Mela Ram Tayyar | मेला राम तायर
मेला राम तायर (2 जनवरी 1901 - 5 मई 1976) का जन्म बटाला में माता मलावी देवी और पिता दौलत राम के घर हुआ था। वे जलियाँवाला बाग हत्याकांड (13 अप्रैल 1919) के प्रत्यक्षदर्शी थे, जहाँ उन्हें गोलियों के छर्रे लगे थे। स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के कारण तायर जी, उनकी पत्नी शीला रानी और साले किशनचंद को 'ताम्र पत्र' से सम्मानित किया गया। तायर जी एवं उनकी पत्नी ने यह कहते हुए स्वतंत्रता सेनानी पेंशन लेने से इनकार कर दिया था कि "हमने पैसे के लिए देश की सेवा नहीं की।"
विभाजन के पश्चात् वे बटाला में सब-रजिस्ट्रार तथा पंजाब कांग्रेस गुरदासपुर के महासचिव व अध्यक्ष रहे। पंजाबी साहित्य जगत में वे अपनी प्रसिद्ध रचना 'भगत सिंह की घोड़ी' के लिए विशेष रूप से जाने जाते हैं।
मेला राम तायर की कविताएँ एवं ग़ज़लें (Hindi Poetry)
- वो बच्चे बाप से पूछें
- इस शहर में सब कुछ जायज़ है
- अब न प्यारी बटन लगेंगे
- दिल को बदलो
- कहते हैं भारत के नेता
- सुनो कहानी दुनिया वालो
- आगे बढ़ते जाएं
- तूफानों में है कश्ती
- वो आने लगे और जाने लगे
- दुनिया-ए-मुहब्बत
- ओ संतरी सिपाही
- हम देश को स्वर्ग बनाएंगे
- आगे कदम बढ़ाओ साथी
- ये उजले उजले लोग हैं जो
- तुमने किसी की याद में
- इस भारत का तारा हूं
- कोई दिल में हसरत
- कुछ दीये और जलाए हैं
- मैं जब रौशन सितारों में
- वो सर ही क्या
- हुई जा रही हैं नज़दीक राहें
- यह आज़ादी की देवी
- तूफान उठ रहा है
- चंपत हो गई निंद्रा रानी
- दीप जगाना दीप जगाना
- यह दिल कांटों को बिस्तर है
- ये बंधे नोटों का बंडल
- जिगर है चाक धरती का
- अब उठो उठो इक बार
- यह दुनिया बुरी है
- ग़ज़ल: यह जवानी ढूंढती रह गई हयाते जाविंदा
- ग़ज़ल: ग़मे हयात में डूबा हुआ वो जाम न हो
- ग़ज़ल: दिललगी भी चाहिए इस जिंदगी के वास्ते
- ग़ज़ल: नहीं होता जिसे एहसास औरों की मुसीबत का
- ग़ज़ल: गिरती रही बिजली जलते रहे काशाने
- ग़ज़ल: मस्जिद में हम तो जाके कह देंगे यह खुदा को
- ग़ज़ल: अफसुर्दा शब को सलाम देकर सुबह हुई तो करा रहे हैं
- ग़ज़ल: यही है शोर पहलू में यही हंगामा आराई
- ग़ज़ल: नज़र नज़र से मिलने की बात जाने दो
- ग़ज़ल: तुम्हारा जब कभी महफिल में नाम आता है
- ग़ज़ल: न बनी बात तो फिर और भी मुश्किल होगी
- ग़ज़ल: अब के जब ये दीदा ए तर हो गया
- ग़ज़ल: कुछ गुनाहों स्वाब में गुज़री
- अंतिम ग़ज़ल: तमाम उम्र तुम्हारा ही बंदगी की है
