फ़रहत अब्बास शाह | Farhat Abbas Shah
फ़रहत अब्बास शाह (1964-) लाहौर, पंजाब (पाकिस्तान) के रहने वाले उर्दू और पंजाबी भाषा के प्रसिद्ध लेखक और कवि हैं। पेशे से वे पत्रकार (सहाफ़ी) और टीवी एंकर हैं। इसके अलावा उन्होंने मार्शल आर्ट विशेषज्ञ के रूप में भी कार्य किया है और वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त की है।
हिन्दी ग़ज़लें : फ़रहत अब्बास शाह
- आग हो तो जलने मे देर कितनी लगती है
- इक यही रौशनी रौशनी इम्कान में है
- इसी से होता है जाहिर
- एक क़तरा मलाल भी बोया नहीं गया
- कभी सहर तो कभी शाम ले गया मुझ से
- कहाँ मैं कहाँ हो तुम
- ख़ुश्बू सा बदन याद न साँसों की हवा याद
- गर दुआ भी कोई चीज़ है तो दुआ के हवाले किया
- ग़म का मारा कभी न हो कोई
- ज़िंदगी के बहुत मसाइल हैं
- तुम्ारे ख़्वाब मिरे साथ साथ चलते हैं
- तू अपने होने का हर इक निशाँ सँभाल के मिल
- तू ने देखा है कभी एक नज़र शाम के बा'द
- दिल भी आवारा नज़र आवारा
- दिल में इक शाम सी उतारती है
- फूल की सुख की सबा की ज़िंदगी
- मौत का वक़्त गुज़र जाएगा
- ये जो ज़िंदगी है ये कौन है
- सफ़र के लाख हीले हैं
- समय जैसे गुजरता जा रहा है
- हिज्र की रात छोड़ जाती है
- अशआर
