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राजस्थानी लोक गीत
Rajasthani Lok Geet
अंजन की सीटी में
इण्डूणी
इण लहेरिये रा नौ सौ रुपया रोकड़ा सा
इतळ पीतळ
उड़ उड़ रे म्हारा काळा रे कागला
एक बार आओजी जवाईजी पावणा
ऐली पैली सखरिया री पाल
ओजी म्हारी सहेल्यां जोवे बाटो
ओ म्हारी घूमर छे नखराळी ऐ माँ
कुरजां लोक गीत
खेजड़लो
गाढ़ो जोती न रणु बाई आया
गोर गोर गोमती-गणगौर गीत
गोरबन्द-ओ म्हारो गोरबन्द नखराळो
घाम पड़े, धरती तपै रे
घुमेरदार लंजो
घूमर
चरखो तो ले ल्यूँ, भँवरजी, रांगलो जी
चढ़ लाडा, चढ़ रे ऊँचे रो
चम चम चमके चुन्दडी बिण्जारा रे
चाँद चड्यो गिगनार
चिर्मी
चौमासो
छपनिया काल रे छपनिया काल
जय जय राजस्थान
जीरो
झालो अलगियों तो ऐयूं जालो मांए
ढोलर बाज्यो रे, बाज्यो रे
ढोला ढोल मंजीरा बाजे रे
तालरिया मगरिया रे मोरू बाई लारे रया
तारा री चुंदरी
तूँ क्यों रान्याँ का भैय्या
दिन उग्यो कूकड़ी बोले रे
नैना रा लोभी
पल्लो लटके
पिळो रंगावो जी
पींपळी
पोदिनो
बनी ! थूंई मत जाणे बना सा ऐकला रै
बाजूबंद री लूम
बन्ना रे बागां में झुला घाल्या
भँवर म्हाने खेलण दयो गणगौर
माथा न मेंमद लाओ
मोरया आछो बोल्यो रे
म्हें तो सगलाई देवता भेट्यां रे भंवरा
म्हें थांने पूछां म्हारी धीयड़ी
म्हारों बालूड़ों ग्यो तो सासरे
म्हारी ऐ मंगेतर
म्हारे से डरपत नहीं चूहा
म्हाने चूंदड़ी मंगादे रे
म्हारे आलीजा री चंग
म्हारा दादाजी के जी मांडी गणगौर
मोरू भाई पांवणा
म्हारी गुदली हथेली मं छालो पड़ गयो
राजी राजी बोल बनी तो चुड़लो पेरादूं
रुमाल
रिमझिम-रिमझिम मेहा बरसे
रणुबाई रणुबाई रथ सिनगारियो तो
रखडी ऊपर रखडी जाण
लहेरियो
शहर बाजार में जाइजो हो बना जी हो राज
सात सहेल्यां रे झूलरे
साल्यो पतली कासूँ पड़गी पीवर बस के
सूती थी रंग महल में
सोनी गढ़ को खड़को
हमको गुलाबी दुपट्टा
हाँजी म्हारे आँगन कुओ
हरियो रूमाळ