अशोक चक्रधर के कविता संग्रह
अशोक चक्रधर हिन्दी कविताएँ
- घाव बड़े गहरे
- लाश में अटकी आत्मा
- दोनों घरों में फ़रक है
- यारा प्यारा तेरा गलियारा
- छोड़ना
- दरवाज़े पर घंटी
- ओ स्वयंनिर्मित स्वयंभू
- प्याज का एक पहाड़ा
- यहीं बजना है जीवन संगीत
- अरजी कहां लगाऊं?
- लो कल्लो बात
- यौवन भारी बोझ
- हां रात में हमने पी
- बोलते हैं रंग
- रामस्वरूप
- गरीबदास का शून्य
- तमाशा
- चालीसवां राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव
- जिज्ञासा
- डैमोक्रैसी
- रिक्शेवाला
- कटे हाथ
- पोल-खोलक यंत्र
- सुरसी
- धारा पर धारा
- सिपाही और कविता
- चट्टे मियां बट्टे मियां
- आलपिन कांड
- देर कर दी
- घपला
- अपनी-अपनी प्रार्थना
- गुर्गादास
- एकसंख्यक
- ठेकेदार भाग लिया
- माशो की मां
- सो तो है खचेरा
- चढ़ाई पर रिक्शेवाला
- कवित्त प्रयोग
- क्रम
- चेतन जड़
- पहले पहले
- नख़रेदार
- चल दी जी, चल दी
- किधर गईं बातें
- फिर कभी
- देह नृत्यशाला
- सुदूर कामना
- चुटपुटकुले (कविता)
- दया
- नन्ही सचाई
- कितनी रोटी
- नेता जी लगे मुस्कुराने
- पहला क़दम
- ख़लीफ़ा की खोपड़ी
- अपराधी-सिपाही
- गेहूं का दाना
- तो क्या यहीं?
- पियक्कड़ जी और डॉक्टर
- चूहे ने क्या कहा
- नया आदमी
- बौड़म जी बस में
- ससुर जी उवाच
- कौन है ये जैनी?
- सिक्के की औक़ात
- हाथी पकड़ने का तरीक़ा
- चीख़ निकली भयानक
- चीनू का स्वाभिमान
- प्यारी बहना भागी क्यों?
- बोलगप्पे
- हंसना-रोना
- परदे हटा के देखो
- खींचो खींचों
- मतपेटी से राजा
- गति का कुसूर
- मंत्रिमंडल विस्तार
- रंग जमा लो (नाट्य कविता)
- संगमरमर का संगीत (नाट्य कविता)
- हंसो और मर जाओ (कविता)
- ओज़ोन लेयर
- जंगल गाथा
- सुविचार
- होटल में लफड़ा
- भोजन प्रशंसा
- मनोहर को विवाह-प्रेरणा
- चिड़िया की उड़ान
- मैं तो पढ़-लिख गई सहेली
- गुनगुना
- लली आई
- सद्भावना गीत
- झूम रही बालियां
- छूटा गांव, छूटी गली
- चिड़िया की उड़ान
- ज़रा मुस्कुरा तो दे
- नया साल हो
- नई भोर
- घर बनता है घर वालों से
- बमलहरी
- नीति बदलेगी नहीं
- रैन गई ओ नवेली
- वैसे ही जीवन में क़ानून है
- ऐसे काया जलती है
- कुर्सी अक्रूर की हो
- वर्ग-विभाजन
- बात
- इच्छा-शक्ति
- बढ़ता हुआ बच्चा
- आपकी नाकामयाबी
- पोपला बच्चा
- डबवाली शिशुओं के नाम
- कै होली सर र र र
- पुस्तक की भूमिका
- पांच सीढ़ियां
- पचास साल का इंसान
- आम की पेटी
- लापता बंदर
- तीसरी कुर्सी
- बांस की खपच्ची
- जिनके घर कांच के
- ये शक्ल कहीं देखी है
- जेलर और तरबूज़
- मूल धातु
- शुभकामनाएं नए साल की
- शॉल बचाइए
