उत्तम ग़ज़लें और कविताएं : यशु जान
Uttam Ghazlein Aur Kavitayen : Yashu Jaan
इरादा
कुछ ठीक नहीं लग रहा इरादा तेरी आँखों का,
लगता है आज करेंगी ये क़तल कई लाखों का
हम तेरी कैद में तो नहीं नज़ारा देखना है मगर,
तेरे हुसन की सज़ा इश्क़ की गर्म सलाखों का
कि पारा जिस्म में घुस कर करता कहर है कैसा,
किसी ने कहा इश्क़ करना ज़हर पीना है सांपों का
चल अब देर मत कर तू दिखादे जलवा नज़रों से,
ये सागर इम्तिहान लेता है जैसे सब प्यासों का
यशु जान के सबर को भी अब परखना छोड़ दे तू,
बंद कर दूंगा वरना मैं भी धड़कना तेरी साँसों का
इरादे नेक नहीं थे
देख आज ग़म खड़े हैं मुझको चारों ओर से घेरे,
इरादे नेक नहीं थे किसी एक के या तेरे या मेरे
मेरे घर आँगन में मौत नाच रही है छम-छम,
मैं काट रहा हूँ रोज़-रोज़ अब ये ग़म के सवेरे
मेरी आँखें भी थक चुकीं तेरा देख-देख रस्ता,
ले रही है ज़िंदग़ी मेरी जल्द मौत के संग फेरे
कब कहाँ क्या हो जाये कोई बता ना सकता,
और क्या पता ये जहान छोड़ कहाँ होंगे बसेरे
इतना कहूंगा यशु जान को है भूलना मुश्किल,
देख भूल कर मौत तेरे भी घर लगा लेगी डेरे
एक बीमारी
एक बीमारी थी मुझे तेरी तस्वीर देख मुस्कुराने की,
अब एक और लग गई है तेरे बिन नींद ना आने की
ज़िन्दगी गुज़ार रहा हूँ तेरे धोख़े याद करकर,
होश दिल-दिमाग़ ने भुला दी है पीने-खाने की
कि हर बार रहा हूँ ज़िंदा मौत के करीब रह कर,
पर कोशिश तो बड़ी की थी मैंने मर जाने की
और मैं क्यों रहूँ परेशान जुदाई तेरी यूं सहकर,
अब मैं भी चलूँगा चाल तुझपे सितम ढाने की
तेरी याद धोख़े के सिवा है मेरी ज़िंदगी में क्या,
कोई परवाह ही नहीं है यशु अब जान जाने की
कामयाबी
सूरज किसी से पूछता नहीं चढ़ने से पहले और ढलने से पहले,
कामयाबी पाने के लिए उठना चाहिए इसके निकलने से पहले
सुबह की ताज़ी हवा और धुआं रहित वातावरण में सांस लो,
तांबे के लोटे का पानी पी लेना चाहिए सैर पे चलने से पहले
सुबह का पढ़ा हुआ सबक याद रहता है ज़िन्दग़ी भर के लिए,
बदल लेना अपनी आदतों को तुम दिल के मचलने से पहले
बनोगे फूल ऐसे जिसकी महक से ब्रह्माण्ड भी महक उठेगा,
अपने अंदर धैर्य का बीज बोना कमी किसी की खलने से पहले
समय के साथ तो बदलनी ही है दुनिया की हर एक चीज़ यारो,
यशु जान तुम खुद को बदल लेना दुनिया के बदलने से पहले
काश मौत की भी
काश मौत की भी कोई ज़िन्दग़ी होती,
उसका भी कोई मरता वो रोती होती
उसे भी पता चलता किसी के दर्द का,
आँसुओं से मुँह अपना धोती होती
कंधा देना पड़ता उसे किसी अपने को,
रोज़ किसी अपने की लाश ढोती होती
सिर्फ़ इतना नहीं उसे कोई धोख़ा देता,
हर बार उसकी याद में मरती-खोती होती
उसके साथ वो सब होता जो हुआ सबके साथ,
भीख़ यशु जान से मांगती जागती-सोती
कुदरत
मैंने कुदरत के नज़ारे ख़ूब देखे,
जगते जुगनू और सितारे ख़ूब देखे
मिला सागर ना चाहे निहारने को,
हमने नदियों के किनारे ख़ूब देखे
पास होते भी ख़ुदा को न देख सके,
पर मैंने बच्चे प्यारे-प्यारे ख़ूब देखे
चाहे उनकी जुदाई में जलना पड़ा,
रखे हाथ पे मग़र अंगारे ख़ूब देखे
तेरी महफ़िल में बैठा ना यशु अगर,
हमने सजे हुए चौबारे ख़ूब देखे
खूंखार
बचलो मैं इस तरह से तैयार हो गया हूँ,
हर सरकार के लिए खूंखार हो गया हूँ
मेरी जनता को बेवकूफ़ मत बनाओ,
मैं चलता फिरता अंगार हो गया हूँ
झूठी कहानियां घड़नी छोड़ दो अब,
मौत के फ़रिश्ते पर सवार हो गया हूँ
संविधान के साथ छेड़छाड़ की अगर,
सोच लेना हदों से पार हो गया हूँ
धर्मों के नाम पर भी लड़ा ना सकोगे,
मुस्लिम,हिन्दू,सीख,जाट चमार हो गया हूँ
यशु जान अकेला नहीं जनता साथ है उसकी
एक-एक के लिए मैं अब चार हो गया हूँ
गज़ल जिस तरह की भी हो
गज़ल जिस तरह की भी हो मैं सुनाता ज़रूर हूँ,
मैं करता नहीं तमाशा मगर दिखाता ज़रूर हूँ
दूसरों को खुश रखने का रुतबा नहीं मुझे हासिल,
मैं हस्ता तो अब नहीं मगर हसाता ज़रूर हूँ
रूठना उनसे अब मैंने यारो कम ही कर दिया है,
पर रूठे हुए को मेरी जान मैं मनाता ज़रूर हूँ
मुझे शौंक तो नहीं है किसीको गलत बोलने का,
पर ग़लत जो होता है उसे मैं बताता ज़रूर हूँ
ग़लत रास्तों पर यशु जान को चलना नहीं मंज़ूर,
कुछ बोलने से पहले उन्हें मैं समझाता ज़रूर हूँ
ग़ुनाह
मुझे कई बार लगता है कि मैं गुनाह कर रहा हूँ,
जो अपनी ही ग़ज़ल को पढ़के वाह-वाह कर रहा हूँ
मांगता हूँ वही जो मुकद्दर में है नहीं मेरे फिर भी,
मैं जानबूझकर क्यों उसीकी चाह कर रहा हूँ
और जला दिया है मैंने अपने सारे रिश्तों को तभी,
अब मैं देखकर भी मौत को ना आह कर रहा हूँ
ज़िन्दगी जल्लाद जैसी बन गई है लगे इस तरह,
ना किसी के दर्द की ही अब मैं परवाह कर रहा हूँ
कि जिस दिन से रूठे हैं वो यशु जान से शायर,
साथ अपने मैं दो और दिलों को तबाह कर रहा हूँ
ज़माना कहां चला गया
ज़माना कहाँ चला गया तू वहीं रहा खड़ा,
तू कैसे ढूंढ ना पाया खजाना रेत में गड़ा
उसको गले लगा लिया जिन्होंने लगाना था,
तू सारी उमर क्यूं रहा उसके पैरों में पड़ा
तूने नाम उनका लेकर ज़हर पी लिया होगा,
उसको रहा मगर नशा किसी और का चढ़ा
ख़ुदा ने उसकी सुन ली उसने मानी ख़ुदा की,
फिर तू क्यूं मग़रूरी में अपनी बात पर अड़ा
वो खुश हैं तो है ठीक यशु तुझे छोड़कर,
तू भी अपनी मुहब्बत पर इतराता था बड़ा
ज़िन्दग़ी के कुछ सवाल
ज़िन्दग़ी के कुछ सवाल ऐसे होते हैं,
जिनके जवाब बड़े अनोखे होते हैं
इश्क़ के सवाल पे मैं क्या करूँ यारो,
इसके जवाब में सिर्फ़ धोख़े होते हैं
वक़्त का सवाल तो सीधा होता है,
जवाब में मगर लोग रोते होते हैं
मौत से सवाल भी नहीं कर सकते,
जवाब में मिट्टी में लोग सोते होते हैं
सवाल जब भी उठता है यशु जान पे,
क्यों जवाब उसने अपने रोके होते हैं
तूफ़ान
मेरी ज़िंदग़ी में एक दिन ऐसा तूफ़ान आया,
अपने कफ़न में लेकर वो मेरी जान आया
बोला कि तेरा वक़्त ही ठहर गया है यहां,
तू समझ ये तेरी मौत का है सामान आया
कट रही थी दुःख-दर्दों में जो मुश्किल घड़ी,
नामुराद ज़िन्दग़ी को करने आसान आया
हर तरफ़ देख खामोशियों का ही माहौल है,
लग रहा है मेरे घर में रहने शमशान आया
यशु कुछ सोच ले कोई काम जो अधूरा पड़ा,
ले तुझे आज ख़ुदा का आख़री पैग़ाम आया
तेरी यादों का समंदर
तेरी यादों का समंदर है मेरे पास,
लेने ही नहीं देता जो मुझे सांस
तेरे गमों का बाज़ जिस्म पर बैठ,
नोच-नोच के खा रहा है मेरा मांस
हद हो गई है अब तेरे ज़ुल्म की,
दिल जल रहा मेरा जैसे जले बांस
तेरे हुस्न की चमक ने जादु सा कर,
मेरे दिल दिमाग को लिया था फांस
यशु जान जीना चाहता था ज़िंदगी,
धोखा क्यों देके तूने मेरी तोड़ी आस
तेरे ग़म चले आये
ये क्या हुआ जो मेरे रास्ते में तेरे ग़म चले आये,
मुश्किल में तो तुम थे और खींचे हम चले आये
लाख़ कोशिशें की रोकने की अपने आपको मगर,
कुछ ना हुआ बस तेरी ओर मेरे कदम चले आये
सोचता हूँ कि प्यार था अगर तो दूर क्यों हुए थे,
जो बरसों पुरानी दी हुई तोड़ हम कसम चले आये
और तेरे लफ़्ज़ों ने लगाईं थी मेरे ऊपर जो बंदिशें,
उन बंदिशों के फांसलों को करके ख़तम चले आये
अब दूर मत करना ये सोचकर यशु जान को खुद से,
कि दिन-रात दिए जो तूने सहकर सितम चले आये
प्यार से रहो
प्यार से रहो क्यूंकि प्यार ही काम आता है,
जो ना करे उसे ज़िंदगी भर ना आराम आता है
चाहे प्यार करने वाला कितना भी हो बुरा,
दर्द होने पर लबों पे उसका ही नाम आता है
प्यार से काट लो हर बुरे वक़्त को तुम,
बाद में वही वक़्त खुशी का लेके पैगाम आता है
प्यार करने पे ही दुःख दर्द की समझ आती है,
प्यार के रस्ते पर ही कोई अच्छा मुकाम आता है
तू कभी नफ़रत का पीर था यशु जान अब बता,
प्यार किस तरह तोड़ नफरतों को शरेआम आता है
बेवकूफ़ी
मौत से मिलकर जीने की सलाह करना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है,
जलती हुई चिता में कूद कर जा मरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है
जो चला गया वो वापिस नहीं आएगा तुम देख लो आज़माकर,
क़तल करके किसी लाश में जां भरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है
आख़री मंज़िल मेरी तुझ तक पहुंचना था लेकिन किसी ने कहा,
कि तेरे धोख़े की राह पर कर हाँ गुज़रना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है
ज़िन्दगी भर जो साथ रहता है जो बिना धोख़ा दिए हम सबको,
ऐसे साए के साथ होने से बेइंतहा डरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है
सुन ले यशु जान उसने तुझे कभी अपना तो नहीं माना है मगर,
प्यार में एक-दुसरे पर ही ग़ुनाह धरना बेवकूफ़ी नहीं तो क्या है
भगवान्
भगवान् तू मुझे ज़िंदा इस संसार में लाया है,
और मैंने तेरा किया ही तुझको लौटाया है
मुझमें जान फूंकी तूने और अब देख तू,
मैंने तुझे एक पत्थर के रूप में सजाया है
तू देख तो रहा होगा तेरे इंसानो ने ही,
तेरी पूजा पद्धति को रोज़गार बनाया है
धर्मों में बंट कर सारे संसार ने भगवंत,
इंसानियत के सच को अंदर दफ़नाया है
यशु को इस जहान में भेज दिया क्यों,
ग़ुनाहों के सिवा मैंने और क्या कमाया है
मुख में राम
ज़िन्दगी का यही लक्ष्य एक काम होना चाहिए,
सुबह उठते ही मुख में श्री राम का नाम होना चाहिए
दोनों हाथों से मेहनत करके खाओ और दान करो,
सभी भाई-बहनों के लिए यही पैग़ाम होना चाहिए
किसी से चीज़ मांगो अगर मजबूरी में याद रखो,
उसे लौटाने के बाद उसका दुगना दाम होना चाहिए
घर सदस्यों से बनता है और मकान ईंट पत्थरों से,
सबका घर होना चाहिए ना कि मकान होना चाहिए
अयोध्या जैसी नगरी बस सकती है यशु जान पर,
दुश्मनो के लिए भी दिल में सम्मान होना चाहिए
मुश्किल में इंसान
मुश्किल में इंसान बहुत कुछ कर जाता है,
डर जाता है मगर बहुत कुछ कर जाता है
सामना हो जब भी सांप का नेवले से,
डट के लड़ता है ना लौटकर घर जाता है
किसी को घेरले घनघोर अंधेरा दिन में,
रौशनी की किरन देख मन में हौंसला भर जाता है
हारता देख सेना को एक जानवर भी,
युद्ध में लाख़ सीने पे वार जर जाता है
पतंगा शान से जीता है चाहे दो घंटे ही,
धूम मचाता यशु खूब चाहे मर जाता है
यारों की याद
यारों की याद में हर शाम जी लेते हैं,
ना-ना करते भी एक जाम पी लेते हैं
वो बातें ही छेड़ते हैं दर्द देने वाली ऐसे,
कि नशे में हम उनका नाम ही लेते हैं
कभी-कभी हम ख़ुद को भूल जाते हैं,
वक़्त आने पर होश से काम भी लेते हैं
ख़ुदा जाने ये दोस्ती है कितनी गहरी,
ग़लत होते हुये भी हम ज़ुबान सी लेते हैं
यशु की जान उनकी जान में है यूं फसी,
उनकी बदज़ुबानी को शान मान जी लेते हैं
ये मेरी ज़िद है
पहले मेरी तमन्ना थी तुझे दिल से निकालने की,
अब ज़िद बन चुकी है वो तुझे मार डालने की
क्या कमी थी मेरे प्यार में जो इस तरह से छोड़ा,
ज़रूरत क्यों पड़ गई तुझे मेरी इज़्ज़त उछालने की
मेरी पीठ पीछे वार नहीं सुन क़तल किए हैं तूने,
बड़ी कोशिशें कर चुके हैं दिल को भी संभालने की
माफ़ी की कोई गुंजाइश भी बाक़ी नहीं है सनम,
हमने सीख ली है तरकीब टूटे दिल को पालने की
मेरे आंसुओं का सागर तुझको ले डूबेगा यार,
हिम्मत भी की अगर यशु की बात टालने की
रखो लाज मेरी गुरु नानक
रखो लाज मेरी गुरु नानक,
मेरा परिचय ना खास,
मैं आपका आप हो मेरे,
रहूँ बन चरणों का दास
माया का मैं रोगी लोभी,
उच्च कोटि का वस्तु भोगी,
मुझे इस बवंडर से बचावो,
मेरी एक ही है अरदास,
रखो लाज मेरी गुरु नानक
काली बदली मुझपे छाई,
दुश्मन हुआ है भाई-भाई,
करो उपाय ऐसा सद्गुरु,
टूटे ना मोरी आस,
रखो लाज मेरी गुरु नानक
खेल करे कोई जानबूझकर,
मोहे सताए सूझबूझकर,
यशु जान की विनती सुनो,
बुरा ना होये आभास,
रखो लाज मेरी गुरु नानक,
मेरा परिचय ना खास,
मैं आपका आप हो मेरे,
रहूँ बन चरणों का दास
राजनीति दलदल है
राजनीति दलदल है घुसते ही जाओगे,
मीठा लड्डू देखकर रह ना पाओगे
झूठ बोलने की लत सी लग जाएगी,
रख कर पैर इसमें तुम पछताओगे
चाँदनी चार दिन की दो दिन की लगेगी,
हर दिन हर रात सोच घबराओगे
सांस ना लेने देगा जनता का रुतबा,
बेईमानी कहलायेगा जो भी कमाओगे
धोखे की ज़िंदगी को धोखे में रखकर,
धोखा किया है यशु धोखा ही खाओगे
श्री राम का नाम होता है
जहाँ मेरे प्रभु श्री राम का नाम होता है,
वहां अनर्थ का कोई ना काम होता है
और जहाँ राम आ गए वहां है माँ सीता,
वहीं पे लक्ष्मण संग जति हनुमान होता है
दूरियां मिट जाती सुखों की होती है वर्षा,
हर मुश्किल से टकराना आसान होता है
कुदरत मेहरबान जब साथ खड़े हों राम,
साथ उसके चारों वेदों का ज्ञान होता है,
राम की शरण में जाये जो अमृत पान करे,
वो अमर प्राणी फिर यशु जान होता है
राम-राम करते
राम-राम करते मेरा,
तन ही हुआ राम,
बोलो क्या करूँ,
मन,आँखों में राम मेरे,
राम चारों धाम,
बोलो क्या करूँ,
राम-राम करते मेरा
मैं नाचूँ दीवानी होकर,
मात-पिता सब राम,
राम भक्ति मेरी शक्ति,
जप्ती सुबह-शाम,
राम संग सीता लक्ष्मण,
हनुमान जी प्रणाम,
बोलो क्या करूँ,
राम-राम करते मेरा
रावण जैसे दुष्ट का भी,
तोड़ा था अभिमान,
तेरे भक्त की भक्ति आगे,
क्या है मेरा दाम,
तेरे लिए सारे सम हैं,
ख़ास हो या आम,
बोलो क्या करूँ,
राम-राम करते मेरा
मेरे घर में आओ बनके,
मेरी देह के प्राण,
आपके चरणों में ही बैठूं,
दो ऐसा वरदान,
तू ही सबका भाग्य विधाता,
कह गया ये यशु जान,
बोलो क्या करूँ,
राम-राम करते मेरा
रूह प्यासी श्री राम के दीदार की
मन को भावे ना वस्तु कोई संसार की,
रूह प्यासी श्री राम के दीदार की
अब मेरे मन पे मेरा बस चलता ना,
एक बूँद ये मांगे तेरे प्यार की
हनुमान जी से भी काफ़ी बार कहा,
ले जाओ चिठ्ठी मेरे सतिकार की
सिर से लेकर पाँव तक मैं हूँ तेरा,
आ गई बारी दिल की हार की
'यशु' को दास बनालो अपना जी,
प्यार मेरे ने अब सारी हद पार की
सरकार
मेरी कविता के ऊपर कोई सरकार नहीं है,
मेरी कविता किसी की मुहताज नहीं है,
और सरकार कब दिखती है,
जब मतदान का समय निकट होता है,
लोगों के पैरों में जा गिरती है,
जब इनके शिकार का समय निकट होता है ,
मगर सरकार मेरी कविता की हकदार नहीं है
देश का नागरिक है आज़ाद,
क्यों दबा हुआ है इन दरिंदो के नीचे,
अभी भी समय है उठे नींद से,
जो हाथ कभी ना आएंगे इसके,
भागता है ऐसे परिंदों के पीछे,
लोकतंत्र तो लोकतंत्र है दिखावे का यार नहीं है
होकर एक दूसरे के ख़िलाफ़,
हमें बेवकूफ़ बनाना इनका काम है
पर आपस में रिश्तेदार हैं सब,
इनका लोगों को आकर्षित करना कामयाब है,
इन्हें अपनी जेब की चिंता है किसी से प्यार नहीं है
यशु तेरी हर कविता, ग़ज़ल,
क्या बिगाड़ सकती है ऐसे शैतानों का
पर मुझे पता है मेरी कविता,
जिस्म तक साड़ सकती है इन हैवानों का,
जनता का इशारा चाहिए और किसी का इंतज़ार नहीं है
हम जिसे अपना बना लेते हैं
हम जिसे अपना बना लेते हैं उसे छोड़के नहीं जाते,
चाहे वो लाख़ बेवफ़ाई करदे दिल तोड़के नहीं जाते
उन्हें अपनी मर्ज़ी करने दो तुम अपना देखो यार,
बेशर्मी आशिकों का गुर है मुँह मोड़के नहीं जाते
इस इश्क़ का बिगड़ेगा कुछ न तेरा बचेगा कुछ ना,
यूँ खेलकर किसी के दिल से निचोड़ के नहीं जाते
तू परवरदिगार से मांगे वो इश्क़ से मांगे हरदम,
टूटे हुए रिश्ते भी गांठों से कभी जोड़के नहीं जाते
अब यशु जान क्या करलोगे तुम यूँ ना करो ख़ता,
बेशर्म हुसन वालों का पल्लू ओढ़के नहीं जाते
हम दरबदर भटकते रहे उनकी तलाश में
हम दरबदर भटकते रहे उनकी तलाश में,
आँखों से अश्क टपकते रहे उनकी तलाश में
वो थे नहीं या ख़ुदा ने ही बनाया ना उनको,
हम बीच में लटकते रहे उनकी तलाश में
मोहब्बत पाक थी हमारी हमने की है सिर्फ वफ़ा,
सब बेवफ़ा समझते रहे उनकी तलाश में
वो महलों में पले और बन गए गुलफ़ाम की तरह,
हम मुश्किलों को गटकते रहे उनकी तलाश में
अब तो यशु में भी दम ना रहा दर-दर भटकने का,
ख़ुद की आँख में खटकते रहे उनकी तलाश में