Prabhudayal Shrivastava | प्रभुदयाल श्रीवास्तव
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प्रभुदयाल श्रीवास्तव (4 अगस्त 1944 - ) का जन्म धरमपुरा दमोह, मध्य प्रदेश में हुआ। आप कहानी, कविता, बाल-साहित्य, व्यंग्य, लघु कथाएँ, लेख, बुंदेली लोकगीत, बुंदेली लघु कथाएँ, बुंदेली गज़लें विधाओं में साहित्य-सृजन करते हैं। आपको 'भारती रत्न', 'भारती भूषण सम्मान', 'श्रीमती सरस्वती सिंह स्मृति सम्मान', 'लाइफ अचीवमेंट अवार्ड', 'हिंदी सेवी सम्मान', 'व्यंग्य वैभव सम्मान' मिले हैं। आपकी प्रमुख साहित्य कृतियाँ हैं: व्यंग्य संग्रह: दूसरी लाइन; बाल गीत संग्रह: बचपन गीत सुनाता चल, बचपन छलके छल छल इत्यादि।
प्रभुदयाल श्रीवास्तव की कविताएँ
- हिन्दी भाषा का रुतवा
- छुक छुक रेल
- अंधकार की नहीं चलेगी
- अब मत चला कुल्हाड़ी
- अगर पेड़ में रुपये फलते
- अब दिन शाला चलने के
- अम्मा को अब भी है याद
- अम्मू ने फिर छक्का मारा
- अम्मू भाई
- आई कुल्फी
- आदत ज़रा सुधारो ना
- आधी रात बीत गई
- आम की चटनी
- आसमान में छेद कराते दादाजी
- इतिहासों में लिख जाती है
- इसी देश में
- ईश्वर ने जो हमें दिया है
- एक-एक पल है उपयोगी
- एक ज़रा सा बच्चा
- औंदू बोला
- कम्प्यूटर पर चिड़िया
- करतब सूरज-चंदा के
- कल आना है फिर संडे
- कल के प्रश्न
- कलयुग के मुर्गे
- कहां जांयें हम
- कड़क ठंड है
- कड़े परिश्रम का फल मीठा
- कंधे पर नदी
- कितने अच्छे अम्मा बाबू
- कितने पेन गुमाते भैया
- कुशल वैद्य होते हैं बच्चे
- कौवा और कोयल
- कौवा का स्कूल
- क्या होता है रमतूला
- खुला पुस्तकालय जंगल में
- खेल भावना
- गधे से सस्ता
- गप्पी
- गरम जलेबी
- गरमी मई की जून की
- गाय सलोनी
- ग़लती नहीं करूँगी
- घर का मतलब
- चलना है अबकी बेर तुम्हें
- चल री मुनिया
- चिंगारी
- चींटी की शादी
- चींटी बोली
- चुहिया और संपादक
- चुहिया रानी
- चूहा भाई
- चूहे की सज़ा
- चूहों की चतुराई
- छुट्टी का आवेदन
- छोटे लोग
- जब दुर्गावती रण में निकलीं
- जंगल की बात
- जानवरों के उसूल
- जूता चोर चूहा
- जूनियर गधा
- जो चलता अपने पैरों पर
- झब्बू का नया साल
- झूठे मक्कारों को दंड
- ट्रेफिक सिगनल
- डेडू
- तिलचट्टे का चिट्ठा
- तुमको सजा मिलेगी
- तुलसी चौरा मुस्कराता
- थाने का कारकून
- थाने में शेरू भाई
- दहेज
- दादाजी का डंडा
- दादी का जन्म दिवस
- दादी को समझाओ जरा
- दादीजी के बोल
- दादी ने जब खो खो खेली
- दादी बोली
- दाल बाटियों के दिन
- दिन और रात
- दीपक बनकर
- दूध गरम
- धन्य धरा बुंदेली
- नदी ताल भर जाने दो
- नया साल
- नर्मदा में नौका विहार
- नहीं बूंद भर पानी
- नाना आये
- नुस्खे सीखो दादी से
- पता नहीं क्यों
- प्रकृति की मौलिकता
- पर्यावरण बचाओ
- प्रजातंत्र का राजा
- पतंगें
- पानी नहीं नहानी में
- बचपन का चेहरा
- बच्चे सरकार चलायेंगे
- बर्फी की शादी
- बादल जी
- बादल भैया ता-ता थैया
- बाबू गधाराम
- बाबूजी का दिवाला
- बिना परीक्षा
- बिल्ली की दुआएँ
- बुखार की दवा
- बेईमानी का फल
- बेटे की सीख
- बेसन की मिठाई
- भालू का रसगुल्ला
- भालू की दावत
- भालू की हजामत
- भूल गये मोबाईल
- भैयाजी को अच्छी लगती
- मछली है रंगीन
- मत करना मनमानी
- मन को भा जानेवाले दिन
- महिने में पंद्रह इतवार
- माल खाऒ
- मुट्ठी में है लाल गुलाल
- मुन्ना बोला
- मुन्नी बोली ही ही ही ही
- मेरी नींद नहीं खुल पाती
- मेंढक मामा
- मोबाईल का आर्डर
- योगाभ्यास
- रस भरे आम
- राखी का त्यौहार
- राम कटोरे
- रोटी का सम्मान
- लौटे घर को गंगाराम
- वन्स मोर
- वही सफलता पाता है
- व्यर्थ हँसी न उड़वायें
- श्रम करने पर रुपये मिलते
- सच बतलाना
- सच्चा मित्र
- सच्चे घर
- सब ओलंपिक जीत लिये हैं
- सभी पेश आते इज़्ज़त से
- सॉरी मत बोलो दादाजी
- सूरज ऊंगत से उठबो
- सूरज चाचा
- सूरज भैया
- सूर्य ग्रहण
- सोच रहा हूँ
- हथिनी दीदी
- हमारी माँ अगर होती
- हमें उजाला करना है
- हाथी और चूहा
- हाथी दादा पूजे जाते
- हाथी बड़ा भुखेला
- हाथी भैया कहां चले
- हाथी मामा
- हिसाब किताब
- हुए साक्षर चूहेराम
- होगी पेपर लेस पढ़ाई
- होती व्यर्थ कपोल कल्पना
- जयंती या पुण्य तिथि
- पत्र
- बदला
