Deepak Singh
दीपक सिंह

दीपक सिंह (1 जुलाई 1990-) ग्राम व पोस्ट- अरवत जिला-फैजाबाद (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं । उनके पिता श्री मारर्कण्डेय सिंह और माता श्रीमती सुनीता सिंह हैं । उनकी शिक्षा, स्नातक (राजनीति शास्त्र, हिंदी) है। आप इस समय कवि सम्मेलन लेखन व टेलीफिल्म पट कथा में सक्रिय हैं ।

दीपक सिंह की रचनाएँ

दीपक सिंह की कविताएँ

  • जिसका जैसा धर्म, उसे मिले उसी का सहारा
  • हे रघुनंदन हे जगवंदन
  • सारंग से निकला वाण, दिगविजयी
  • मैंने देखा है
  • कहाँ से लाते हो अल्फाज
  • जब सुर्दसन चले तो, कौरव का संघार करे
  • सिर पर बोझ लिए चलती वो
  • नगर के सिग्नल पर घूमे हाथ फैलाए
  • पुस्तक के पृष्ठों पर जब तेरी
  • इस देश की रंगत कहाँ गयी
  • हर दिन उठ कर लगता है
  • समय से बड़ा कोई भगवान नहीं
  • तेरी आंखों में जब जब देखा
  • जमाने में सब कैसे आए हैं
  • कड़ी धूप माथे पर पसीना
  • मेरे अंतर्मन से उतर गयी तुम
  • कलम जो लिखती शब्दों को
  • एक दिन देखा जब उनको
  • मै एक पथिक चलते-चलते
  • कल्पना की कलम चला कर
  • एक छोटी सी किरण
  • ऐ आजादी के जश्न में
  • कुछ बात नहीं होगी
  • यहां लोग है कितने दूषित
  • ऐ सियासत
  • अल्फाजों के समुंदर से
  • भक्त सिंह
  • तेरे सजदे में सिर झुका नमन है
  • होली-ऐ फागुन आ रही हो आना
  • किसान-धरा से चला गया वो राख बनकर
  • प्रेम-मुझ पर वो हंसती रही
  • जिसदिन मुझसे मिलोगे राम सारा दर्द सुना दूंगा
  • प्रभु सबको फंसना यहां तुम्हरे बुने जाल में
  • मर्यादा पुरुषोत्तम का, यह धाम हो गया
  • मर्यादा पुरुषोत्तम हैं राम
  • झांसी चण्डी हो तुम बाला
  • अवध की होली
  • ओंठो पे बात जो दबी रह गई है
  • नंगे अपने नंगेपन को
  • जिंदगी की पटरी पर
  • राम का घर है बनता
  • ग़म के सागर में बैठकर हंसी न दो
  • जब दुश्मन सरहद पर आये खून खौलने‌ लगता है
  • भजन
  • गीत
  • गीत
  • गीत
  • हम प्रधान से बोले
  • प्रेम संग्रह
  • राधेय ही रहने देते
  • मानवता खड़ी है कफ़न ओढ़े
  • छन छन चलती थी तलवारें
  • गीत
  • गीत