Dr. Amarjit Tanda
डॉ. अमरजीत टांडा

डॉ. अमरजीत टांडा (जन्म १० फरवरी १९५३ -) कीट-विज्ञानी, कवि और समाज सेवक हैं। उनका जन्म ज़िला जालंधर में नकोदर नज़दीक ढेरियाँ गाँव में हुआ। उन्होंने कृषि यूनिवर्सिटी लुधियाना से जीव विज्ञान के विषय में ऐम. ऐससी. की और १९८३ में इसी विषय में ही पी. ऐच. डी. की। वह कृषि यूनिवर्सिटी में १५ साल अध्यापक रहे। और फिर आस्ट्रेलिया प्रवास कर गए। जहाँ उन्होंने सिडनी में टांडा पेस्ट कंट्रोल नाम की कंपनी बनाई और साथ ही रियल अस्टेट का कारोबार भी शुरू कर लिया। उन की रचनायें हैं: थके हुए, हवायों के रुख 1978, लिखतुम नीली बंसुरी 1998, कोरे कागज पे नीले दस्तखत 2001, दीवा सफियां दा 2002, नीले कोरे वर्के 2004, सुलगते हरफ. 2007, कवितांजली 2018, शबदांमनी 2018, नीला सूखा समंदर 2018 उपन्यास, आम लोग 2018 उपन्यास, मेरे हिस्से का पंजाब 2018 उपन्यास।