Rajendra Keshavlal Shah | राजेन्द्र केशवलाल शाह

जीवनकाल: 28 जनवरी 1913 – 2 जनवरी 2010

राजेन्द्र केशवलाल शाह गुजराती भाषा के मूर्धन्य साहित्यकार एवं कवि थे। उन्होंने गुजराती में 20 से अधिक काव्य और गीतों के संकलन रचे हैं, जो मुख्य रूप से प्रकृति की सुंदरता तथा जनजाति एवं मछुआरों की रोज़मर्रा की ज़िन्दगी के विषयों पर आधारित हैं। संस्कृत छंदों में रची उनकी कविताओं पर रवीन्द्रनाथ टैगोर की कृतियों का गहरा प्रभाव दिखाई देता है।

वे बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने बम्बई में एक प्रिंटिंग प्रेस भी चलाया, जहाँ से वे 'कविलोक' नाम की प्रसिद्ध कविता पत्रिका प्रकाशित करते थे। उनके प्रेस में हर रविवार सुबह कवियों की गोष्ठी हुआ करती थी, जो साहित्यिक जगत् में एक अहम परंपरा बन गई।

काव्य-सृजन के अतिरिक्त शाह ने कई महान कृतियों के अनुवाद भी किए, जिनमें रवीन्द्रनाथ टैगोर का 'बलाक', जयदेव रचित 'गीतगोविन्द', कॉलरिज की 'द राइम ऑफ़ द एन्शियंट मेरिनर' और दांते की 'डिवाइन कॉमेडी' प्रमुख हैं।

उन्हें वर्ष 2001 का ज्ञानपीठ पुरस्कार प्रदान किया गया था। निर्णायकों के अनुसार, "इनके जज़बातों की तीव्रता और काव्यों के रूप तथा अभिव्यक्ति में नयापन इन्हें एक ख़ास और महत्त्वपूर्ण कवि बनाता है। इनकी कविता की आध्यात्मिकता कबीर और नरसी मेहता जैसे मध्यकालीन महान कवियों की परम्परा में है।"

राजेन्द्र केशवलाल शाह - ज्ञानपीठ पुरस्कार से अलंकृत कवि

साम्प्रत में चिरंतन : राजेन्द्र शाह

(Samprat Main Chirantan : Rajendra Shah)