बृज नारायण चकबस्त | Brij Narayan Chakbast
पंडित बृज नारायण चकबस्त (चकबस्त लखनवी, 1882 – 12 फ़रवरी 1926) का जन्म फैज़ाबाद में हुआ। उनके पिता पंडित उदित नारायण शिवपुरी चकबस्त भी कवि थे और 'यक़ीन' उपनाम से लिखते थे। चकबस्त के पाँच वर्ष की आयु में ही उनके पिता का देहांत हो गया, जिसके बाद उनके बड़े भाई पंडित महाराज नारायण चकबस्त ने उनकी शिक्षा का प्रबंध किया।
चकबस्त ने 1908 में कानून की डिग्री प्राप्त कर वकालत शुरू की। वे राजनीति एवं राष्ट्रीय आंदोलन में भी सक्रिय रहे। मात्र 9 वर्ष की आयु से उन्होंने काव्य-रचना प्रारंभ कर दी थी और 12 वर्ष की आयु तक उनके कलाम में परिपक्वता आ चुकी थी।
उनकी प्रसिद्ध नज़्मों में 'रामायण का एक सीन', 'ख़ाक-ए-हिंद' और राष्ट्रीय नेताओं पर लिखे मर्सिये अत्यंत लोकप्रिय हैं।
बृज नारायण चकबस्त की रचनाएँ
हिन्दी ग़ज़लें बृज नारायण चकबस्त
- अगर दर्द-ए-मोहब्बत से न इंसाँ आश्ना होता
- उन्हें ये फ़िक्र है हर दम नई तर्ज़-ए-जफ़ा क्या है
- कभी था नाज़ ज़माने को अपने हिन्द पे भी
- कुछ ऐसा पास-ए-ग़ैरत उठ गया इस अहद-ए-पुर-फ़न में
- ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें
- दर्द-ए-दिल पास-ए-वफ़ा जज़्बा-ए-ईमाँ होना
- दिल किए तस्ख़ीर बख़्शा फ़ैज़-ए-रूहानी मुझे
- नए झगड़े निराली काविशें ईजाद करते हैं
- न कोई दोस्त दुश्मन हो शरीक-ए-दर्द-ओ-ग़म मेरा
- फ़ना का होश आना ज़िंदगी का दर्द-ए-सर जाना
- फ़ना नहीं है मुहब्बत के रंगो बू के लिए
- मिटने वालों को वफा का यह सबक याद रहे
- मिरी बे-ख़ुदी है वो बे-ख़ुदी कि ख़ुदी का वहम-ओ-गुमाँ नहीं
- हम सोचते हैं रात में तारों को देख कर
- जहाँ में आँख जो खोली फ़ना को भूल गये
