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सामधेनी रामधारी सिंह 'दिनकर'

Saamdheni Ramdhari Singh Dinkar

  • अचेतन मृत्ति, अचेतन शिला
  • तिमिर में स्वर के बाले दीप, आज फिर आता है कोई
  • ओ अशेष! निःशेष बीन का एक तार था मैं ही
  • वह प्रदीप जो दीख रहा है झिलमिल, दूर नहीं है
  • बटोही, धीरे-धीरे गा
  • रात यों कहने लगा मुझसे गगन का चाँद
  • जा रही देवता से मिलने?
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