हिंदी कविताएँ : अरविंद गर्ग
Hindi Poetry : Arvind Garg


हमारा प्यार

हमें नहीं आता करना, प्यार करने का सिर्फ दिखावा और न ही सिर्फ एक दिन प्यार का त्योहार मनाना हमारे घरों में तो अलग ही होती है प्यार की परिभाषा हमारे लिए तो प्यार है एक अहसास ना कि 'आइ लव यू' जैसी कोई भाषा हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना हमारे पास हैं प्यार करने के बहुत से तरीके और साधन रात को माँ पढ़ते हुए चुपके से कमरे में आकर देती गरम कॉफी बिना कुछ कहे सिर पर जब हाथ फेरती उसमें होती है माँ के प्यार की गर्मजोशी हर सिप दिलाता है प्यार का अहसास हमारे दुखों के साथ-साथ खुशी में भी आंखें भर आना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना पापा का तो अलग ही तरीका है करने का लाड-प्यार पापा होते है नारियल जैसे अंदर से बहुत सॉफ्ट और बाहर कठोर हेलमेट क्यों नहीं लगाया , गाड़ी तेज क्यों चलाई ऑफिस में कुछ क्यों नहीं खाया पर फिर रात को चुपके से आकर कम्बल ढकना, एसी कम या तेज कर देना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना घर में लूडो, साँप सीढ़ी या तंबोला खेलते समय धोखेबाज़ धोखेबाज़ कहकर चिल्लाना और ‘मैं नहीं खेलता’ कहकर एक तरफ़ हो जाना क्या अद्भुत तरीका है करने का प्यार का इज़हार तब माता- पिता का जान बूझकर हार जाना उनकी उस समय की मुस्कान से प्यार का आभास दिलाना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना वह नमक मिर्च और राई से नजर उतारना जरूरी काम से बाहर जाने पर दही-चीनी खिलाना जेब में चुपके से खाने और परिवहनके लिए छुट्टे रुपये-पैसे डाल देना, खाना खिलाते समय गिनती भूल जाना हमारे यहाँ डब्बों में बंद करके दिया जाता है प्यार हॉस्टल जाते समय घी ,लड्डू, अचार,कचरी बना कर देना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना घर से निकलते समय बहुत सारे निर्देश दे देना गाड़ी धीरे और ध्यान से चलाना, पहुँच कर संदेश कर देना जब तक संदेश न आ जाए बेचैन रहना और निरंतर घड़ी देखना किसी काम में मन न लगना बीमार होने पर तबियत कैसी है मेडिकल बुलेटिन लेना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना हमारे यहाँ फिर शुरू होता है बच्चों की तरफ से उल्टा प्यार करना माँ! सुबह जल्दी नहीं उठना, कंप्यूटर, फोन का काम कर देना पापा - मम्मी के चश्मे ढूँढना, दवाई न लेने पर गुस्सा करना एक दिन भी फोन पर बात न होने पर एक-दूजे को उलाहनादेना हमें प्यार करना आता है, न कि दिखाना

हनुमान जी की सीख

हे विद्वान, बुद्धिमान, बलवान! मेरे प्रभु हनुमान अद्भुत अमूल्य है आपका योगदान, सदा रहता है आपका ही ध्यान सिखा दिया कि किसी भी रूप में कर सकते हैं समाज सेवा जरूरी नहीं है इसके लिए होना इंसान आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान चुना ब्रह्म-शक्ति के बजाय भक्ति और समर्पण यह भय या पुरस्कार की इच्छा से नहीं, दिव्य उद्देश्य से हुई उत्पन्न अपनी शक्ति, बुद्धि और क्षमता बनाए प्रभु सेवा के साधन साहसपूर्वक और हिचकिचाहट बिना, दिखाई काम करने की क्षमता भरी पड़ी है उद्देश्य प्राप्ति की भावना सिखाया,अहंकार और दिखावे का करें पूर्ण विनाश आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान शक्ति का न करें अपव्यय और आवश्यक होने पर ही करें उपयोग शक्ति का नहीं किया दिखावा, चुपचाप करते रहे संघर्ष कभी नहीं जताई प्रशंसा की इच्छा, न श्रेय प्राप्त करने का दावा कार्य पर ही केंद्रित रखते ध्यान आप हैं शक्ति के साथ विनम्रता और सहनशीलता के उदाहरण नियंत्रित था,अंधाधुंध नहीं था,जो भी किया विनाश आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान सेवा करना जारी रखते हैं चाहे मिले असफलता,प्रशंसा या आलोचना कभी भी कार्य में नहीं करते विलंब, धर्म की सेवा को किया समर्पण जो काम भी मिला,किया अथक उत्साह के साथ स्वार्थ से नहीं करते कार्य,नहीं किया दिखावा,न अभिमान रखी अपने आराध्या के प्रति असीम भक्ति और सम्मान न की कभी फल की इच्छा,करते रहे काम,मानकर फल देगा भगवान आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान आप हो सामान्य व्यक्ति के रखवाले और भगवान क्रोध दुष्टों के लिए सुरक्षित और निर्दोषों के लिए हो कष्ट निदान विनाश का नहीं मनाते उत्सव आपका कार्य उद्देश्यपूर्ण, नहीं अव्यवस्थित बुद्धिमानी, फुर्ती और भयंकर शक्ति की एक मिसाल बस कर्तव्य की ओर बढ़ जाते ,धर्म के प्रति अडिग प्रतिबद्धता के साथ यह ही एक उद्देश्य, राम काज कीन्हे बिना मुझे कहाँ विश्राम आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान भक्तों की रक्षा के लिए अदृश्य होकर भी रहते उपस्थित दूसरों की मोक्ष प्राप्ति के लिए पृथ्वी पर रहने का किया चयन उच्चतम लोकों में कर सकते थे प्रवेश,फिर भी चुना पृथ्वी पर रहना नहीं की कभी मोक्ष और स्वर्ग की कामना राम प्रस्थान के बाद चिरंजीवी होने का प्राप्त हुआ था वरदान आपके जीवन चरित्र से मिलती है बहुत सीख और ज्ञान

माटी की मूर्तियाँ

एक दिन भगवान और कुम्हार में हुआ संवाद बोले भगवान ,बनाते हैं हम प्रतिमाएँ, हम दोनों हैं कलाकार मैं भेजता हूँ तेरी जैसी बनाकर,तू बेचता है मेरी जैसी बनाकर पर क्यों है हम दोनों की मूर्तियों में इतना अंतर तुम्हारी प्रतिमाएँ पूजी जाती हैं मंदिरों में अंदर और मेरी प्रतिमाएँ कर रही हैं संघर्ष भयंकर क्या है तेरी मिट्टी में रसायन, क्यों है इनकी इतनी शान क्या कर सकते हो मेरी समस्या का समाधान? कुम्हार बोला ग्लानि मत कर भगवन न तेरी मिट्टी, न तेरी मूर्तियाँ हैं अपूर्ण बस अंतर इतना है तेरी मूर्तियों में आपस में नहीं है विश्वास मेरी मूर्तियों पर उन्हें है आश्वासन पूजा करने पर मिलेंगी खुशियाँ और वरदान क्या मेरी समस्या का कर सकते हो समाधान? भरा पड़ा है तेरी मूर्तियों में काम,क्रोध और अभिमान एक दूसरे का कर देते हैं सर्वनाश कुछ तो बन गए हैं दानव और शैतान पूजते हैं मंदिरों में रखी मेरी मूर्तियाँ और करते हैं नमन पर वृद्ध मां-बाप का करते हैं अपमान क्या मेरी समस्या का कर सकते हो समाधान? अब तो सब है तेरे हाथ, याद कर अपना गीता ज्ञान लेना होगा दोबारा भू पर अवतार और रावण और कंस का करना होगा संहार आ जाए सुख शांति और कर दो फिर स्थापन रामराज तब हो जाएगा तेरी और मेरी मूर्तियों का अंतर समाप्त मुझे पूरा है विश्वास, तू करेगा अपनी मूर्तियों का कल्याण क्या मेरी समस्या का कर सकते हो समाधान?

घर से काम (डब्ल्यूएफएच)

सब कहते हैं कोविड ने किया बहुत विनाश मुझे तो कोविड से शुरू हुआ,”घर से काम” ने किया परेशान मेरे पति ने तो अब घर ही बना लिया कार्यस्थान क्या मिल-जुलकर निकाल सकते हैं इसका कोई समाधान घर से काम (डब्ल्यूएफएच ) ने किया परेशान पहले सुबह चले जाते थे,आते आते हो जाती थी शाम ना नाश्ता, ना लंच का इंतेज़ाम,डिब्बा दे देती थी हो जाता था काम मजे से देखो टीवी, मार्केट घूमो सहेलियों संग, खेलो ताश अब तो घर में हो गई कैद,ना कहीं जाना ना सुबह वाली सहेलियों संग सैर समय पर आ जाते थे ,आनंद लेने के लिए मिल जाती थी शाम घर से काम (डब्ल्यूएफएच ) ने किया परेशान दो बेडरूम फ्लैट में बनाकर एक कमरे में ऑफिस, कर लिया अधिकार बाहर का खाना खाने को तो तरस ही गए हैं साथ बैठकर खाने को तो पता नहीं बीत गए हैं कितने मास घर में किसी को बोलने नहीं देते, कहते “बोलो मत मेरी आ रही है कॉल “ अमेरिका कवर करते हैं, इसलिए रात दो बजे खत्म होता है काम पापा के साथ सोने की बेटी की जिद का भी नहीं रख पाते मान घर से काम (डब्ल्यूएफएच ) ने किया परेशान माँ ने सिखाया था पति होता है परमेश्वर यही सोचकर गुजर बसर करती रहूँगी जीवनभर क्या तू इसका कुछ कर सकता है भगवान कोरोना तो हम गए भूल, पर घर से काम के लिए नहीं कर पाएंगे तुझे माफ,यह रखना ध्यान घर से काम (डब्ल्यूएफएच ) ने किया परेशान

आधुनिक युद्ध

हे भगवान! देख कितना बदल गया है तेरा इंसान अब तो बदल गए युद्ध करने के तरीके और आकार भूल गया हिरोशिमा -नागासाकी का मानव संहार,यह इंसान बदल गए हैं युद्ध के आकार-प्रकार, हे भगवान! पाषाण काल में इस्तेमाल होते थे पाषाण उससे बहुत कम होता था नुकसान फिर आया वह काल, जब कुछ ही होते थे सैनिक, बलिदान जानमाल की होती थी बहुत कम हान बदल गए हैं युद्ध के आकार-प्रकार, हे भगवान! युद्ध के होते थे कुछ नियम और कानून सूर्यास्त के बाद कर देते थे युद्ध-विराम,करते थे घायलों का उपचार बहुत नियंत्रित होता था, न होता था इतना हानिकारक और घमासान फिर बंदूकों और तोपों से होने लगे वार विध्वंस करते थे दुश्मन के किले और अन्य सैनिक संस्थान बदल गए हैं युद्ध के आकार-प्रकार, हे भगवान! अब तो युद्ध है असीमित,अनियंत्रित ,अनुशासनहीन और बे-लगाम नष्ट करते हैं हवाई-अड्डे, पुल,पूजाघर,अस्पताल, स्कूल और ऊर्जा संस्थान शहीद नहीं होते सिर्फ सैनिक,बल्कि नागरिक, कन्याएँ और बीमार बरसते हैं गोले, मिसाइल, इस्तेमाल होते हैं जेट्, ड्रोन और रडार अमर्यादित, असीमित हो गई है युद्ध की पहचान बदल गए हैं युद्ध के आकार-प्रकार, हे भगवान! जाने क्यों इतना निर्दयी और क्रूर हो गया है इंसान क्यों नहीं आती उनको दया और लाज जो निर्दोष बच्चों ,महिलाओं और बुज़ुर्गों पर भी कर देते हैं वार हे ईश्वर, क्या दे सकता है इनको सद्बुद्धि का वरदान क्यों नहीं हो सकता बातचीत से ही समस्याओं का समाधान बदल गए हैं युद्ध के आकार -प्रकार, हे भगवान!

माँ का पल्लू

माँ का पल्लू, मेरी माँ का पल्लू कितना प्यारभरा, कितना सुंदर मेरा सारा संसार छिपा है इसके अंदर देता माँ को गरिमामयी ममतामयी छवि तब ही आया होगा इसको पहनने का ध्यान माँ का पल्लू है ममता भरा परिधान एक साथ कितने आता है काम गरम बर्तन पकड़ना,बच्चों का पसीना, आंसू और शरीर पोंछना,हाथ साफ करना आंखों में दर्द होने पर गर्म करके आंखों पर रखना बच्चों को छिपने का नहीं मिलता इससे अच्छा स्थान माँ का पल्लू है ममता भरा परिधान माँ का पल्लू पकड़ कर चलना न खोने का डर, न भटकने का बच्चों को लपेट कर ठंड से बचाना मीठी बेरी,आम, प्रसाद भी तो इसी में है मिलता घर में झाड़ू, पोंछा, सफाई करने के आता है काम माँ का पल्लू है ममता भरा परिधान इसका कोई विकल्प नहीं निकाल सका इंसान आज की पीढ़ी को कहाँ इसका अहसास अब तो जग से ही कर गया यह पलायन बच्चों के लिए करता चादर गद्दे का काम पल्लू में पैसे बांधकर,ले लेता गुल्लक का स्थान माँ का पल्लू है ममता भरा परिधान

दो अभिमानी पेड़ों की सीख

मेरे घर के सामने हैं दो पेड़ जो दे गए मुझे ग्रंथों का संदेश मुझे सिखा गए जिंदगी का निचोड़ जब आया उनकी जिंदगी में बहुत बड़ा मोड़ दोनों रंगीन पुष्पों से थे भरपूर करते अठखेलियाँ और घमंड से थे चूर एक दूसरे को चिढ़ाने में थे परिपूर्ण एक दुजे को नीचा दिखाने की थी होड फिर आया उनकी जिंदगी में बहुत बड़ा मोड़ तब समयचक्र ने लिया दूसरा मोड़ और भाग्य ने भी दिया साथ छोड़ फिर भू-गत हो गए रंगीन फूल कुछ पत्ते भी गए साथ छोड़ जब आया उनकी जिंदगी में बहुत बड़ा मोड़ तब दोनों ने मुझे दिया यह संदेश हे मानव ! हम निश्चल निर्जीव पेड़ों से ले यह उपदेश द्वेष और अभिमान को दे छोड़ कभी खुशी कभी ग़म ही है ज़िंदगी का निचोड़ सारे दुख छोड़कर अपने गंतव्य की तरफ दौड़ जब आया उनकी जिंदगी में बहुत बड़ा मोड़

घर की देवियाँ

मंदिर वाली देवियों की करो पूजा और अभिनन्दन और जरूर करो प्रसन्न और नमन पर जो घर में हैं जीवित देवियाँ उनको भी प्रसन्न करने में लगाओ तन, मन और धन मंदिर और घर वाली दोनों देवियों को करो नमन जब होगा घर में उपस्थित महिलाओं का आदर और सम्मान तभी मंदिर वाली देवियों का मिलेगा वरदान ये महिलाएँ अनेक रूप करती हैं धारण अनेक रूपों में घरों में है विराजमान माता,बेटी और पत्नी के रूप में भेजते हैं भगवन मंदिर और घर वाली दोनों देवियों को करो नमन घर की जीवित देवियाँ करती हैं काम महान काली और दुर्गा बनकर दुष्टों का करती हैं संहार गृह लक्ष्मी बनकर सुचारू रूप से चलाती हैं घर सरस्वती बनकर बच्चों को करती हैं शिक्षित लक्ष्मी बनकर लाती हैं धन,अन्नपूर्णा बनकर देती हैं भोजन मंदिर और घर वाली दोनों देवियों को करो नमन देवियाँ नहीं केवल मंदिर की मिट्टी की मूर्तियों में इन्हीं रूपों में भी स्थापित कर की गई है हमारे घरों में पूजा आराधना नहीं हैं उनकी आवश्यकताओं में केवल प्यार और सम्मान से घर में भर देंगी खुशियाँ और धन मंदिर और घर वाली दोनों देवियों को करो नमन

मैं हूँ गृहिणी

मैं हूँ गृहिणी ज़रूर, पर न समझो मुझको बेरोज़गार घर में मच जाता है कोहराम,मेरे एक दिन पढ़ने पर बीमार नहीं मिलते कपड़े, खाने के लिए जाना पड़ता है बाहर एक ही दिन में हो जाता है सब का हाल-बेहाल मेरे परिश्रम और कर्मों से ही चल रहा है मेरा घर-संसार मैं हूँ गृहिणी ज़रूर, पर न समझो मुझको बेरोज़गार प्रबंधन की पढ़ाई किए बिना भी प्रबंधन सिद्धांत अपनाती हूँ हर-रोज घर में सामंजस्य बनाए रखना है मेरी दिनचर्या का भाग फिर भी मैं बदले में नहीं मांगती कोई उपहार घर में सबकी खुशी और प्रगति ही है मेरा इनाम और पगार  मैं हूँ गृहिणी ज़रूर,पर न समझो मुझ को बेरोज़गार कमाती नहीं हूँ पर बचाती रहती हूँ हर रोज़ घर चलाना मेरे लिए नहीं है कारोबार लेकिन है एक आराधना, तपस्या और संस्कार मुझे कहा गया है गृह-लक्ष्मी, करती हूँ धन की रक्षा,लाती हूँ सुख-समृद्धि मेरा खर्च बचाना ही तो है घर में लक्ष्मी लाने का दूसरा प्रकार मैं हूँ गृहिणी ज़रूर ,पर न समझो मुझको बेरोज़गार बच्चों को पढ़ा कर बन गई हूँ एक अच्छी अध्यापिका बच्चों को पढ़ाने का मेरे ही कंधों पर है भार कुशलता से घर चलाती हूँ, बच्चों के साथ जागती हूँ, हाँ घर में रहती हूँ जरूर आजकल तो मेरी बहनों ने शुरू कर दिए हैं स्टार्टअप और कारोबार मैं हूँ गृहिणी ज़रूर,पर न समझो मुझको बेरोज़गार

पकड़ के देखो एक दूजे का हाथ

वह काली अंधेरी गर्मी की थी रात नहीं सूझ रहा था हाथ को हाथ हम थे परेशान सोच रहे थे क्या करें समाधान तब ही आया विचार कि चलो करें छत पर विश्राम हमने बिस्तर लगाया, छत पर किया छिड़काव अभी तैयारी भी नहीं हुई थी पूरी, आई बारिश मूसलाधार बहुत थे हैरान परेशान तभी सूझा नया विचार चलो सब भूल कर बारिश का आनंद लेते हैं साथ साथ तब पता नहीं चला कब सो गए कैसे बीत गई रात सुबह उठे तो पाया सुंदर स्वर्णिम आकाश तब जीवन की सच्चाई का हुआ अहसास ये डरावनी राते, ये बारिशें, ये परेशानियाँ देने लगेंगी साथ बन जाओ एक दूसरे का सहारा, दो एक दुजे का साथ बस एक बार पकड़ के देखो एक दूजे का हाथ बस पकड़ के देखो एक दूजे का हाथ

मेरे देश की महान वीरांगनाएँ

हे ! मेरे देश की अतुलनीय वीरांगनाएँ माताओं अपने सामर्थ्य और शक्ति को लो पहचान तुम्हें तो विशेष बनाए है भगवान एक बार फिर देशभक्ति की बन जाओ मिसाल ईश्वर ने स्त्री बना कर किया है आपका सम्मान मेरे देश की माताओं! अपने सामर्थ्य को लो पहचान एक महान माँ से ही राष्ट्र बन सकता है महान महान राष्ट्र बनाने में था और रहेगा तुम्हारा अतुल्य योगदान पर शायद हनुमान की तरह कर् गई हो विस्मृत अपनी शक्ति और कौशल का लो संज्ञान  तुम ही देश को दे सकती हो महान संतान मेरे देश की माताओं! अपने सामर्थ्य को लो पहचान कौशल्या बनकर दे दो लक्ष्मण और राम जिससे हो सके रावणों का संहार बन जाओ सुभाद्रा और करो अनेक अभिमन्यु तैयार जो चक्रव्यूह से ना हो भयभीत,मृत्यु से करते हों प्यार बन जाओ यशोदा,दो देश को कृष्ण जिससे से हो जाए कंसों का नाश सीता बनकर अवतरित करो लव-कुश जैसी संतान मेरे देश की माताओं! अपने सामर्थ्य को लो पहचान पैदा करो शिवाजी,बन कर जीजा बाई और प्रभावती बोस बन कर,सुभाष चंद्र बोस बन जाओ जगरानी देवी और विद्यावती कौर लाओ भगतसिंह और चंद्रशेखर आज़ाद तुम न रहो अनभिज्ञ ,अपने सामर्थ्य का कर लो बोध राष्ट्रहित में था और रहेगा आपका महत्वपूर्ण योगदान मेरे देश की माताओं! अपने सामर्थ्य को लो पहचान और कोई वो नहीं कर सकता जो कर सकते हो आप एक माँ के गुणों का होता है बहुत गुणा-योग कई महान बच्चे बना सकती है एक योद्धा नार जिससे वर्षों तक आभारी रहता है पूरा संसार अपने को अबला मानकर ना करो मातृत्व का अपमान मेरे देश की माताओं! अपने सामर्थ्य को लो पहचान

प्रदूषण

सीने में दर्द, साँस नहीं आती, गले और आँखों में है जलन क्या मुझे कोई हो गई है बीमारी या यह है प्रदूषण का असर घने कोहरे ने ढक दिया है आकाश हे ईश्वर! इस मुसीबत में दे हमारा साथ यही प्रार्थना कर रहे हैं दिन और रात इस प्रदूषण ने तो खराब कर दिए हालात पत्नी कहती है कुछ क्यों नहीं लेते बोलता हूँ ले तो रहा हूँ हवा,क्या करूँ प्रदूषित है आकाश सभी प्रयोग हो रहे हैं नाकाम,ऑड-इवन,गरैप-4,कृत्रिम बरसात अब तो गुर्दे और हृदय ने भी मान ली है हार फेफडों ने कर दिया है करना बंद काम इस प्रदूषण ने तो खराब कर दिए हालात इसे पैदा करने वालों,करो हम पर रहम,करो कुछ विचार स्कूल बंद है, फैक्ट्री में भी नहीं आ पा रहे हैं कामगार नहीं हो रहा है कुछ भी कामकाज सारे उपाय छोड़ गए हैं साथ एयर-प्यूरीफायर और मास्क ने भी खड़े कर लिए हैं हाथ इस प्रदूषण ने तो खराब कर दिए हालात हे ईश्वर! अब तो सिर्फ तेरा ही है सहारा केवल तुझ पर ही बची है आशा शेष दिला दे कुछ तो राहत,कर दो कुछ उपाय विशेष बढ़ा दो अपनी गति, पवन देवता को दो आदेश वर्षा रानी सब कुछ धो डालो, देकर अपना वरदान इस प्रदूषण ने तो खराब कर दिए हालात

समय चक्र

समय चक्र है बहुत अधिक बलवान इससे न बच पाए बलवान, न धनवान सबको चलना पड़ता है समय के अनुसार चाहे प्रसन्न हो, दुखी रहो या चाहे हो परेशान समय चक्र है बहुत अधिक बलवान समय चक्र से तो न बच पाए यहाँ तक कि राम भगवान इतने शक्तिशाली,बुद्धिमान और वीर राजा दशरथ के सुपुत्र और इतने यशस्वी राजा के दामाद, विष्णु के अवतार फिर भी स्वीकार करना पड़ा संन्यास जाना पड़ा पत्नी और भाई के संग बनवास समय चक्र है बहुत अधिक बलवान मृत्यु शैय्या पर पड़े पिता के भी न रहे साथ न ही कर सके पिता का अंतिम संस्कार न रोक सके लक्ष्मण की मूर्च्छा ,न रोक सके ब्रह्मास्त्र न रोक सके सीता का हरण,जो ले गया रावण मांग कर दान समय चक्र है बहुत अधिक बलवान अपनी गर्भवती पत्नी को भी भेज दिया आश्रम, ऋषि वाल्मीकि के पास ना प्रसूति के समय थे पत्नी के साथ ना रोक सके सीता जी का भूमि में होना प्रवेश ना अपने पुत्रों को प्रदान कर सके शिक्षा और ज्ञान समय चक्र है बहुत अधिक बलवान अपने प्रिय भाई लक्ष्मण को कर दिया घर से निष्कासित और किया भाइयों सहित सरयू में जल समाधि लेना स्वीकार यही सीख हमें दे गई है गीता और रामायण अपना कर्म करते रहो, फल देंगे भगवान बुरे समय में न करें अनावश्यक चिंता और अच्छे समय में ना करो अभिमान समय चक्र है बहुत अधिक बलवान

पहलगाम

हे मेरे प्यारों! हे मेरे भारत वासियों ! कब तक सहोगे ये खून खराबा ,आतंकवाद और नरसंहार  अत्याचार की भी अब तो हो गई है सीमा पार कैसे भूल सकते है आप ऐसी घटनाएँ बारम्बार? हमारी सहनशीलता से समझा जा रहा है कि हम हैं निर्बल और कायर अब भागना छोड़ो, लड़ना सीखो ,इस जीने से तो अच्छा है दे देना बलिदान अब समय आ गया है, यही है समय की मांग बस और बस , अब करना होगा इनका कुछ बड़ा इंतजाम मिल जुलकर लो बड़ा इंतकाम,नहीं तो होते रहोगे लहू लुहान जब गवानी है ऐसे ही जान , तो क्या फायदा तरक्की का, चाँद पर उतार के यान क्या भूल गए अपना इतिहास और गीता रामायण का ज्ञान बदला लेने का समय है अभी और आज बता दो उनको हम हैं वही वीर बलवान

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