भालचंद्र नेमाडे (जन्म-१९३८) प्रसिद्ध भारतीय मराठी लेखक, उपन्यासकार, कवि, समीक्षक तथा शिक्षाविद हैं। १९६३ में केवल २५ वर्ष की आयु में प्रकाशित 'कोसला' नामक उपन्यास से उन्हें अपार सफलता मिली। उनकी प्रमुख कृतियों में 'कोसला' और 'हिंदू - जगण्याची समृद्ध अडगळ' शामिल हैं। उनके साहित्य में 'देशीवाद' (स्वदेशीकरण) पर विशेष बल दिया गया है। वह ६० के दशक के लघु पत्रिका आंदोलन के प्रमुख हस्ताक्षर थे।
Bhalchandra Nemade (born 1938) is an eminent Marathi novelist, poet, critic, and academician. He gained immense acclaim with his debut novel Kosla in 1963. Known for introducing Nativism (Deshivad) to Indian literary criticism, his landmark works include Kosla, Hindu, Meldy, and Dekhani. He was honored with the Sahitya Akademi Award in 1990, the Padma Shri in 2011, and the prestigious Jnanpith Award for 2014.
प्रमुख कृतियाँ:
• उपन्यास: कोसला, बिढार, हूल, जारीला, झूल, हिंदू – जगण्याची समृद्ध अडगळ
• काव्य: मेलडी, देखणी
• आलोचना: टीकास्वयंवर, साहित्याची भाषा, तुकाराम, Nativism (Deshivad)
प्रमुख पुरस्कार एवं सम्मान:
• १९९० - साहित्य अकादमी पुरस्कार ('टीकास्वयंवर' के लिए)
• २०११ - पद्मश्री सम्मान
• २०१३ - जनस्थान पुरस्कार (कुसुमाग्रज प्रतिष्ठान)
• २०१४ - ५०वाँ ज्ञानपीठ पुरस्कार