पंडित मांगे राम Pandit Mange Ram
पंडित मांगे राम (जन्म : 1905, मृत्यु : 15 नवंबर 1967) हरियाणवी भाषा के प्रसिद्ध कवि व लोक कलाकार थे। उन्हें प्यार और सत्कार से लोग दादा मांगे राम के नाम से भी याद करते हैं ।
पंडित मांगे राम का जन्म सिसाना (रोहतक) जो की अब सोनीपत जिले के अंतर्गत आता है, में हुआ। इनके पिता का नाम अमर सिंह व माता का नाम धरमो देवी था। पंडित मांगे
राम के चार भाई–टीकाराम, हुकमचंद चंदरभान और रामचंद्र तथा दो बहने-नौरंगदे (गोंधा) और चन्द्रपति थी। पंडित मांगे राम अपने भाई बहनो में सबसे बड़े थे। मांगे राम के नाना
पंडित उदमीराम गॉंव पाणची (सोनीपत) अच्छी जमीन-जायदाद के मालिक थे। परन्तु उनकी कोई संतान नहीं थी। इसलिए नाना ने पंडित मांगे राम को गोद ले लिया और वे पाणची में रहने लगे।
मांगे राम की स्कूली शिक्षा नहीं हुयी परन्तु वे थोड़ा बहुत पढ़ना-लिखना जानते थे। पंडित उदमीराम धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति थे और उनकी रूचि भजन शब्दों में ज्यादा थी। सत्संग-कीर्तन करना
पंडित उदमीराम का नित्य का कार्य था। नाना की इसी प्रवृति का प्रभाव मांगे राम पर पड़ा और उनका रुझान गीत-संगीत की तरफ होता चला गया। विक्रमी सम्वत 1990 (सन 1933)
में घरवालों की इच्छा के विपरीत पंडित मांगे राम सांग मण्डली में शामिल हो गए और उस समय के प्रसिद्ध सांगी, बल्कि सांग जगत की सबसे महान विभूति पंडित लख्मीचंद को विधिवत अपना गुरु बना लिया।
पंडित मांगे राम जी की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं-
अजीत सिंह-राजबाला, कृष्ण जन्म, कृष्ण-सुदामा, खंडेराव परी, चन्द्रहास, चापसिंह-सोमवती, चित्र मुकुट, जयमल-फत्ता, ध्रुव भगत, नर सुल्तान-निहाल दे, नल-दमयन्ती,
नौरत्न, पिंगला-भरथरी, पूर्णमल, फूल सिंह-नौटंकी, भगत सिंह, महात्मा बुध, मालदे का आरता, मीराबाई, राजा गोपीचंद, राजा मोरध्वज, रुक्मण का ब्याह, रूप-बसंत, लैला-मजनू,
वीर हकीकत राय, शकुन्तला-दुष्यंत, शिवजी का ब्याह, सति विपोला, सति सुकन्या, सत्यवान-सावित्री, समरसिंह-किरणमयी, सरवर-नीर, सीता हरण (रामायण), हंसबाला-राजपाल,
हीर-राँझा, हीरामल-जमाल, हूर मेनका-विश्वामित्र, भजन संग्रह, फुटकर रागनियाँ ।
