Waris Shah
वारिस शाह
वारिस शाह (१७२२ -१७९८) का जन्म सय्यद गुलशेर शाह के घर लाहौर से करीब ५०
किलोमीटर दूर शेखूपुरा जिले के गाँव जंडिआला शेर ख़ान में हुआ। बचपन में
वारिस शाह को गाँव की ही मस्जिद में पढ़ने के लिए भेजा गया। उस के बाद
उन्होंने दर्शन-ए-नजामी की शिक्षा कसूर में मौलवी ग़ुलाम मुर्तजा कसूरी के पास से
हासिल की। वहाँ से फ़ारसी और अरबी में शिक्षा प्राप्त करके वह पाकपटन चले गए।
पाकपटन में बाबा फ़रीद की गद्दी पर मौजूद बुज़ुर्गों के पास से उन को
आत्मिक ज्ञान की प्राप्ति हुई, जिस के बाद वह रानी हांस की मस्जिद में इमाम रहे
और धार्मिक शिक्षा का प्रसार करते रहे। उनका नाम पंजाबी के सिरमौर
कवियों में आता है। वह मुख्य तौर पर अपने किस्से हीर-रांझा के लिए मशहूर हैं।