Vanshidhar Shukla / वंशीधर शुक्ल

वंशीधर शुक्ल (1904–1980) हिंदी और अवधी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि, स्वतंत्रता सेनानी तथा राजनेता थे। इनका जन्म उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले के मन्यौरा गाँव में बसंत पंचमी के दिन एक कृषक परिवार में हुआ था। इनके पिता पं. छेदीलाल शुक्ल एक सरल किसान और क्षेत्र के विख्यात आल्हा गायक थे। पिता के ओजपूर्ण आल्हा गायन ने बालक वंशीधर के मन पर अमिट छाप छोड़ी। सन 1919 में पिता के निधन के बाद जीवन में आए संघर्षों ने उनके व्यक्तित्व में जीवटता और व्यवस्था के प्रति विद्रोही स्वर पैदा किया।

सन 1925 के आसपास वे गणेश शंकर विद्यार्थी के संपर्क में आए, जिसके बाद उन पर स्वतंत्रता आंदोलन का रंग गहराता गया और वे कई बार जेल भी गए। महात्मा गांधी के आंदोलनों में सक्रिय भागीदारी के साथ उन्होंने लखीमपुर खीरी में 'गांधी विद्यालय' की स्थापना की। वे उत्तर प्रदेश विधान सभा के सदस्य (1959-1962) तथा राज्य सरकार में वन मंत्री भी रहे।

“कदम-कदम बढ़ाये जा खुशी के गीत गाये जा...” जैसी कालजयी राष्ट्रीय रचना के रचयिता वंशीधर शुक्ल ही हैं। 'उठो सोने वालों सबेरा हुआ है' तथा 'उठ जाग मुसाफिर भोर भई' इनकी प्रसिद्ध अवधी कृतियाँ हैं। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान, लखनऊ द्वारा 'हुजूर केरी रचनावली' का भी प्रकाशन किया गया है।

वंशीधर शुक्ल - स्वतंत्रता सेनानी एवं कवि

वंशीधर शुक्ल की कविताएँ