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खड़ी बोली लोक गीत
Khari Boli Lok Geet
बारह बरस में री जोगी आयो रे
जच्चा मेरी भोली
होलर का बाबा
एक रंगमहल की खूँट
काला पति-काले री बालम
आर्यों का प्रण (हँसी गीत)
कम उम्र का अधपढ़ा पति-पति पढ़ण चले
मेरे सिर पै बंटा टोकणी
बहू की शर्त व ताकत-कोठे ऊप्पर कोठड़ी
पचरंगी चीरा बाँध बीरण
ठाकै बण्टा टोकणी (पनघट-गीत)
सासू पनियाँ कैसे जाऊँ (पनघट-गीत)
बेल्ला ले रही दूध का
नटवर नै भेस
बारह बरस पीछै (विरह-गीत)
अरे बरसन लागे बुंदिया चला भागा पिया
कोऊ दिन उठ गयो मेरा हाथ
माई री मैं टोना करिहों
विवाह-गीत
अन्दर से लाड्डो बाहर निकलो
लड़की की इच्छाएँ-लाडो मँगणा हो
भात का गीत-मेरठ जिले के मेरे भातड़िए
बिदाई गीत-हेरी मेरा लम्बा सहेलियों का साथ
पिताजी काहे को (बिदाई गीत)
मत करो मन को उदास (बिदाई गीत)
काँकर उप्पर काँकरी (भात का गीत)
लाड्डो पूछै बाबा से (बारात आगमन)
अजी बाबा जी (फ़ेरों का गीत)
सावन-गीत
बीरा जो आते मैं सुणै
आम्बो तलै क्यूँ खड़ी
नन्हीं-नन्हीं बुँदियाँ
गलियों तो गलियों री बीबी
कजली लोकगीत
देखो सावन में हिंडोला झूलैं
छैला छाय रहे मधुबन में
आई सावन की बहार
हरि संग डारि-डारि गलबहियाँ
हरि बिन जियरा मोरा तरसे
झूला झूलन हम लागी हो रामा
अजहू न आयल तोहार छोटी ननदी
तरसत जियरा हमार नैहर में