Shri Krishna Saral / श्रीकृष्ण सरल
श्रीकृष्ण सरल (01 जनवरी 1919 – 02 सितम्बर 2000 ई०) प्रख्यात भारतीय कवि थे। इनका जन्म मध्य प्रदेश के अशोक नगर में हुआ। इनके पिता का नाम श्री भगवती प्रसाद तथा माता का नाम यमुना देवी था। सरल जी शासकीय शिक्षा महाविद्यालय, उज्जैन में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत रहे।
सरल जी ने अपना सम्पूर्ण लेखन भारतीय क्रांतिकारियों पर ही केंद्रित किया है। क्रांतिकारियों के जीवन और बलिदान पर उन्होंने अनेक पुस्तकें लिखीं, जिनमें पन्द्रह महाकाव्य शामिल हैं। साहित्य अकादमी मध्य प्रदेश द्वारा श्रीकृष्ण सरल के सम्मान में कविता के लिए प्रति वर्ष "श्रीकृष्ण सरल पुरस्कार" प्रदान किया जाता है।
- हिन्दी कविताएँ : श्रीकृष्ण सरल
- चन्द्र शेखर आजाद (महाकाव्य) : श्रीकृष्ण सरल
- भगत सिंह (महाकाव्य) : श्रीकृष्ण सरल
श्रीकृष्ण सरल की कविताएँ
- भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान
- धरा की माटी बहुत महान
- जियो या मरो, वीर की तरह
- देश के सपने फूलें फलें
- शहीद
- देश से प्यार
- सैनिक
- प्रकृति कुछ पाठ पढ़ाती है
- प्रेम की पावन धारा है
- मत ठहरो
- आँसू
- छोड़ो लीक पुरानी
- जवानी खुद अपनी पहचान
- नेतृत्व
- पीड़ा का आनन्द
- मुझमें ज्योति और जीवन है
- कहो नहीं करके दिखलाओ
- माँ
- काँटे अनियारे लिखता हूँ
- मैं अमर शहीदों का चारण
