खड़ी बोली लोक गीत (Khari Boli Lok Geet)
- बारह बरस में री जोगी आयो रे
- जच्चा मेरी भोली
- होलर का बाबा
- एक रंगमहल की खूँट
- काला पति-काले री बालम
- आर्यों का प्रण (हँसी गीत)
- कम उम्र का अधपढ़ा पति-पति पढ़ण चले
- मेरे सिर पै बंटा टोकणी
- बहू की शर्त व ताकत-कोठे ऊप्पर कोठड़ी
- पचरंगी चीरा बाँध बीरण
- ठाकै बण्टा टोकणी (पनघट-गीत)
- सासू पनियाँ कैसे जाऊँ (पनघट-गीत)
- बेल्ला ले रही दूध का
- नटवर नै भेस
- बारह बरस पीछै (विरह-गीत)
- अरे बरसन लागे बुंदिया चला भागा पिया
- कोऊ दिन उठ गयो मेरा हाथ
- माई री मैं टोना करिहों
