Deepak Singh Deepak दीपक सिंह दीपक
दीपक सिंह दीपक (1 जुलाई 1990-) ग्राम व पोस्ट- अरवत जिला-फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं । इनके
पिता श्री मारर्कण्डेय सिंह और माता श्रीमती सुनीता सिंह हैं ।
इनकी शिक्षा, स्नातक (राजनीति शास्त्र, हिंदी) है।
आप इस समय कवि सम्मेलन लेखन व टेलीफिल्म पट कथा में सक्रिय हैं ।
मोबाइल नंबर : 9792797472
दीपक सिंह दीपक की रचनाएँ
दीपक सिंह दीपक की कविताएँ
- जिसका जैसा धर्म, उसे मिले उसी का सहारा
- हे रघुनंदन हे जगवंदन
- सारंग से निकला वाण, दिगविजयी
- मैंने देखा है
- कहाँ से लाते हो अल्फाज
- जब सुर्दसन चले तो, कौरव का संघार करे
- सिर पर बोझ लिए चलती वो
- नगर के सिग्नल पर घूमे हाथ फैलाए
- पुस्तक के पृष्ठों पर जब तेरी
- इस देश की रंगत कहाँ गयी
- हर दिन उठ कर लगता है
- समय से बड़ा कोई भगवान नहीं
- तेरी आंखों में जब जब देखा
- जमाने में सब कैसे आए हैं
- कड़ी धूप माथे पर पसीना
- मेरे अंतर्मन से उतर गयी तुम
- कलम जो लिखती शब्दों को
- एक दिन देखा जब उनको
- मै एक पथिक चलते-चलते
- कल्पना की कलम चला कर
- एक छोटी सी किरण
- ऐ आजादी के जश्न में
- कुछ बात नहीं होगी
- यहां लोग है कितने दूषित
- ऐ सियासत
- अल्फाजों के समुंदर से
- भक्त सिंह
- तेरे सजदे में सिर झुका नमन है
- होली-ऐ फागुन आ रही हो आना
- किसान-धरा से चला गया वो राख बनकर
- प्रेम-मुझ पर वो हंसती रही
- जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा
- प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में
- मर्यादा पुरुषोत्तम का, यह धाम हो गया
- मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम
- झांसी चण्डी हो तुम बाला
- अवध की होली
- ओंठो पे बात जो दबी रह गई है
- नंगे अपने नंगेपन को
- जिंदगी की पटरी पर
- राम का घर है बनता
- ग़म के सागर में बैठकर हंसी न दो
- जब दुश्मन सरहद पर आये खून खौलने लगता है
- भजन-मेरे राम मुझको तुमसे काम बहुत है
- गीत-तेरे जाने का ग़म सहूं तो कैसे सहूं
- गीत-मुझमें तुम समा ग
- गीत-तेरे इश्क में डूब कर
- हम प्रधान से बोले
- प्रेम संग्रह
- राधेय ही रहने देते
- मानवता खड़ी है कफ़न ओढ़े
- छन छन चलती थी तलवारें
- गीत-वो जो बादल बरसे तो सह भी लूं
- गीत-मिट्टी भी रोती है जो तिलक लगाया
- एक दिन धरती पर हो गया
- ग़ज़ल-प्रेम की अगन में जलता है कोई
- अग्निवीर बनकर
- राम जी की अयोध्या
- गीत-मां जो तेरा नाम ले
- गीत-दीनो को दे, दें सहारा शक्ति
- इश्क पूरा न होता है किसी का
- ग़ज़ल-इश्क़ मोहब्बत के अंजाम पर है
- ग़ज़ल-कुछ ऐसा लिखूं अमर हो जाऊं
- गीत-पैसा हाथ का यूं मैल नहीं है
- गीत-शहरों की हवा अब गांव में है आई
- ग़ज़ल-दौर आ गया है इतना भयानक
- जब बुद्धि जड़ हो जाती है
- ग़ज़ल-कोई धोका देकर लौटे यदि
- गीत-राम मेरी आस्था विश्वास है
- मुक्तक
- भजन-हम भी अयोध्या में रम गये है
- गीत-प्रधानी
- प्रधान गुरू और वोटर चेला
- नेता और युवा नेता