दिनेश श्रीवास्तव "दानिश" | Dinesh Srivastav Danish
- पिता: स्व० भगवान प्रसाद श्रीवास्तव
- पता: शिवाजी नगर कालोनी, तीसरी गली, हीरापट्टी, आजमगढ़ (उत्तर प्रदेश) - 276001
- शिक्षा: परास्नातक (अंग्रेजी)
- जीविका: सेवानिवृत्त बैंक प्रबंधक
- प्रकाशित कृतियाँ: 1. हद-ए-अमल से आगे लिखूँगा (ग़ज़ल संग्रह) | 2. फ़ज़ा-ए-हस्ती (ग़ज़ल संग्रह)
- गतिविधियाँ व सम्मान: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर हिंदी सेमिनार में सहभागिता तथा विभिन्न साहित्यिक सम्मान प्राप्त। (हिंदी महाकाव्य प्रकाशनाधीन)
हद-ए-अमल से आगे लिखूँगा
Had-e-Amal Se Aage Likhunga : Dinesh Srivastav "Danish"
- मिरा अज़ीज़ मुहब्बत जताना चाहता है
- लगी है होड़ अपनों में हमारा नाम क्या होगा
- तर्ज़े अंदाज़ ही दिलकश शरीर होते हैं
- मुख़ालफ़त से जो आग़ाज़े-रोज़े-बद होगा
- थी शुआए नज़्र हिचक रही इन्हीं हरकतों ने अयाँ किया
- मेरे मोहसिन मेरी रानाइयों से कुफ़्र न कर
- कुछ तवारीख़ की सुन ख़ुद पे इसरार न कर
- कभी चट्टान से लड़ने को था खड़ा रहता
- कोई कहता है क़िस्से को छलावा
- बड़ी तमीज़ से तक़ल्लुफ़ का खेल जारी है
- मेरी दुखती हुई रग पर कोई जब हाथ रखता है
- तिरे अल्फ़ाज़ मेरे रूबरू होते क्यों हैं
- हज़ार किस्से तेरी फ़ज़ल के फज़ाँ में उसका असर न देखा
