Gurdeep Singh Sohal | गुरदीप सिंह सोहल
गुरदीप सिंह सोहल सुपुत्र सः तारा सिंह सोहल (जन्म: 25 सितम्बर 1959)। आप सार्वजनिक निर्माण विभाग, सर्वे अनुसंधान एवं गुण नियन्त्रण खण्ड, हनुमानगढ़ जंक्शन (राजस्थान) से सहायक प्रशासनिक अधिकारी के पद से 30 सितम्बर 2019 को सेवानिवृत्त हुए। वर्तमान निवास: श्री गंगानगर रोड, हनुमानगढ़ जंक्शन (राजस्थान)। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं के प्रकाशन तथा आकाशवाणी सूरतगढ़ से प्रसारण के साथ-साथ राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर के आर्थिक सहयोग से 1995 में कहानी संग्रह 'बंद घड़ी की मौत' का प्रकाशन हुआ। 2007 में हास्य नाटक संग्रह 'घर बसाने की तमन्ना' प्रकाशित हुई। वर्तमान में गुरुबानी कीर्तन सेवा में समर्पित हैं।
गुरदीप सिंह सोहल की कविताएँ
Hindi Poetry : Gurdeep Singh Sohal
- कदम कदम पे जंग लड़ी
- आज नकद कल उधार चलेगा
- गैस उड़ रही है तेल जल रहा है
- गऊ सड़क पे चरती है
- पीठ पीछे लौटता है कोई
- चलो हरि के द्वार चलें
- घर बचाना है तो बेटी बचा लो
- लिख दिया इतिहास धर्म का
- दस्तार पहन ले सरदार बन जा
- कैसे राज करेगा खालसा
- कोई न सुने अगर बात तुम्हारी
- जमीन वर का भाई होती है
- ऊपरवाला सब देखता है
- पानी में रहना है तो बेगारी कर
- ज्यों ज्यों उम्र बढ़ रही है
- कोई न सुने अगर बात तुम्हारी
- आलू है गोभी है या प्याज है
- जो भी मिले उसे पका लीजिए
- बच्चे का बैग भारी हो रहा है
- कुछ जान ले अगर हार होती है
