Nilmani Phookan | नीलमणि फूकन
नीलमणि फूकन (10 सितम्बर 1933 – 19 जनवरी 2023) का जन्म असम के दरगाँव में हुआ था। वह असमिया भाषा के मूर्धन्य कवि एवं विद्वान थे तथा उन्होंने असमिया में कविता की 13 पुस्तकें लिखीं। असमिया साहित्य की अन्य विधाओं में भी उनका ऐतिहासिक योगदान रहा है और उन्हें असमिया साहित्य में ऋषि-तुल्य स्थान प्राप्त है। नीलमणि फूकन को देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार, साहित्य अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री, असम वैली अवार्ड तथा साहित्य अकादमी फ़ेलोशिप सहित अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाज़ा जा चुका है। 1950 के दशक की शुरुआत से कविता लेखन आरंभ करने वाले फूकन ने 1961 में गुवाहाटी विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की और 1964 में गुवाहाटी के आर्य विद्यापीठ कॉलेज में प्राध्यापक के रूप में सेवा शुरू की, जहाँ वे 1992 में सेवानिवृत्ति तक कार्यरत रहे। प्रगतिशील सोच के प्रतीक नीलमणि फूकन ने लगभग सात दशकों तक सक्रिय रहकर असमिया कविता को एक नया आयाम दिया। उनकी प्रमुख कृतियों में 'सूर्य हेनु नामी आहे ए नोडियेदी', 'गुलापी जमुर लग्न' और 'कोबिता' शामिल हैं। उन्होंने जापानी व यूरोपीय कविताओं का असमिया में अनुवाद भी किया। डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय ने 2019 में उन्हें डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया था।
असमिया कविता हिन्दी में : नीलमणि फूकन
(मूल असमिया से अनुवाद : पापोरी गोस्वामी)- एक नील उपलब्धि
- पत्थर और झरनों से भरे इस पठार में
- वो शुक्रवार या रविवार था
- रजस्वला मैदान पार करके तुम
- क्या कोई जवाब मिला तुम्हें
असमिया कविता हिन्दी में : नीलमणि फूकन
(मूल असमिया से अनुवाद : दिनकर कुमार)- तुम्हारी हँसी
- तुम
- शिशु की मृत्यु
- पहचान
- अन्धेरा
- हंसध्वनि सुन रहा हूँ
- स्फटिक के एक टुकड़े पर उकेर लिया तुम्हें
- तुमने कैसी बांसुरी बजाई
