Suchita Agarwal 'Suchisandeep' / शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप'
शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप' (विद्यावाचस्पति) का जन्म 26 नवम्बर 1969 को सुजानगढ़ (राजस्थान) में हुआ। वर्तमान में वे असम प्रदेश के तिनसुकिया शहर में निवास करती हैं।
उनकी हिंदी साहित्य के पारंपरिक छंदों में विशेष रुचि है और वे मात्रिक एवं वर्णिक लगभग सभी प्रचलित छंदों में काव्य सृजन में सतत संलग्न हैं। उनकी रचनाएँ देश की प्रतिष्ठित वेब-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होती रहती हैं।
प्रकाशित कविता संग्रह: "दर्पण", "साहित्य मेध", "मन की बात", "काव्य शुचिता" तथा "काव्य मेध"।
शुचिता अग्रवाल 'शुचिसंदीप' की कविताएँ
- प्रदीप छंद (यादों के झोंके)
- कामरूप छंद (माँ की रसोई)
- कुकुभ छंद (शरत्चंद्र चट्टोपाध्याय)
- माधव मालती छंद (नारी शौर्य गाथा)
- दोही छंद (माँ का आशीष)
- शैलसुता छंद (जीवन पथ)
- तमाल छंद 'जागो हिन्दू'
- कज्जल छंद “समय का हेर-फेर”
- चित्रपदा छंद "गुरु वंदना"
- चौपई (जयकरी) छंद 'खेलो कूदो'
- त्रिलोकी छंद (शिव आराधना)
- नरहरि छंद (जय माँ दुर्गा)
- दीप छन्द (राम-भजन)
- पञ्चचामर छंद (हनुमान उपासना)
- मालिक छंद (राधा रानी)
- खरारी छंद (जलियाँवाला बाग)
- हंसगति छंद (भारत)
- दिंडी छंद (सुख सार)
- पद्मावती छंद (दीपोत्सव)
- पुनीत छंद (भाई मेरा मान)
- दिंडी छंद (सुख सार)
- शास्त्र छंद (सदाचार)
- सुमेरु छंद (माँ)
- लीला छंद (शराब लत)
- लावणी छंद (जयदयालजी गोयन्दका)
- सिंह विलोकित छन्द (नारी जिसने सदा दिया)
- कलहंस छंद (तुलसी चरित)
- बिहारी छंद (प्रेम भाव)
- प्रदोष छंद (कविता ऐसे जन्मी है)
- मधुर ध्वनि छंद (वर्षा)
- चुलियाला छंद (मृदु वाणी)
- तोमर छंद (सुशिक्षा)
- विद्या छंद (मीत संवाद)
- शंकर छंद (नश्वर काया)
- लीलावती छंद (मारवाड़ की नार)
- सुमंत छंद "बरसो मेघा"
- मदनाग छंद 'साइकिल'
- शुद्ध गीता छंद "गंगा घाट"
- गीता छंद "गीता पढ़ने के लाभ"
- शुभगीता छंद 'जीवन संगिनी'
- कमंद छंद (परिवार)
- दिगपाल छंद (पिता)
- रुचिरा छंद (भाभी)
- शोकहर छंद (बेटी)
- तंत्री छंद (दुल्हन)
- मरहठा माधवी छंद "होली"
- दंडकला छंद 'मधुमास'
- कर्ण छंद 'नववर्ष उल्लास'
- गगनांगना छंद 'आखा तीज'
- निश्चल छंद 'ऋतु शीत'
- तोटक छंद 'उठ भोर हुई'
- सुगीतिका छंद 'मेरे लाल'
- सुमित्र छंद "मेरा भाई"
- शोभन छंद 'मंगलास्तुति'
- संपदा छंद 'श्री गणेशाय नमः'
- योग छंद "विजयादशमी"
- महाश्रृंगार छंद "चुनावी हल्ला"
- धारा छंद 'तिरंगा'
- अवतार छंद 'गोरैया'
- आल्हा छंद "सैनिक"
- त्रिभंगी छंद 'ससुराल'
- शार्दूलविक्रीडित छंद 'माँ लक्ष्मी वंदना'
- चांद्रायण छंद 'सुमिरन'
- सुखदा छंद 'गंगाजल'
- सरसी छंद "मुन्ना मेरा सोय"
