देशभक्ति गीत : तारकेश्वरी 'सुधि'

Deshbhakti Geet : Tarkeshwari Sudhi


भारत का है मान तिरंगा

भारत का है मान तिरंगा, हम सबकी है जान तिरंगा। तेरी मेरी, इसकी, उसकी, इज्जत है, सम्मान तिरंगा। चाहे कितनी पोथी पढ़ लें, या अनपढता हावी हम पर। रहते हैं हम किसी सहारे, या जिंदा हैं अपने दम पर। उर को ये ही देता खुशियाँ, देता है नवगान तिरंगा। भारत......... मात्र नही हैं तीन पट्टियाँ, न कोई कपड़े का टुकड़ा। इसके दम से ऊँचा मस्तक, मुस्काता हम सब का मुखड़ा। जग के हर कोने में अपनी, सिर्फ यही पहचान तिरंगा। भारत...... ये ही साँसों की आजादी, ये ही बातों की आजादी चाहे कोई छोटा- मोटा, या हो बहुत बड़ा फरियादी। एक नज़र से सबको देखे, रहता सीना तान तिरंगा। भारत......

भारत माता के शीश सजा

भारत माता के शीश सजा, मैं मुकुट अतुल कश्मीर सखे! सुन्दरता से परिपूरन हूँ, गौरवमय मेरी गाथा है । ऋषि कश्यप के ही चरणों में, झुकता बस मेरा माथा है । जो सबके दिल में सजता है, उन सपनों की ताबीर सखे! भारत माता के शीश सजा, मैं मुकुट अतुल कश्मीर सखे! हूँ आज लहू से मैं लथपथ, पीड़ा बहती है आँसू बन । हर रोज तड़पता बेबस -सा जलता रहता अग्नि में तन । जकडें रहती है मुझको तो, ये आतंकी जंजीर सखे! भारत माता के शीश सजा, मैं मुकुट अतुल कश्मीर सखे! बेशक मैं आज सिसकता हूँ, कल फिर परचम लहराऊँगा । आतंकी आग बुझेगी जब, मैं खुशियाँ ही बरसाऊँगा । सींचे जो सपनों की बगिया ऐसी अँखियों का नीर सखे! भारत माता के शीश सजा, मैं मुकुट अतुल कश्मीर सखे!

आन -बान पर मिटने वाले

आन -बान पर मिटने वाले, वीरों की यह धरती न्यारी । मुझको धरती राजस्थानी, लगती है प्राणों से प्यारी । कुंभा साँगा थे बलशैली, मेवाड़ी धरती पर जन्मे । भामाशाह से दानी दाता, बच्चा-बच्चा गाता नग्मे । स्वामी भक्त था दुर्गा जिसने, साँस वतन पर अपनी वारी । मुझको धरती राजस्थानी, लगती हे प्राणों से प्यारी । वीर प्रताप हमीर जहाँ पर, देश धर्म पर मिटने वाले । मालदेव से वीर लड़ाकू, हरदम रण में डटने वाले । विजय पताका थी फहराई, सबने अपनी अपनी बारी । मुझको धरती राजस्थानी, लगती है प्राणों से प्यारी । कुछ नामों से यह मत सोचो मेरा जिक्र यहाँ है पूरा । कितने ही गौरा -बादल बिन, यह मेरा है गीत अधूरा । मिटने को इस पर साँसें हैं हरदम ही तैयार हमारी । मुझको धरती राजस्थानी, लगती है प्राणों से प्यारी ।

वीर सिपाही चलो निरन्तर

वीर सिपाही चलो निरन्तर। तनिक दूर ही अब मंजिल है। बाधाएँ रोके कदमों को, भाव ह्रदय को तोल रहे हैं। नैन सजल होते हैं प्रतिपल, रुक जा ! लम्हें बोल रहे हैं। मुड़कर अब मत देखो राही, देखा भी तो क्या हासिल है? वीर सिपाही...... हिम्मत रखकर कदम बढाना, वक़्त खुशी का आने वाला । आज अधीर नहीं होना है, लौट गया पल जाने वाला। खुद पर रख विश्वास, सोच यह, तू सक्षम है तू काबिल है। वीर सिपाही...... बाधाएँ आएँगी प्रतिपल, तोड़ मनोबल यूँ मत अपना। आज वक़्त के साथ चले तो, पूरा हो जाए हर सपना। देख खड़ा बाँहे फैलाकर, तेरी ही खातिर हर दिल है। वीर सिपाही........

आओ भारत को करें नमन

आओ भारत को करें नमन, सुंदर सा मधुवन बने वतन। बहता नदियों में पावन जल, मिट जाता सब पापों का फल । पर्वत का हिम भी पिघल -पिघल, झरनों में बहता है कल - कल। लहराते सुन्दर इसके वन, आओ भारत को करें नमन। होते हैं गुंजित मंत्र जहाँ, मिल पाए ऐसा देश कहाँ ? कैसे तम टिक पाए पल भर, रातों जलते जब दीप यहाँ । मन पाक अयोध्या वृंदावन। आओ भारत को करें नमन। मिलती है वेद ऋचा पावन, रामायण गीता मनभावन । मंत्रों से हो शोधित जीवन, बिरहन के गीतों में सावन। हर ह्रदय भरा है अपनापन, आओ भारत को करें नमन । बड़, नीम कहीं केला, पीपल करते हम पेड़ों का वंदन। तुलसी का वास रहे आँगन, माथे पर सजता है चन्दन। खुशबू फैलाता हर उपवन, आओ भारत को करें नमन। चरक, कणाद, कहीं जीवक, वैज्ञानिक ज्ञान दिया सबने। परचम फैलाया दुनिया में, अभिमान कभी न किया हमने। आँखों में स्वप्न भरें नूतन।आओ भारत को करें नमन

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