Arvind Garg अरविंद गर्ग
इनका जन्म चकराता (जिला देहरादून) में 12 जुलाई 1959 को हुआ। पिता व्यापारी और माता गृहणी थीं। हिंदी मातृभाषा है। शिक्षा में होनहार रहे हैं। इंजीनियरिंग (ऑनर्स) और एमबीए की शिक्षा ली। भारत और विदेश में तेल उद्योग के अलग-अलग वरिष्ठ पदों पर काम कर चुके हैं। कवि सम्मेलनों में जाने से हिंदी कविताएँ लिखने की प्रेरणा मिली। बचपन से निरंतर हिंदी की सेवा में समर्पित है। सेवानिवृत्ति के बाद लिखने को और गंभीरता से लिया । इनकी 85 से अधिक कविताएँ प्रकाशित हो चुकी हैं। कई मंचों पर आवासीयसमाज (Society) के फंक्शन इत्यादि में काव्य पाठ करते रहते हैं। अपने काम और कवितापाठ के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित होते रहते हैं। विभिन्न समाचारपत्र, पत्रिकाओं के लिए कविता, गीत, मुक्तक आदि निरतंर लेखन करते हैं l कई तकनीकी लेख भी भारतीय और विदेशी पत्रिकाओं में प्रकाशित कर चुके हैं।कई तकनीकी सेमिनार और कोर्स में वक्ता और शिक्षक के तौर पर हिस्सा ले चुके हैं। एक तकनीकी किताब “विकिरण सुरक्षा” (रेडिएशन सेफ्टी ) भी प्रकाशित की है।अपनी हिंदी कविताओं का संग्रह कर पुस्तक प्रकाशित करने की तैयारी में है। इनकी रुचियां लेखन,अध्ययन, बागवानी व संगीत सुनना हैं। समाजसेवा कार्यों में कन्याओं की पढ़ाई इत्यादि में योगदान देते हैं। अपनी उपलब्धियों का श्रेय अपनी मां और पत्नी को देते हैं।
हिन्दी कविताएँ : अरविंद गर्ग
- हमारा प्यार
- हनुमान जी की सीख
- माटी की मूर्तियाँ
- घर से काम (डब्ल्यूएफएच)
- आधुनिक युद्ध
- माँ का पल्लू
- दो अभिमानी पेड़ों की सीख
- घर की देवियाँ
- मैं हूँ गृहिणी
- पकड़ के देखो एक दूजे का हाथ
- मेरे देश की महान वीरांगनाएँ
- प्रदूषण
- समय चक्र
- पहलगाम
- पेंसिल् और रबड़ का रिश्ता विशेष
- साड़ी
- पति-पत्नी का रिश्ता
- माँ मेरी माँ
- अपना परिवार
- कृष्ण का गीता ज्ञान
- दिलवालों की दिल्ली