छी बात है-डॉ. जसबीर चावला
  • चल रहे हैं बशर नाक मुँह खोलकर-डॉ. जसबीर चावला
  • टुकड़े टुकड़े होकर-डॉ. जसबीर चावला
  • कोटि कोटि कंठों के कर्कश-डॉ. जसबीर चावला
  • जनतंत्र टैंकी पर टकटकी लगाये है-डॉ. जसबीर चावला
  • तेल नहीं है कि जब मर्जी दाम बढ़ा दो-डॉ. जसबीर चावला
  • हे भगवन्, हे भगवन्, हे भगवन्-डॉ. जसबीर चावला
  • जो युद्ध के व्यापारी हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • थारी तारीफ होन लागे,कान खड़े कर लो-डॉ. जसबीर चावला
  • कितनी मेहनत से पहले इतनी ऊँची-ऊँची-डॉ. जसबीर चावला
  • मन की बात कम, कम्म दी जादा करना-डॉ. जसबीर चावला
  • जनता को टोपी पहनाते-डॉ. जसबीर चावला
  • जो माफिया खत्म करना चाहते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • नफरत में हिंसा का बीज दबा होता है-डॉ. जसबीर चावला
  • धोखों का शिकार हलधर हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • कल चलीं, आज और तेज़ चल रही हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • वक्त आने पर बतला ही देंगे मेरे दोस्त-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम क्या होली मनाओगे हलधर-डॉ. जसबीर चावला
  • चारों किसान नेता राज्य सभा में जायें-डॉ. जसबीर चावला
  • इंसान में दोनों हैं, राम और रहीम-डॉ. जसबीर चावला
  • भगत सिंह सुखदेव राजगुरु क्रांतिकारी थे-डॉ. जसबीर चावला
  • दुर्योधन को कितना मोह था सिंहासन से-डॉ. जसबीर चावला
  • हल्का-हल्का बुखार रहता है-डॉ. जसबीर चावला
  • दरख्त से बूँदें चूकर-डॉ. जसबीर चावला
  • फिर से बहस शुरू करने के पहले-डॉ. जसबीर चावला
  • पानी की आदतों को पहचानो हलधर-डॉ. जसबीर चावला
  • बाहर आओ, देखो हलधर-डॉ. जसबीर चावला
  • जो है अदालत है-डॉ. जसबीर चावला
  • देश ने राज्य पर चढ़ाई कर दी-डॉ. जसबीर चावला
  • डालनी थी खाद, डाल दी फूट-डॉ. जसबीर चावला
  • मन में कपट, कपट में मन है-डॉ. जसबीर चावला
  • प्रधान मंत्री से होता है कौन ऊपर-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम्हें यह इल्म नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • सैर को बदलो सवार को बदलो-डॉ. जसबीर चावला
  • सुनी सुनाई बात पर-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम्हारे गुरु उनके आदर्श हैं हलधर!-डॉ. जसबीर चावला
  • हर कोई सच बोलने से कतराता है-डॉ. जसबीर चावला
  • हो सके तो हलधर के खेत पर मुँह धोओ-डॉ. जसबीर चावला
  • एक दाना भी होगा तुम्हारे शरीर पर-डॉ. जसबीर चावला
  • खेती व्यापार होती तो-डॉ. जसबीर चावला
  • अपनी आँखों के लिए खुद जिम्मेवार हो-डॉ. जसबीर चावला
  • रात की किस्मत में-डॉ. जसबीर चावला
  • यह सियासत है पैंतरे बदल के देख-डॉ. जसबीर चावला
  • गदर ज्ञान-डॉ. जसबीर चावला
  • सबको अपनी सियासत की पड़ी है-डॉ. जसबीर चावला
  • देखना न, पारा आकाश छुएगा-डॉ. जसबीर चावला
  • कणक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय-डॉ. जसबीर चावला
  • सच से सच का सामना, पहला सच है कौन-डॉ. जसबीर चावला
  • आज़ादी के पहले से भी-डॉ. जसबीर चावला
  • अनेक खेत अनेक फसलें हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर, तुम्हें अपनी संसद को खुद ही चलाना है-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर पृथ्वीराज-डॉ. जसबीर चावला
  • नबी की शान में ऊलजलूल मत बोलो-डॉ. जसबीर चावला
  • दो आरजू में कटे, दो इंतज़ार में कट जायेंगे-डॉ. जसबीर चावला
  • ईस्ट इंडिया कंपनी नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • आप ये कैसी योजनायें बनवाते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम्हारा मत कितने में खरीदता-डॉ. जसबीर चावला
  • मंत्री और अफसर लूटते रहे-डॉ. जसबीर चावला
  • तीन तलाक बोलके-डॉ. जसबीर चावला
  • आरती----मकड़ी के जाले-डॉ. जसबीर चावला
  • अंधेरे में अपना रस्ता कैसे ढूँढ़ लेते हैं-डॉ. जसबीर चावला
  • किसी गोदी बैठना आसान नहीं होता-डॉ. जसबीर चावला
  • अग्निवीरों के आगे छप्पन ईंची छातियाँ-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर का कोई पार्थिव शरीर नहीं होता-डॉ. जसबीर चावला
  • सवाल यह नहीं है कि फुँकने वाली लाशों का-डॉ. जसबीर चावला
  • दर्द अभी हद से नहीं गुजरा है-डॉ. जसबीर चावला
  • जल्दी में गलती से किसी के मुँह से-डॉ. जसबीर चावला
  • एक-एक रग दुख रही-डॉ. जसबीर चावला
  • जो अपने वतन की दौलत-डॉ. जसबीर चावला
  • निठ के ना बैठ हलधर-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम धरना -जीवी नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • बिना ऑक्सीजन तड़पे कोरोना कवलित-डॉ. जसबीर चावला
  • मँहगाई यहाँ की नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • जिनके हजारों करोड़ कर्जे राईट ऑफ हुए-डॉ. जसबीर चावला
  • तिरंगे, तुझे पता है-डॉ. जसबीर चावला
  • युद्ध हूँ-डॉ. जसबीर चावला
  • इससे पहले भी कहीं कुछ था-डॉ. जसबीर चावला
  • पहाड़ों को जिस रफ्तार से छेदा गया है-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर इस हुँकार को फुँकार में बदलो-डॉ. जसबीर चावला
  • तुम्हीं नहीं हर वोटर ठगा गया है-डॉ. जसबीर चावला
  • यहाँ इंसानों की तो सुनता नहीं-डॉ. जसबीर चावला
  • हलधर तेरी सोच पे कौन देगा ठोक के पहरा-डॉ. जसबीर चावला
  • फसलों पे आँख है, पानी की लूट है-डॉ. जसबीर चावला
  • सत्य उजागर मत कर, झूठ के लंबे हाथ-डॉ. जसबीर चावला
  • ऐ हलधर है मुश्किल जीना यहाँ-डॉ. जसबीर चावला