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ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद
Khwaja Ghulam Farid
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Kafian Khwaja Ghulam Farid in Hindi

काफ़ियां ख़्वाजा ग़ुलाम फ़रीद

201. साडे नाल सदा तूं वस्स प्या

साडे नाल सदा तूं वस्स प्या ।वस हस्स रस्स दिल खस्स प्या ।
सिर विच दरद, दिमाग़ खुमारी ।तुनले रतड़े हंजड़ू जारी ।
जीड़े झोरा दिल आज़ारी ।तन सूलां दे वस प्या ।
बेपत दी बेपतड़ी यारी ।ज़ुलम अंधारी बे नरवारी ।
पहलों लुट ल्यु दिल सारी ।पिछे चोरी नस प्या ।
हजर सवा कोई सूद न पायम ।चोटियां खुत्तम हाल वजायम ।
मिनतां कीतम सीस नवायम ।नक घरड़ेंदी घस्स प्या ।
पेश कीता जैं फ़हम फ़िकर कूं ।लैत लाअल दी इरखिर कूं ।
कर कर शुकर न डितरस सिर कूं ।इशक दी राह विच भस्स प्या ।
लाने फोग फ़रीद सो हेसां ।सट घर बार ते बार वसेसां ।
करड़ी ते वंज झोकां लैसां ।अज्ज कल टोभा वस्स प्या ।

202. साडी वल फेर डे

साडी वल फेर डे ।जिवें खस्स नीती क्युं चा काबू कीती ।
डोह वराईं वैन अलेंदीं ।डेखन सेती तरेड़ी पैंदी ।
डे डर के रत्त पीती ।
वैर न ल्हैना हावी माही ।खस्स कर ज़ोरे दिल बेवाही ।
सांग डुक्खां दे सीती ।
तूने लगड़ी हो हो फकड़ी ।दिल्लड़ी तक्कड़ी दरदीं पकड़ी ।
तोड़ पुचा जो नीती ।
नाहीं मुड़न मनासब थक्क थक्क ।जे सर डेसीं है पक्क बेशक्क ।
बिरहों दी बाज़ी जीती ।
आया वकत फ़रीद मिलन दा ।भुरल जानी यार सज्जन दा ।
रैन ग़मां दी बीती ।

203. सै सै सूल स्यापे

सै सै सूल स्यापे ।डुखड़ा नेहड़ा लायम ।
तौं बिन घर वर वे ।हां दा शाड़ा वे ।
सीने लख लख कांपे ।वेढ़ा खावन आइम।
पल पल दिल नूं वे ।पोर पुनल दे वे ।
वल आवे तां जापे ।दरदी मार मंझायम ।
यार दिलेंदे वे ।पीत न पाली वे ।
कैनूं डेवां डोड़ापे ।यारी तरोड़ सिधायम ।
किवें दिलदा वे ।हाल सुणावा वे ।
लोक सभे डोचापे ।सखती सखत सतायम ।
यार अवैड़े वे ।तोड़ न नीती वे ।
जी जुख जुख परतापे ।मुफती जान गंवायम ।
सिक साजन दी वे ।रहन ना डेंदी वे ।
जैं संग दिलड़ी अड़ा ।जैंदे नाज़ मुसायम ।
अंगन फ़रीद दे वे ।सावल औसी वे ।
करम करेसम आपे ।तांघीं आस वधायम।

204. सखी कर ल्यु हार सिंगार सखी

सखी कर ल्यु हार सिंगार सखी ।सई्ईआं रल मिल धूम मचाई ।
गरजत बदरा लसकत बिजली ।रुत्त सांवन ठीक सुहाई ।
अगन पपीहे करन बलारे ।रस कोइल कूक सुणाई ।
मुलक मल्हेर वसायम मौला ।सभ गुल फुल ख़ुनकी चाई ।
रल मिल सई्ईआं डेवन मुबारक ।मुद भाग सुहाग दी आई ।
मुद्दतां पिछे रांझन मिल्या ।रब्ब उज्जड़ी झोक वसाई ।
आकर कान्ह दवारे दिल दे ।सुध बंसी परम बजाई ।
समंज फ़रीद न कर दिल मुंझ ।कुल लाज पए गल पाई ।

205. सजन सधाए वे मियां साथ वसन

सजन सधाए वे मियां साथ वसन ।शाला जीवन मुहब मिट्ठल मतवारे ।
सुंज बर रुलदी वलवल भुलदी ।डिस्सम न चांगे चारे ।
जलदी गलदी हथड़े मलदी ।छड्ड गए होत प्यारे ।
डुक्खदी जुखदी मारी लुखदी ।थी ककड़ांद अंगारे ।
मंगां दुआई संज सबाहीं ।आविम वसल दे वारे ।
सट्ट बेवाही थी ग्या राही ।दिल्लड़ी पारे पारे ।
छहदी झोकां सहन्दी टोकां ।कनड़ी पौविम तवारे ।
यार पुन्नल दी सिक्क पल पल दी ।रोज़ अज़ल दी कारे ।
बिरहों भंवाली उलटी चाली ।सुख बोड़े डुक्ख तारे ।
सोज़ फ़रीद नूं रोज़ सवाया ।लूं लूं लक्ख चंगारे ।

206. सजन तौं बिन न थीसां मैं

सजन तौं बिन न थीसां मैं ।घड़ी क्या पल न जीसां मैं ।
ग्या सूलां अन्दर सिर गल ।सभो मुशकल थीउसे हल ।
सस्सी सोहनी अते मोमल ।उन्हां विच्च पई गिणेसां मैं ।
नितो नित टेक डिखलावे ।करे वायदे ते न आवे ।
जे आए आए नाता खट्ट खावे ।ना वल ससती मनीशां मैं ।
न सड्ड वैंदे न आदा है ।डेहों डेंह रूह मांदा है ।
तत्ता जीवन न भांदा है ।हलाहल झोल पीसां मैं ।
कई डुक्खड़ीं तों बच बुच गईआं ।कई दर नाल रच रुच गईआं ।
कई सिक सांग मच मुच गईआं ।करां कैं नाल रीसां मैं ।
फ़रीद आया न माही वल ।डित्ती सूलां न साही वल ।
प्या डुक्ख डूर फाही वल ।अझों अज कल हरीसां मैं ।

207. समझ फरीदा बिरहों बहूं सर जोर

समझ फरीदा बिरहों बहूं सर जोर ।
अक्खियां उबलियां दिलड़ियां उकलियां ।सीने पए शर शोर ।
गमज़े राहज़न मुलक मरीले ।नाज़-ए-निगाह है चूर ।
लोर सिरां विच डोर कन्नां विच ।रोंदी अक्खियां कोर ।
लाकर यारी करन न कारी ।महज न चाढ़न तोड़ ।
नाज़ नहोरे दिलियां लुट कर ।उलटा थींदे तोर ।
सकड़े छुटड़े सांगे तुरुटड़े ।इशक प्या गल डोर ।
मैं अड़ चुकड़ी पेच डुखां विच ।शाला न फासिन होर ।

208. समंझ, संजानी गैर न जाणी

समंझ, संजानी गैर न जानी ।सभ सूरत है ऐन ज़हूर ।
रक्ख तसदीक न थी अवारा ।काअबा, किबला, दैर, दुवारा ।
मसजद मन्दर, हिकड़ो नूर ।
हुसन अज़ल थिया फाश मुबियान ।हर हर घाटी वादी ऐमन ।
हर हर पत्थर है कोह तूर ।
थीए ज़ाहर इसरार कदीमी ।हर हर शाख है नखल कलीमी ।
ज़ेर, जबर, चप, गसत हज़ूर ।
वीराना आबाद डिसीजे ।जंगल बेला शाद डिसीजे ।
दोजख नजरम हूर कसूर ।
आरी फिरदे हज, ज़कवातों ।सौम सलवातों ज़ात सिफातों ।
रिन्द अलसतों हन मखमूर ।
कशफ-ए हकायक महज़ महाले ।जे तैं मुरशद नज़र न भाले ।
ब्यु कुल, कूड़, फरेब ते ज़ूर ।
फिका, उसूल, कलाम, मआनी ।मंतक, नहव ते सरफ मबानी ।
ठप रख है तौहीद गयूर ।
मुला पुठड़े मानी करदे ।आयत दरस हदीस खबर दे ।
सिरफ सदा ते थीए मग़रूर ।
मुल्लां वैरी सखत डिसेंदे ।बेशक हन उसताद दिलेंदे ।
इबनुल अरबी ते मनसूर ।
शाहद, वाहद, असल फरय विच ।राज़ तरीकत रसम शरा विच ।
है मशहूद नहीं मसतूर ।
बठ घत रीत रवश तकलीदी ।राह तहकीकी सलक फरीदी ।
कर मनज़ूर ते थी मसरूर ।

209. सांवल पुनल वल घर डो सधाया

सांवल पुनल वल घर डो सधाया ।तन मुंझ मार्या सर सूल ताया ।
डूंगर ड्रावन दुखड़े सतावन ।डैनड़ी बलाईं कर टोल आवन ।
बन ढोल सुकड़े सौड़े न भावन ।घर बार डिसदा सारा पराया ।
मुठड़ी मोई नूं खुशियां न फुलड़ियां ।डोड़े डोड़ापे तांघां अवलड़ियां ।
जानी अवैड़ा पत्तियां कललड़ियां ।है है अड़ाया अक्खियां अजाया ।
तोहफे डुखां दे ग़म दियां सुगातां ।कीचे सीस डोआईआं बरातां ।
बिरहो बरातां औखड़ियां घातां ।जीड़ा नहेड़े नेड़ा ना भाया ।
गुजरे वहाठड़े जोबन दे माठड़े ।सेहरे कुमाठड़े उजड़े टिकाने ।
झुरदी झुराठड़े ढोलन न जानड़े ।दिलड़ी मुसाया बे वस रुलाया ।
आसां उमीदां साड़ियां तजालियां ।असलों बरोचल पीतां न पालियां ।
मारू मेहर दियां दीदां न भालियां ।आइम फरीदा सखती दा साया ।

210. सपाहीड़ा न मार नैणां दे तीर

सपाहीड़ा न मार नैणां दे तीर ।
पलपल फलड़े चुभन कुललड़े ।तन मन सीस सरीर ।
गूड़ियां अखियां रत दियां बुखियां ।ज़ुलफ स्याह बे पीर ।
कजला जंगी, ज़ालम ज़ंगी ।कोहदा बे तकसीर ।
नेशे डुखेंदे रीश डुखीदे ।रग रग लख लख सीड़ ।
सेंगियां सुरतियां खेड़े वरतियां ।वैरी मा प्यो वीर ।
बिगड़ियां तांघां उजड़ियां मांघां ।वारू वसम मल्हेर ।
यार कुराड़ा धूता पाड़ा ।क्या कीजे तदबीर ।
जिन्दड़ी चुभदी नोक ग़ज़ब दी ।दिल ग़म दी जागीर ।
उमर फ़रीद निभायम रोंदीं ।मथड़े दी तहरीर ।

211. सारी उमर गुज़ारिअम गड्ड साईं

सारी उमर गुज़ारिअम गड्ड साईं ।हुन होत पुनल ग्युम लड्ड साईं ।
ना कल यार सजन दी ।ना रह गई जोह जतन दी ।
ना तिड़ ताड़े मड्ड साईं ।
थल मारू दियां पट्टियां ।डंगर औखियां घटियां ।
अपड़म तोड़ न सड्ड साईं ।
सख़त अवैड़े पैंडे ।रड़दे रिच्छ ते गैंडे ।
उट्ठ गई आस तो तड्ड साईं ।
बांदर राखस घाटे ।खुड़बुन खूब गबाटे ।
कदम कदम ते खड्ड साईं ।
दरद फ़रीद सतावे ।अग्ग लावे भुन्न खावे ।
पट पट मास ते हड्ड साईं ।

212. सस्सी करहो कतार

सस्सी करहो कतार ।केच डहों हण हण वे ।
झाग जबल थल बार ।नाल पुन्नल बण तण वे ।
पल्लड़े डोह गुनाह न मैडे वे ।है वे बरोचल यार मुफ़त कीतो अण बण वे ।
हक्क कल्हड़ी पई पीत कललड़ी वे ।रोवां ज़ारो ज़ार ला गलड़े वण वण वे ।
नैं बारी ते टांग उभारी वे ।रात अंधार गुबार झड़ मींह दी कण कण वे ।
केडे कज्जल मसाग ग्युसे वे ।केडे हार शिंगार गहने दी घण घण वे ।
दिल्लड़ी चुसत न थीवीं फलड़ी वे ।मतलब हई दीदार मोईं जींदीं तण तण वे ।
रहबर शौक शफीक सुजेंदा वे ।जलदी मोड़ मुहार परीं दूं खण खण वे ।
बिरहों फ़रीद है बोझा कोझा वे ।बेशक बारी बार रत्ती मण मण वे ।

213. सट सांवल सजन सधाया

सट सांवल सजन सधाया ।सर सुंजड़े सूल सताया ।
तपड़ी कलहड़ी तपड़ी मलड़ी ।सांग हिजर दी रलड़ी ।
जिन्दड़ी जलड़ी दिलड़ी गलड़ी ।लगड़ी अग्ग कुललड़ी ।
पीड़ अवलड़्ड़ी नियड़े घलड़ी ।पलपल पूर पराया ।
परबत रोले जखड़ झोले ।ग़म दे सांग संगोले ।
सोज़ समोले यारन कोले ।जीड़ा जल बल कोले ।
सख़ती गोले सुझम न ओले ।दम दम रोग सवाया ।
नै बारी मनतारी हारी ।कारी मूंझ मुंझारी ।
दरदां मारी करम न कारी ।उलटा तरोड़म यारी ।
अंग अज़ारी अक्खियां जारी ।जो लिख्या सो पाया ।
डुंगर काले पैरीं छाले ।ततड़ी वाक्या घाले ।
अक्खां नाले सोज़ पजाले ।ज़खम जिगर दे आले ।
प्रीत न पाले करदे चाले ।फिकर फराक मुंझाया ।
खुशियां खस्सदा भेत न डसदा ।वल वल ढोलन नस्सदा ।
नेड़े वस्सदा सब कोई हस्सदा ।झेड़ा झगड़ा सस्सदा ।
डोरा डुखड़ा जी बेवस्स दा ।दिलड़ी मुफत अड़ाया ।
रोह सनेड़े राह अवैड़े ।वस्सदा यार परेड़े ।
अंमड़ी झेड़े वीर नहेड़े ।सस्स नणान करेड़े ।
आ वड़ वेड़े छोड़ बखेड़े ।सट्ट घत शोर अजाया ।
निकलन आंही संझ सबाहीं ।बिरहों दुखे दा भाही ।
लगड़ियां चारीं सुझन न वाही ।रुलदी बेले काहीं ।
सुंजड़ियां झोकां उजड़ियां जाही ।यार फ़रीद न आया ।

214. सट सिक गैर खुदा दी

सट सिक गैर खुदा दी ।सब शै वहम ख्याल ।
किथ लैला किथ मजनूं ।कथ सोहनी महींवाल ।
किथ रांझन किथ खेड़े ।किथ है हीर स्याल ।
किथ ससी किथ पुनूं ।किथ ओ दरद कशाल ।
किथ सैफल किथ परियां ।किथ ओ हिजर वसाल ।
बाझों अहद हकीकी ।कुल शै ऐन ज़वाल ।
चार डेहारे चेतर दे ।कुडे बकरवाल ।
मा खला अल्ला बातल ।बेहक कूड़ पपाल ।
यार फरीद न विसरिम ।मुशकल महज़ महाल ।

215. सौन सगून सुहांदा है

सौन सगून सुहांदा है ।मतां सांवल असां वल आंदा है ।
फाल वसाल दी करे चबोले ।लाली लिवे ते कांगा बोले ।
सहजों अंग न मानोम चोले ।सेझ हस्से घर भांदा है ।
सोज़ अन्दोह थए आज़ारी ।सूल करेंदे नाला ज़ारी ।
हजर डहाग नूं मूंझ मुंझारी ।दरद अलम ग़म खांदा है ।
आस उमीद नवीद है शादी ।ईद सईद मुबारकबादी ।
राहत हर दम वाधो वाधी ।सुख सुखड़ा डुक्ख मांदा है ।
लानी फोग फुलारी वाह वाह ! कंडड़ी करड़ सिंगारी वाह वाह !
चनड़की घंड तवारे वाह वाह ! झोकां माल न मांदा है ।
ग्या फ़रीद डुहाग दा वेल्हा ।सेहन सुहेला घर अलबेला ।
आपे दिलबर कीतम मेला ।जैं बिन जी तड़फांदा है ।

216. सावन बून्दड़ियां झरलावे

सावन बून्दड़ियां झरलावे ।
कूक कूक पापी ते पपीहा ।फूख फूक तन आग जगावे ।
कोइल कूंज मुहरवा बोले ।दिल दुख्यारी नूं डुख़्ख़ तावे ।
नैन चैन से झगड़त झगड़त ।तड़फत तड़फत रैन बहावे ।
छत्तियां धड़कत जियड़ा लरजत ।तुज बिन कारी घटन ड्रावे ।
रुम झुम रुत बरख़ा सोहे ।अंग अंग रस रांद रचावे ।
बीत गए दिन रैन डुक्खां दे ।कहो री पिया के सेझ सुहावे ।
पीतम पीत फ़रीद न पाली ।अंग अंग बरहन मुरझावे ।

217. सावन मेंघ मल्हारां

सावन मेंघ मल्हारां ।तरस पौवी पुन्नल आ मोड़ महारां ।
हंजड़ू हारां वाट नेहारां ।बैठी कांग उडारां ।
सज्जड़ियां रातीं पावां फालां ।डेंहां ढाले मारां ।
तौं बिन केच शहर दा वाली ।औखी उमर गुज़ारां ।
रोज अज़ल दियां लधिअ्अम लावां ।हुन क्युं करदी आरां ।
सुंजड़ीं टिबड़ीं दिल्लड़ी मोही ।विसरे शहर बज़ारां ।
मुलक मल्हेर वासायम मूला ।थियां चौ गुट्ठ बहारां ।
थल चतरांग डस्सीजन नदियां ।रिम्म झिम्म लासूं तारां ।
नीलियां पीलियां रत्तियां पींघां ।मछली सहंस हज़ारां ।
सुरख करेंह ते चिट्टड़ियां बोटियां ।सावियां लाणियां ख़ारां ।
जोफड़ जोफड़ घुमकन मट्टियां ।सोंहदियां घुंड तवारां ।
गाईं बकरियां भेडां चांगै ।चरदे जोड़ कतारां ।
यार फ़रीद मिलम दिल भादा ।मैले वेस उतारां ।

218. सीना महज़ लवीरां

सीना महज़ लवीरां ।दिल्लड़ी धईआ धईआ ।
रो रो उज्जड़ियां अक्खियां सुज्जड़ियां ।चोली चुन्नड़ी लीरां ।
खिलदियां संगियां सईआं ।
इशक बुराई जोड़ कराई ।लूं लूं लक्ख लक्ख पीड़ां ।
वस्स सूली दे पईआं ।
दरद अन्दर विच्च सोज़ जिग़र विच्च ।अक्खियां नीर वहीरां ।
मूं सिर भुसड़ छईआं ।
नीड़े वेड़म सख़त नहेड़म ।चुट्टड़ी हिजर दे तीरां ।
यो खुशियां किन गईआं ।
खोट कमावन कूड़ अलावन ।कूड़ियां डेवम धीरां ।
छड्ड दे सावल बईआं ।
बिरहों भंवाली डेख फ़रीदा ।सै सस्सियां लक्ख हीरां ।
रुलदियां बूटे लईआं ।

219. सेज सुहायम बेली

सेज सुहायम बेली ।सिकदी बांह चूड़ेली ।
यार न मिलदा आलम खिलदा ।हाल अवल्लड़ा औखड़े दिल दा ।
सुंज बर सेहन हवेली ।
बुलबुल भंवरे ख़ुशियां पाविन ।रल मिल दोसत बसंत सुहाविन ।
आई रुत अलबेली ।
खिड़ के सी स्याले बीते ।सौंगीं जेवर तरेवर कीते ।
हक्क मैं महज़ डुहेली ।
पीत परींदी सिक्क मित्तरां दी ।सीने सौ सौ सांग डुक्खां दी ।
सेंध धड़ी थई मेली ।
कज्जले बादल मींह बरसातीं ।गाजां खमणियां कालियां रातीं ।
रुलदे रोह इकेली ।
नाज़ नवाज़ दे वकत वेहाने ।फुल गुल हार सिंगार कमाने ।
बठ रावेल चम्बेली ।
यार फ़रीद न आइम वेढ़े ।उज्जड़े गाने गहने सेहरे ।
फिरदी मैल कुचैली ।

220. शहु(शाह) रांझा अलबेला

शहु(शाह) रांझा अलबेला ।जोगी जादूगर वे ।
रावल बंसी जोड़ सुणाई ।विस्सर ग्युम घर वर वे ।
यार रंझेटे मुरली वाही ।कर कर पेच हुनर वे ।
अनहद बीन बजा मन मोहस ।रुलदी बूटे झर वे ।
कन्ने कन्ने बुन्दे गल झप माल्हां ।रहन्दे हुसन नगर वे ।
तख़त हज़ारों(हज़ार्युं) रांझन आया ।हीर तत्ती दे घर वे ।
जोगन थीसां ख़ाक रमेसां ।रुलसां शहर बहर वे ।
मा प्यु छोड़ लगी लड़्ड़ तैडे ।सांवल कारी कर वे ।
बाझ परींदे बाझ न काई ।बट्ठ ज़ेवर बट्ठ ज़र वे ।
इतना ज़ुलम मुनासब नाहीं ।रब्ब कोलों कुझ डर वे ।
रांझा जोगी मैं जुग़्यानी ।डित्तड़ी इशक ख़बर वे ।
यार फ़रीद न विसरम हरगिज़ ।सिक्कदी वैसां मर वे ।

221. शहु रांझा अलबेला

शहु रांझा अलबेला ।हैं दिलेंदा ठग्ग वे ।
तैंडे ताने मेहने सिट्ठड़ी ।डेवम सारा जग्ग वे ।
झोक न आवां कैं वल जावां ।हीर तत्ती दी तग्ग वे ।
केडे हार सिंगार ग्युसे ।केडे गए झग्ग मग्ग वे ।
नेड़े जियड़ा जोड़ नेहेड़ेम ।धां किरम रग रग वे ।
सूल अवल्लड़े मूल मुट्ठी दे ।डुक्ख आवन कर वग वे ।
बिरहो लुम्बी जुड़ कर लाई ।लूं लूं धुक्खदी अग्ग वे ।
रोंदी खपदी आतन बहन्दीं ।थई बीमार अलग वे ।
यार फ़रीद न कीतम कारी ।जीवां कैंदे लग वे ।

222. सिख रीत रवश मनसूरी नूं

सिख रीत रवश मनसूरी नूं ।हुन ठप्प रक्ख कनज कदूरी नूं ।
जो कोई इशक मदर्रसे आया ।फ़िका असूल दा फ़िकर उठाया ।
बेशक आरफ़ होकर पाया ।रमज़ हकीकत पूरी नूं ।
जो कोई चाहे इलम हकायक ।राज़ लुटनी कशफ दकायक ।
थीवे अपने आप दा शायक ।सट्ट नज़दीकी दूरी नूं ।
हमा ओसत दे भेद न्यारे ।जानन वहदत दे वणजारे ।
हर हर शै विच्च करन नज़ारे ।असर तजल्ली तूरी नूं ।
बेद अनोखै पंथ अवैड़े ।वेड़ो वस्सदे रखन बखोड़े ।
होर न कोई आप नबेड़े ।आपनी इकी पूरी नूं ।
लुतफ़ अज़ल दा वेला आया ।फ़खर जहां गुर ग्यान सुनाया ।
तबा सलीम फ़रीद दी पाया ।फ़हम लुगात तयूरी नूं ।

223. सिक्क साड़े दिल तांग पजाले

सिक्क साड़े दिल तांग पजाले ।वतन न विसरम रांझन वाले ।
हजर फ़राक दा कोझा किस्सा ।साह मुंझाए ते हां डाले ।
राह अवल्लड़े लक्ख लक्ख वल्लड़े ।डूंगर काले पैरीं छाले ।
दिल्लड़ी जडड़ी डुक्खड़ीं लडड़ी ।केवें होश हवास संभाले ।
जैदीं डेखां झोक सजन दी ।कादर बार ग़मां दे टाले ।
इशक सौगातां मैं वल भेजियां ।दरद अन्देशे रोग कशाले ।
है सोहण्यां दी आदत असलों ।कुड़े पेच फ़रेबी चाले ।
यार फ़रीद न उतरम दिल तों ।लुतफें भाले खवाह न भाले ।

224. सिक सूलीं साड़ीं सारी

सिक सूलीं साड़ीं सारी ।वह इशक दी अवावाड़ी ।
दिल जल बल केरी कोले ।डुक्ख रग रग सोज़ समोले ।
हक्क सीना सौ सौ शुअले ।हन बिरहों ते दोज़ख हाड़ी ।
जैं डेह अक्खीं मैं लातियां ।कुल आस उम्मीदां लाथियां ।
क्या फतकन जेढ़ियां फातियां ।ब्या हर कोई मारे ताड़ी ।
मैं करां तत्ती क्या कारी ।हुन ज़खम पुट्ठे फट्ट कारी ।
गल काती पेट कटारी ।सर बरछी तबर कटारी ।
थ्या वस्स हस्स कोले ओले ।हुन फोल न दिल दे फोले ।
अथ पए जूल्हदे भोले ।गट्ठ सेवां डूं हत पाड़ी ।
मिल मूंह्रीं डोलियां वट्टियां ।गई फ़रहत शादियां हटियां ।
ग़म ख़ुशियां पाड़ों पटियां ।डुक्ख सुख दी बेख उखाड़ी ।
आए लोकां हत बहाने ।कई डेवम मेहनो ताने ।
कई मारन काठियां काने ।है ब्या ब्या ज़ुलम डेहाड़ी ।
सुन यार फ़रीद दियां धाईं ।कर नाज़ व शोख निगाहीं ।
वल आपे सावल सांईं ।है गड़ा कोन फफाड़ी ।

225. सोहणां नहन अकरब डिस्सदा ड़ी

सोहणां नहन अकरब डिस्सदा ड़ी ।साडे नाल न हस्स रस वसदा ड़ी ।
केनूं डुक्ख दी गाल्ह सुणावां ।कल्हड़ी सेझ सुत्ती तड़फावां ।
तारे गिन गिन रात निभावां ।है जी औखा बेवस्सदा ड़ी ।
यार पुन्नल डूं दिल्लड़ी तांगे ।औखे लांघे राह अड़ांगे ।
मुशकल पैंडा मिलन महांगे ।कन्नीं पौविम आवाज़ जरस दा ड़ी ।
कोलें वस्सदा भेत न डस्सदा ।दिल्लड़ी खस्सदा वल वल नस्सदा ।
डेख के हाल एहीं बेकस्सदा ।कर ठाह ठाह दुर दूं हस्सदा ड़ी ।
नाज़क ढंग अजायब वन्नदा ।सांवल ढोले मन मोहन दा ।
मान करां क्या यार सजन दा ओ दिलबर है हर कस्स दा ड़ी ।
ए बेकार फ़रीद निभाया ।लोहे वांग बहूं बे माया ।
फ़खर पए दी सुहबत आया ।थ्या हमसाया पारस दा ड़ी ।

226. सोहने यार बाझों मैडी नहीं सरदी

सोहने यार बाझों मैडी नहीं सरदी ।तांघ आवे वधदी सिक आवे चढ़दी ।
कीता हिजर तैडे मैकूं ज़ारो ज़ारे ।दिल पारे पारे सर धारो धारे ।
मुंझ वाधो वाधे डुक्ख तारे तारे ।रब्ब मेले माही बैठी धां करदी ।
सोहना यार माही कडी पावे फेरा ।शाला पा के फेरा पुच्छे हाल ओ मेरा ।
दिल दरदां मारी डुक्खां लाया देरा ।रातीं आहीं भरदी डेहां सूलां सड़दी ।
पुनूं खान मेरे कीती केच त्यारी ।मैं मिन्नतां करदी तरोड़ी वैंदा यारी ।
कई नहीं चलदी क्या कीजे कारी ।सट बांदी बरदी थीसां बांदी बरदी ।
रो रो फ़रीदा फ़र्याद करसां ।ग़म बाझ उस दे ब्या साह न भरसां ।
जा थीसम मेला जा रुलदी मरसां ।कहीं ला डखाई दिल चोट अन्दर दी ।

227. सोहने यार पुनल दा

सोहने यार पुनल दा ।हर जा ऐन हजूर ।
अव्वल आखर ज़ाहर बातन ।उसदा जान ज़हूर ।
आप बने सुलतान जहां दा ।आप बने मज़दूर ।
थी मुशताक फिरे विच गम दे ।वासल थी महजूर ।
थी माशूक दिलीं लुट नेवें ।जान करे रंजूर ।
गल लांवन वल मार तढ़ावन ।एहो नहीं दसतूर ।
चशमां फ़खरूदीन मिठल दियां ।तन मन कीता चूर ।
घोल घोत मैं फ़खर जहां तूं ।जनत हूर कसूर ।
यार फरीद कूं एवें साड़्यो ।जिवें जल्या कोह तूर ।

228. सोहणियां रमज़ां तेरियां भाउंदियां

सोहणियां रमज़ां तेरियां भाउंदियां ।सानूं गुझ्झड़ी चेटक लाउंदियां ।
चशमां जादू कहर क्यामत ।होश हव्वास भुलाउंदियां ।
अबरू कोस ते मिज़गां कैबर ।ज़ुलमीं चोट चलाउंदियां ।
चढ़न शिकार न मुड़दियां हरगिज़ ।ज़ुलफ़ां सैद फुहाउंदियां ।
चालीं नाज़ दियां दिल नूं मोहदियां ।हुकमीं बिरहों बछाउंदियां ।
तेग़ां तेज़ निगाह दियां हर दम ।लाल लहू विच्च धाउंदियां ।
इशक फ़रीद कई घर गाले ।सहंस पईआं तड़फ़ाउंदियां ।

229. सुबह सादक खां साहबी माणे

सुबह सादक खां साहबी माने ।पा सेहरे गाने गहने ।
सहजों फुलूं सेझ सुहा तूं ।बख़त ते तख़त कूं जोड़ छका तूं ।
आपने मुलक कूं आप वसा तूं ।पट अंग्रेजी थाने ।
सुन इकबाल तैडा पै ड्रदे ।राजे दहशत कर मरदे ।
मीर नवाब थए आ बरदे ।बे ज़र मुफ़त विकाने ।
पीर फ़कीर तैकूं सब चहन्दे ।सूबेदार मुलाज़म रहन्दे ।
गिरदा गिरद कचहरी बहन्दे ।अफ़लातून स्याने ।
फैज तैडे दे जग विच्च किसे ।ज़ालां मरद गए घिन हिसे ।
नींगर तकड़े बुढड़े लिसे ।नंढड़े बाल अयाने ।
ख़ूब हंडाईं जिन्द जवानी ।हर दम कोल वस्सीं दिल जानी ।
यार प्यारा यूसफ़ सानी ।नाज़ तैंडे मन भाने ।
करे फ़रीद हमेश दुआईं ।सांवल जीवें चर जुग ताईं ।
तैडे साडा सोहना साईं ।लगड़े नेंह पुराने ।

230. सुख सोमहन सिधायम

सुख सोमहन सिधायम ।यार न नीतम संग वे ।
सेझ रंगीली सुटिअम पसेली ।धां करम अंग अंग वे ।
निकलन आहीं संज सबाही ।डुक्खड़ीं कीतम तंग वे ।
सज्जन सधाए वल न आए ।वाह कादर दा रंग वे ।
कोल न नीतम ढोल दिलेंदे ।रोही रुल्युम कुरंग वे ।
टल्हअम ना सख़ती ते बदबख़ती ।ग्या नामुस ते नंग वे ।
दरद अवल्लड़े सूल कलल्लड़े ।तन मन दूर चरंग वे ।
रुलदी थल विच्च यार न वल विच्च ।वल्लड़ी लगड़ी जंग वे ।
इशक फ़रीद छका मोईं जींदी ।डे सर मुल न संग वे ।

231. सुन समझड़े ज़ाहेद जाहद तूं

सुन समझड़े ज़ाहेद जाहद तूं ।हन इशक दे ए कलमात अजब ।
है गाल्ह अजब है हाल अजब ।है चाल अजब है घात अजब ।
है ज़ौक अजब है शौक अजब ।है ऐन अजब है बैन अजब ।
है ज़िकर अजब है फ़िकर अजब ।है नफ़ी अजब असबात अजब ।
कुल तांघ तलब मफकूद करन ।सभ सूरत हक्क मसजूद करन ।
थी बाज़ल तरक वजूद करन ।सक सौम सलवात ज़कवात अजब ।
हकमात अजब सुबहात अजब ।दरजात अजब दरकात अजब ।
आयात अजब ताआत अजब ।ताग़ूत ते लात मनात अजब ।
हक जातों सहंस ज़वात अजब ।इसमा अफआल सिफात अजब ।
खुश खिज़र दे फलसफ्यात अजब ।ज़ुलमात ते आब हयात अजब ।
ठप्प फिक असूल अकायद नूं ।रख मिलत इबनुल अरबी दी ।
है दिलड़ी गैरों पाक तेरी ।मिसबाह अजब मसकवात अजब ।
हरकात अजब, सुकनात अजब ।अशग़ाल अजब औकात अजब ।
औराद अजब दावात अजब ।साआत अजब डेह रात अजब ।
ला यदरकहुल अबसार अजब ।लायहज्हा अलशकाल अजब ।
है बहर अजब है लहर अजब ।है नहर अजब कतरात अजब ।
आफ़ात अजब खदशात अजब ।सदमात अजब हसरात अजब ।
वाह जज़बभह मिन जज़बात अजब ।राहात अजब लज़्ज़ात अजब ।
नासूत अजब मलकूत अजब ।जबरूत अजब लाहूत अजब ।
तलबीस अजब तानीस अजब ।तकदीस अजब सतवात अजब ।
अवहाम अजब इबहाम अजब ।ऐलाम अजब इलहाम अजब ।
हमज़ात अजब ख़तरात अजब ।लमहात अजब शतहात अजब ।
है कुरब अजब है बोअद अजब ।है वसल अजब है फसल अजब ।
है कहर हिजाब अकाब अजब ।है लुतफ नजात सबात अजब ।
अबदाल अजब औताद अजब ।अकताब अजब अफराद अजब ।
तहकीक अजब तसदीक अजब ।तकलीद अदूल सकात अजब ।
है कलब अजब है सिर्र अजब ।है नफस अजब है रूह अजब ।
है हरम अजब अहराम अजब ।हजाज अजब इरफ़ात अजब ।
जबरील अजब तनजील अजब ।तरतील अजब तामील अजब ।
है ज़ुहर अजब तफ़सीर अजब ।है बतन ते तावालत अजब ।
है किबर ते फ़खर गरूर अजब ।है नार अजब है नूर अजब ।
है नखल अजब है तूर अजब ।है मूसा ते मीकात अजब ।
आगाज़ अजब अंजाम अजब ।है शाम अजब प्रभात अजब ।
है शमस ते मदालजुल अजब ।है अकस अजब ज़र्रात अजब ।
है तर्हा क्याम कऊद अजब ।है वजा रकू सजूद अजब ।
है शफाय अजब है वतर अजब ।अरकान अजब रकआत अजब ।
नफ़कात अजब सदकात अजब ।खैरात अजब हसनात अजब ।
है दुनिया असल अहाद अजब ।है दीन अलूफ माअत अजब ।
है दोज़ख तबकात अजब ।है जनत सबय सिफात अजब ।
असियान अजब असात अजब ।इबरार ते बाकियात अजब ।
वाललील है रमज़ बतून अजब ।वालकलम अजब है नून अजब ।
वालतैन ते वालज़ैतन अजब ।वालशमश ते वालसिफात अजब ।
मिन ईन अली ईं असत अजब ।मा अल हासल फी अल बीन असत अजब ।
मिन इलम माली अल ऐन असत अजब ।इसरार रमुज़ नुकात अजब ।
घर बार डिसे बर बार असां ।गए विसर सभो कंम कार असां ।
लाचार ते ज़ार नज़ार असां ।वाह डितड़ी बिरहो बरात अजब ।
हक पासों नाज़ नवाज अजब ।पै पासों इजज़ न्याज़ अजब ।
है सोज़ अजब है साज़ अजब ।है घुंड अजब है झात अजब ।
वाह आलम हुसन आबाद अजब ।विच सोहण्यां दा बेदाद अजब ।
लुटी दिलड़ी दी फर्याद अजब ।मुठियां अखियां दी बरसात अजब ।
हर आन अहद्द डों ध्यान धरो ।है बेशक दीन ईमान इहो ।
दिल नाल फ़रीद दा वाअज़ सुनो ।सौ बात दी है हिक बात अजब ।

232. सुन वो सहेली सुघड़ स्याणी

सुन वो सहेली सुघड़ स्यानी ।बिरहों दे पंधड़े सखत बईद ।
ना कल मैकूं तेग़ कज़ा दी ।ना तकदीर दे तीर दग़ा दी ।
कीतोम दोसत दी दीद शहीद ।
जे डेंह भलड़े मितर वी भलड़े ।किसमत जोड़े जोड़ कुललड़े ।
यार शदीद ते बखत अनीद ।
रोवन पिटन कूं समझूं शादी ।सुंजी बर झर, झंग डिसम आबादी ।
इशरा महरम साडड़ी ईद ।
सौ सौ छांगां लख लख छेड़ू ।वुठड़े दी वौह डेवन पंधेड़ू ।
रोही थई आबाद जदीद ।
जिन्द असीरे जोर व जफा दी ।दिलड़ी कैदी करब व बला दी ।
डिसम रकीब यज़ीद पलीद ।
सट खिरका भट घत सजादा ।जामा जां सू पाक ब बादा ।
करदमी पीर मग़ां ताकीद ।
सांवल यार दे नाज़-ए-निगाह दे ।मारू चाल ते खाल स्याह दे ।
थीवसे मुफत फ़रीद ख़रीद ।

233. सुन यार पुरानी पीड़ वो

(इह काफ़ी हीर दी ज़बानी लिखी है, जेहड़ी रांझे दी आशक सी ।)
सुन यार पुरानी पीड़ वो ।थियां अक्खियां छल गई दिलड़ी जल ।
कांह कुमाणीं उजड़ियां झोकां ।सखत स्यालीं करदियां टोका ।
रहन्दी दिल दिलगीर वो ।सर दरद उटल पए रोग उछल ।
लगड़ा नेंह रंझेटे वाला ।विसर्या फ़हम फ़िकर दा चाला ।
हीर गई झंग चीर वो ।सट सेझ पलंग ते रंग महल ।
भोगे मूल न दुशमन जाई ।जो जो सखती मैं सिर आई ।
मारम मा प्यु वीर वो ।वल संगिया सुरतियां लहम न कल ।
चाक महींदा आ वड़ वेहड़े ।खेड़े भेड़े रखन बखेड़े ।
कपड़े लीर कतीर वो ।ग्या हार सिंगार मुसाग कजल ।
नाज़क नाज़ निगाह सजन दे ।इशवे गमज़े मन मोहन दे ।
लगड़े कारी तीर वो ।सै सीने पल पल चुभदे फल ।
औखे लाघे रोह हबलदे ।छल छल छाले पैर पचलदे ।
रुलदी राह मल्हेर वो ।जिथ राखस डनड़ी पौवन दहल ।
सस्सी शोदी पैर प्यादी ।ना तिड़ ताडे झोक आबादी ।
मिठड़ी बे तकसीर वो ।ना खरच पले ना गंढ समल ।
माही बाझों सूल कहर दे ।डेहां रात फ़रीद नजरदे ।
नीड़ां नीर वहीर वो ।झर जंगल बेले छलो छल ।

234. सुतड़ी होत सिधाणे

सुतड़ी होत सिधाने ।नाहीं हिकतिल तरस जतन में ।
गए करहों कतारी बरडो ।थी पांधी केच शहर डो ।
कर ज़ोर अज़ोर धंगाने ।खुस वुठड़े देस वतन में ।
तत्ती कल्हड़ी ते निन्दराई ।बेवाही मूंझ मुंझाई ।
मूंह बुसरा नैन कमाने ।होस न सिर में सुरत न तन में ।
बठ बेदरदां दी यारी ।मैं मुट्ठड़ी ला कर हारी ।
नित्त झुरदी झोर झुराने ।रहन्दी दरद अमदोहमेहन में ।
आ आपे यारी लायस ।वल वैंदी ना मुकलायस ।
सभ रह गए हाल पुराने ।दिल दी दिल में मन दी मन में ।
डे वीरन डोह डुरापे ।रक्ख आस मिलन दी आपे ।
मोईं जींदी थलड़े माने ।नीतस पूरी गोर कफ़न में ।
गए जोभन जोश बहारी ।गई हार शिंगार दी वारी ।
थए कज्जल मुसाग नमाने ।वाली वट्टड़ी सोहम न कन में ।
ठग्ग बाग़ बहूं दिल काले ।सै पेच करन लक्ख चाले ।
कर कूड़ फ़रेब अघाने ।डिस्सदे पूरब वसन दखन में ।
सभ संगियां मुलक अमन विच्च ए छोरी बैत हज़न विच ।
कर बैठन जाह टिकाने ।सोज बदन में दूद दहन में ।
थियां खुशियां आसे पासे ।गए विसर मज़ाखां हासे ।
क्या हुसन जमाल दे माणें ।बुढ्ढड़ी थियम नवेड़े सन में ।
ए गमज़े नाज नेहोरे ए खुशियां ज़ेरे तोरे ।
हुन डाढे सख़त स्याने ।हर इलम ते हर हर फ़न में ।
ला नेह फ़रीद न फिरसां ।एहो घेर कुलल्लड़ा घिरसां ।
यो जाने खवाह न जाने ।रहसूं हर दम हिकड़े वन में ।

235. तांघ पुन्नल वल तैंदी है

तांघ पुन्नल वल तैंदी है ।सानूं हिक्क पल रहन न डेंदी है ।
इशक उजाड़ी झोक अमन दी ।पाड़ो बेख पटीस हड्ड तन दी ।
हक्क सिक रह गई यार सजन दी ।जो सब बार सहेंदी है ।
मूंझ मुंझारी दरद विछोड़ा ।लिख्या बाब तत्ती दे डोड़ा ।
ए ग़म मूल न थीवम थोड़ा ।जिन्द जुख जुख मुकलेंदी है ।
तेग तमांचा बांक कटारी ।खंजर पलकां तीर शिकारी ।
फट कीते तन मन विच्च कारी ।पीड़ करार वजेंदी है ।
दरद अन्दोह हजारां दिल नूं ।डुक्ख डेवन लक्ख मारां दिल नूं ।
सूलां दियां तलवारां दिल नूं ।हसरत बरछी लैंदी है ।
मूंह न लैंदे सके भाई ।मेहणीं डेवे मा प्यु जाई ।
खवेश कबीले करन लड़ाई ।सस्स ननान मरेंदी है ।
शौक फ़रीद शऊर लुढ़ायम ।हाल वंजायम काल गंवायम ।
धूड़ी पायम ख़ाक रमायम ।दिल सभ कोश करेंदी है ।

236. तत्ता इशक बहूं गुज़र्यु से

तत्ता इशक बहूं गुज़र्यु से ।एहो कहर न पेश अयो से ।
भाह बिरहों दी साड़ पजाल्या ।हड्ड तन कीतस केरी ।
यार लद्धो से जानी वैरी ।लिख्या वाह मिल्यो से ।
जान जिगर तन पारे पारे ।सीना महज़ लवीरां ।
लूं लूं रग रग विच्च सौ सौ पीड़ां ।हजर बरात ढ्यु से ।
हंजड़ूं हारां वाट नेहारां ।बैठी कांग उडांरां ।
जान जिगर है जैंदा देरा ।तनहा छोड़ ग्युे से ।
पीत पुरानी मन नूं भानी ।लज़त बहुत डखाली ।
मिसल समन्दर आतश अन्दर ।सौ सौ ऐश लध्यु से ।
सड़गिम जलगिम मरगिम गलगिम ।यार फ़रीद न आया ।
सिकदी तपदी मरदी खप्पदीं ।नाज़क नेह निभ्यु से ।

237. तत्ते नेंह तत्तड़ी दे उत्ते

तत्ते नेंह तत्तड़ी दे उत्ते ।हैरान सारा लोक है ।
ए दिल नहीं कचड़ी घदी ।माही वजाई ठोक है ।
चट थई जोबन दी तार वे ।गए कंम, भुल्ले कुल कार वे ।
तौं बिन तत्ती दा यार वे ।जीवन न जीवन भोग़ है ।
यो अपनी जा ते खुश वसन ।इथ नैन थी बे वस वसन ।
क्युभ लोक न मैं ते हसन ।मुट्ठड़ी कूं चाता बोक है ।
रो पिट्ट असाडी कार है ।डुक्ख सूल गाहणां हार है ।
बर बार चिट घर बार है ।मारू थलां विच्च झोक है ।
थियां बख़त मैं ते तंग है ।सुख दी हमेशां जंग है ।
बिखड़ा मुसाग दा रंग है ।उज्जड़ी सुहाग दी नोक है ।
बुछड़ा फ़रीद दा हाल है ।सांवल न नीतम नाल है ।
नज़रम वसाल मुहाल है ।डुक्ख दी नवीं नित्त चूक है ।

238. तती नेंह पंध अड़ांगे नैं

तती नेंह पंध अड़ांगे नैं ।डुक्खे डूंगर औखे लांघे ने ।
डिंगे राह अवल्लड़े वलड़े दे ।ब्या पंधड़े रोह जबलड़ै दे ।
मतां समझीं मुफत सहागे ने ।
रक्ख तरह तरीक तवक्कल नूं ।कर हौशला शबर तहमल नूं ।
वल वसल वसाल महागे ने ।
से धिक्कड़ै धोड़े सूल बहूं ।लक्ख ख़ार आज़ार बबूल बहूं ।
सभ सोहन्दे यार दे लांघै ने ।
बिन मारू ए थल मारु है न झोक ना कोई चारू है ।
ना भेडां बकरियां चांगे ने ।
सुंजर है डर है दड़बड़ है ।रिच्छ राखश मम दी गड़बड़ है ।
कई सौ झम न असलों टांगे ने ।
सिर भौंदे ते रूह फिरदे हन ।दिल डक्खदे ते हां घिरदे हन ।
चम लीरां मास वी घांगे ने ।
ग़म मेहनत दी दिलजौई है ।सिर गट्ठड़ी मोढे लोई है ।
गए चोले बोछन लांघे ने ।
घर बारों बिरहों बईद कीता ।कंम कारों फरद फरीद कीता ।
दिल परम नगर डूं तांघे ने ।

239. तत्ती रो रो वाट नेहारां

तत्ती रो रो वाट नेहारां ।कडीं सांवल मोड़ मुहारां ।
जैं कारन सौ सख़ती झागी ।फिरां डुहागी देस बरागी ।
जैंदी डेखां सांवल सागी ।थीवां बाग़ बहारां ।
यार बरोचल वसिम सवल्लड़ा ।जैंदी सांगे माणेम थल्लड़ा ।
खान पुनलड़ा ना कर कल्हड़ा ।तौं संग चांगे चारां ।
जैं डेंह यार असां तों निखड़े ।महन्दी रूप डिखाए फकड़े ।
डिसदे सुरखी दे रंग बिखड़े ।विघरियां कज्जल दियां धारां ।
मन्न मन्न मिन्नतां पीर मनावां ।मुला गोल तावीज़ लिखावां ।
सड्ड सड्ड जोसी फ़ालां पांवां ।करदी सव्वन हज़ारां ।
खवाजे पीर दे डेसां छन्ने ।एहे डेंह अथाईं भन्ने ।
जैंदियां सभ दिल कीतियां मन्ने ।वसम सदा घर बारां ।
बन्दड़े नाल न करसीं मन्दड़ा ।तोड़ीं कोझा कमला गन्दड़ा ।
लटक सुहाईं सेहन सोहन्दड़ा ।पौं पौं तों जिन्द वारां ।
छोड़ फ़रीद न यार दा दामन ।जैं जी कीता जुड़ कर कामन ।
डोहां जहानियां साडा मामन ।किवें दिलों वसारां ।

240. तौं बाझ थे सुंज वेढ़े वो यार

तौं बाझ थे सुंज वेढ़े वो यार ।वल वस वो सजन अनेड़े वो यार ।
कुदसी घर विच कोल्ह पल्हाके ।अपना महरम राज़ बना के ।
कीतो सखत परेरे वो यार ।
तूं बिन सारा मुलक अंधारा ।सीने ते चढ़ लेट प्यारा ।
अक्खियां दे कर देरे वो यार ।
यार चहेंदा चाक महीं दा ।बायस साडे दरद दिलें दा ।
ना कर कूड़े झेड़े वो यार ।
ज़ेवर, नेवर, पाहीं,तरेवर ।करसां टोटे पुरज़े पेवर ।
पट्ट पट्ट स्टसां सेहरे वो यार ।
आप संभालीं पतियां पालीं ।सौ सौ नज़र करम दी भालीं ।
करदीं आप बखेड़े वो यार ।
इशक अवलड़ा दरद कुललड़ा ।बखत न भलड़ा सूल सवलड़ा ।
यार फ़रीद आवेढ़े वो यार ।

241. तौं बिन हजरत यार !

तौं बिन हजरत यार ! हर दम फिरां हैरानी ।
माही बाझों सूल घनेड़े ।जीवन है बेकार ।
जानम दिल दा जानी ।
दिलबर जेहां होर न कोई ।ख़ूबी दा सरदार ।
सूरत विच्च लासानी ।
पुन्नल छड्ड के केच सिधाया ।कीतस ज़ार नज़ार ।
रो रो थीउम दीवानी ।
इशक अवैड़ा पेश प्यु से ।दिल नूं दार मदार ।
तन मन सौ सौ कानी ।
दरद फ़रीद है चीज़ महांगी ।थींदे वनज वपार ।
जिन्दड़ी कर कुरबानी ।

242. तौं बिन महींदा चाक वे

तौं बिन महींदा चाक वे ।दिल्लड़ी ग़मां दी झोक है ।
जो जो ख़ुशी सर सबज़ थई ।सर सर डुक्खां तों सोक है ।
गई रीत भत डित घत मुंढों ।आसली न टिकसां अथ मुंढों ।
साड़े न सहसां नित मुंढों ए गाल रोक दी रोक है ।
रल मिल तत्ती नूं तैंदियां ।रक्ख वैर वैन अलेंदियां ।
हक्कड़ियां ओलांभे डेंदियां ।हक्कड़ियां दी नोक ते टोक है ।
रो रो अक्खीं विच्च पईआं चरां ।कल मरदी शाला अज्ज मरां ।
यां वंज बोडां या भोई वड़ां ।ग्या तार तरोड़ संजोक है।
डुक्ख सूल हार हंडेपड़े ।आए सर ते सख़त रंडेपड़े ।
बद बखत जोफ बुढेपड़े ।क्या मिल्या थोक कूं थोक है ।
किसमत फ़रीद दी थई पुठी ।ग्या रोल सांवल डे पुठी ।
चटड़े पद्धर ते मैं लुटी ।खुश वसदा सारा लोक है ।

243. तौं बिन मौत भली वैंदम शाला मिरी

तौं बिन मौत भली वैंदम शाला मिरी ।
टिकसां हिक्क न ज़री जीसां पल न घड़ी ।
पूरब तरफ़ ढों मेंघ मल्हार डिट्ठम ।
बिजली लसक डित्ती गज गज गाज सुनिम ।
रहसां अथ न अड़ी वैसां वतन वरी ।
कन्नड़ीं वोड़ प्युम रोही वुट्ठड़ी दी ।
ढोला कल न लधो डुक्खड़ी कुट्ठड़ी दी ।
फाड़िम चोली चुन्नी रो रो थीवम चरी ।
अपने देस वंजां दिल नूं तांघ थई ।
डेखां ताडे टोभे लाने ख़ार बोई ।
बरडों राही थीवां साड़ीं सूल सड़ी ।
ओंगां पोंग उठन बदली कीती लस ।
घिन घिन नाम तैडा रोंदी थई बेवस ।
सावल तैनूं मिलां या सर पौवम मरी ।
सुरख़ी महन्दी मुठी कज्जला धार ग्युम ।
नाज़ नवाज़ भुल्या हार सिंगार ग्युम ।
बैंसर बोल भन्नां उज्जड़ी मांघ धड़ी ।
खेडन कोडन ग्या सुखदा टोल ग्युम ।
डुखड़े पुखड़े पए खुशियां ग्युम ।
जुड़ कर रावल जोगी लाई परम जड़ी ।
खिमदी खमन फ़रीद झोकां याद पौवन ।
अक्खियां नीर हंजूं कर बरसात वसन ।
लक्ख लक्ख धां उठम जां जां डिस्सम झड़ी ।

244. तैंडे नैणां तीर चलाया

तैंडे नैणां तीर चलाया ।तैंडी रमज़ां शोर मचाया ।
अलमसत हज़ार मराया ।लख आशक मार गंवाया ।
इबराहीम अड़ाह अड़ाययो ।बार बिरहों सिर चाया ।
साबर दे तन कीड़े बछे ।मूसा तूर जलाया ।
ज़करिया कलवतर चराययो ।याहा घूट कोहाया ।
यूनस पेट मच्छी दे पाययो ।नूह तूफ़ान लुढ़ाया ।
शाह हसन कूं शहर मदीने ।ज़हर दा जाम पलाया ।
करबला विच तेग चला कर ।एढ़ा केस कराया ।
शमस अलहक दी खल्ल लहवाययो ।सरमद सिर कपवाया ।
शाह मनसूर चढ़ाययो सूली ।मसती सांग रसाया ।
मजनू कारन लेला हो कर ।सौ सौ नाज़ डखाया ।
ख़ुसरो ते फ़रहाद दी ख़ातर ।शीरीं नाम धराया ।
दरद दा बार उठाया हर हक ।अपना वकत नभाया ।
कर कुरबान फ़रीद सिर अपना ।तैंडड़ा वारा अया ।

(रमज़ां=इशारे, अड़ाह अड़ायओ=अग्ग दे ढेर विच फसाया,
बछे=पै गए, तूर=उह पहाड़, जित्थे हज़रत मूसा ने रब्बी जलवा
वेख्या सी, कलवतर=आरा, घूट=लाड़ा, कोहाया=मरवाया,
एढ़ा केस=एडा हादसा, कपवाया=कटवाया, तैंडड़ा वारा=
तेरी वारी)

245. तेरा नेंह नभेसां ज़ोरे

तेरा नेंह नभेसां ज़ोरे ।सानूं हटके कौन ते होड़े ।
जान जलेसां सीस सड़ेसां ।सहजों सोज़ सहेसां ।
सारा शरम लोढ़ेसां ।सारी आर वयार उठेसां ।
तन मन धन सभ मिलक सजन्दे ।तूने कीजो किरम विछोड़े ।
इशक उजाड़िम सूलां साड़िम ।दरदां लाए देरे ।
रोग करूप कशाले हर दम ।गाने गहने सेहरे ।
राज बबाने तोल वहाने ।विस्सरे जोरे तोरे ।
पेके टोकां करम सुरीजे ।मारम जगतां नोकां ।
मुट्ठड़ी दिल्लड़ी लुट्टड़ी दा ।है किबला यार दियां झोकां ।
मा प्यु ख़वेश कबीला मिल मिल ।डेंदे धिकड़े धोड़े ।
चशमां जादू जोड़ जगाए ।होश करार भुलाया ।
डुखड़े पुखड़े आए ग़म हम ।दम दम नाल सवाया ।
गमज़े ख़ूब धमोड़े डेवन ।रमज़ां घतदियां घोड़े ।
यार फ़रीद न विसरम हरगिज़ ।रो रो धाईं करसां ।
जींदी मरदीं औखीं सौखीं ।साह मुहब्बत भरसां ।
दोहरी सिकदी सांग जिगर विच्च ।जे डुख डेवम डोड़े ।

246. तेरे बिनां सांवल बहूं

तेरे बिनां सांवल बहूं ।दिल्लड़ी अलग्ग बे आस है ।
जिन्दड़ी जले सीना सड़े ।सर चूर है तन नास है ।
जीड़ा ग़मां दे वात है ।हेआत है हेआत है ।
हक डुख तत्ती दे साथ है ।सुख़ दी न बो न बास है ।
जै डेंह पुन्नल ग्या केच वल ।सट्ट सेझ खट रंगीन महल ।
झाग जबल घाटियां ते थल ।हक्क मूंझ है पई प्यास है ।
विस्सरे नेहाली तूल सब ।पोपा ते बेंसर बोल सब ।
हुन सोज़ है या सूल सब ।या दरद है या यास है ।
केडे फ़रीद अज्ज भज्ज नसूं ।जिथ रिच्छ ते बांदर दी वसों ।
डैणीं ममीं राखस बहूं ।सौ गौल लक्ख नसनास है ।

247. थई ताब्या ख़लकत सब

थई ताब्या ख़लकत सब ।तां वी क्या थी प्या ।
हई गुम थीवन मतलब ।
तैंडा रुशद अरशाद वी तोनड़े ।वंज पहुंता अजब अरथ ।
तां वी क्या थी प्या ।
पढ़ पढ़ बेद पुरान सहायफ ।प्या सिख्यों इलम अदब ।
तां वी क्या थी प्या ।
सारे जग ते हुकम चलावें ।पा शाही दा मनसब ।
तां वी क्या थी प्या ।
दुनियां दे विच इज़त पाययो ।ग्यों अकबा नाल तरब ।
तां वी क्या थी प्या ।
सुन्नी पाक ते हनफ़ी मज़हब ।रख्यो शुफ़ी दा मशरब ।
तां वी क्या थी प्या ।
विच आसार, अफ़आल, सिफ़ाती ।जे यार घदोही लभ ।
तां वी क्या थी प्या ।
ग़ौसी कुतबी पा तू।थ्यो शेख शयूख लकब ।
तां वी क्या थी प्या ।
शियर फ़रीद तैंडा उंज हुल्या ।हन्द माड़ दखन पूरब ।
तां वी क्या थी प्या ।

(थई=हो गई, ताब्या=अधीन, रुशद=नेकी, अरशाद=
पीरी मुरीदी, वंज=जाणा, सहायफ=असमानी किताबां,
मनसब=मरतबा, अकबा=प्रलोक, तरब=ख़ुशी, आसार=
निशानियां, अफ़आल=कंम, सिफ़ाती=गुन, घदोही=ल्या,
हुल्या=प्रसिद्ध होया, माड़=मारवाड़)

248. थीवां सदके

थीवां सदके ।आया शहर मदीना ।
सुख दी सेझ सुहायम ।ग्या डुख़्ख़ड़ा देरीना ।
ना रो दिल्लड़ी लुट्टड़ी ।ना डुक्ख सुंजड़ा सीना ।
सिझ सोने दा उभ्भर्या ।डिट्ठड़ा नेक महीना ।
हरज मअल्ला रौशन ।है नूरी आईना ।
अरब दी सारी धरती ।सोहनी साफ़ नग्गीना ।
मिलसी जेड़ रखसी ।सिदक सबूत यकीना ।
थया शैतान पसीला ।मर ग्या नफ़स कमीना ।
ख़बर फ़रीद सुण्यु से ।मिलसूं सब आदीना ।

249. टोभा खटाडे मुलक मल्हेर ते

टोभा खटाडे मुलक मल्हेर ते ।पत्थर पहाड़ कूं चीर ते ।
मुलक मल्हेर दी नाज़ो चाली ।पूई लानी दा रुतबा आली ।
टोकां करदी धूड़ी वाली ।केसर मुशक अम्बीर ते ।
मंझियां रिंगसन गाई ढिकसन ।भेडां बक्करियां चागे टिकसन ।
अक्खियां अड़सन दिल्लड़ियां बिकसन ।धरती दी तासीर ते ।
बिरहों दे रोह ते जोह बणेसूं ।झोकां जोड़ संजोक छकेसूं ।
सस्सी ते से थोरे लेसूं ।मन्नत चड़ेसूं माई हीर ते ।
बैत करेसूं कल थल बरकूं ।साघर परेम ते सुख सागर कूं ।
गुझ्झड़े रछने जोधा सर कूं ।रक्ख तकिया गुर पीर ते ।
जां जां वुठ दी वहो सुणेवे ।सिंधड़ंो रूह उचाक डस्सेवे ।
डेहां लस्सड़ी ते दिल थीवे ।रातीं गावै खीर ते ।
टोभे बाझों मूल न ठहसां ।ना वकड़े ना बन्द ते बहसां ।
ना गठ ते ना पाड़ ते रहसां ।ना वत खूह वहीर ते ।
आपे आकर दिल्लड़ी लातो ।हाल मैडा सब समझ्यु जातो ।
हुन क्युं मुट्ठड़ी तों दिल चातो ।धूतीं दी तकरीर ते ।
इशक फ़रीद लिख़्या परवाना ।घर बारों थी बार रवाना ।
कर सदके पढ़ शुकराना ।रहीं मिट्ठड़ी तहरीर ते ।

250. टोभा खटा डे सोहनी जा ताड़े

टोभा खटा डे सोहनी जा ताड़े ।ओझा न होवे सारी माड़ ते ।
टोभे बाझों मूल न रहसां ।ना गठ ते ना पाड़ ते ।
डेहां पीसूं लस्सियां गाउईआं ।रातीं ख़ीर कूं काढ़ ते ।
तौं बिन सावल अग्ग अड़ेंसां ।चोला बोछन पाड़ ते ।
जे न औसीं तौं वल झोकां ।लडसूं झोपड़ साड़ ते ।
झोपड़ जोड़ बणेसूं खिप दे ।थल दे साफ़ पसाड़ ते ।
गाईं सहंस सवाईआं मोहणियां ।डोभन आन उकाड़ ते ।
टोभा बणवेसूं दिल दे सांगे ।मिन्नत चड़ेसूं लालो लाड़ ते ।
आवम राहत चोड़ी चोड़ी ।लाने फोग दे वार ते ।
फरह फ़रीद नूं रोज़ सवाई ।सुंजबर सख़त उजाड़ ते ।

251. टोभ बणवा डे पका तड़ ताड़ ते

टोभ बणवा डे पका तड़ ताड़ ते ।सिंधड़ों दूर उतार ते ।
सुबह सहूरीं घुबकन मट्टियां ।झोपड़ दे अगवाड़ ते ।
रोही रावे रोहीं धुम्मां ।हूक पौवे वंज माड़ ते ।
उच्चड़े टिब्बड़े सुख साघर दे ।चढ़ना पौवम पहाड़ ते ।
चौ तरफों वैह पानी आवे ।सोहने साफ़ झकाड़ ते ।
पाक ढर विच्च टोभा मारूं ।ना झत झाड़ कजाड़ ते ।
रोही वास सभे लडावसन ।अपणियां झोकां शाड़ ते ।
फलोढे ते मिन्नत लेसं ।थोरा चढ़ेसूं दीने लाड़ ते ।
आन फ़रीद सो हैसां चंवर ।शहर बज़ार उजाड़ ते ।

252. तुम बेशक असल जहान के हो

तुम बेशक असल जहान के हो ।
ना तुम फरशी ना तुम अरशी ।ना फ़लकी ना अरज़ी हो ।
ज़ात मुकद्दस नूर मुअल्ला ।आए विच्च इनसान के हो ।
रोते हो कभी हसते हो ।कथे आशक ते माशूक बनो ।
अपना भेत बताउ रे ।तुम कौन हो भला कहां के हो ।
रूप अनोखे तौर अवैड़े ।नाज़क चालीं मन मोहणियां ।
नाज़ नज़ाकत हुसन मलाहत ।साहब सभ सामान के हो ।
कथे जाहल कत्थ फ़ासक फ़ाजर ।अपना आप गमाते हो ।
कथ आरफ कथ अहल हकायक ।वाकफ़ सर नहा के हो ।
किबला, काअबा, मसजद, मन्दर ।दैर गनेश सभ तुझ में है ।
सौम व सलवात के ख़ुद हो वाली ।क्युं पाबन्द गुमान के हो ।
गैर तुम्हारा मुहज मुहाले ।इस जग्ग में अोर इस जरा में ।
दुनियां तुम हो अकबा तुम हो ।मालक कोनो मकान के हो ।
वाअज़ नसीहत रमज़ फ़रीदी ।सोच संजानो दम दम से ।
अपनी अज़मत याद करो ।क्युं थए युसफ़ ज़न्दान के हो ।

253. उपरम बेद बतऊं

उपरम बेद बतऊं ।मैं अग्यानी को ग्यान सुनाऊं ।
सुरत सरंध हाथ मूं लैकर ।परेम की तार बजाऊं ।
पांच सखी मिल राम दुवारे ।सतगुर के जस गाऊं ।
कुंज गली में शाम सुन्दर संग ।होरी धूम मचाऊं ।
मीत चीत पचकारी मारूं ।परीत गुलाल उडाऊं ।
कहां अजुध्या सबल मथरां ।कहां गोवरधन जाऊं ।
लछमन राम कन्न्हिया कलगी ।आपने आप मूं पाऊं ।
देसों कहां बदेस को दौड़ूं ।जोग बराग कमाऊं ।
सूरज चाद को सनमुक्ख राखूं ।सुन समाध लगाऊं ।
पीपल तुलसी काहे को पूजूं ।काहे को तीरथ न्हाऊं ।
और से कान फ़रीद ना मेरो ।आतम देव मनाऊं ।

254. उथ दरद मन्दा दे देरे

उथ दरद मन्दा दे देरे ।जथ करड़ कंडा बोई ढेरे ।
एह उचै टिब्बड़े आली ए सोहनी कक्कड़ी वाली ।
हन मुशताकां दे वाली ।ब्या कौन कदम इथ फेरे ।
खप ख्हारां ते लई लानड़ी ।सन फोग बहू मन भानड़ी ।
थल टिबे डहर टकानड़ीं ।हर भिट भिट नाल बसेरे ।
मड झोकां ते तड़ ताडे ।रस छुट्टड़े खेला ख़ाडे ।
वाह तकिया गाह असाडे ।हुन होवे कौन नखेड़े ।
टिप टोभे बाहीं सोंहदे ।विच्च चिटके दिल नूं मोंहदे ।
जी हर वेले प्या लोंहदे ।है हरदम होवन नेड़े ।
झड़ गाजां बिजलिया बादल ।क्या चिट्टड़े गोरे सांवल ।
सिक्क सावल करे उबाहल ।लड्ड होत वसिम आ वेड़े ।
वल कक्कड़ियां रेभड़ कचरियां ।कई सबज़ मतीरे खखड़ियां ।
कई गदरियां पीलियां कक्कड़ियां ।शरहोही सोंहदे सेहरे ।
खश कतरन इतरों भिन्नड़ी ।गज़लाई सावी सनड़ी ।
खा साग पोसी दी फुनड़ी ।निभ वैंदे वकत सुखेरे ।
दिल हर वेले पई तांघे ।वंज़ डेखां माल दे लांघे ।
गईआं बकरियां भेडां चांघे ।लंघ पौंदम कदम अगेरे ।
सुंज वाह असाडियां झोकां ।सन कमले करदे टोकां ।
कुझ ख़बर नहीं इनां लोकां ।दिल पुठड़े सख़त अवैड़े ।
बठ शहर बज़ार इमारत ।बेवाही बिरहों बशारत ।
पर बेशक इशक इशारत ।छड्ड झगड़े कूड़े झेड़े ।
थियां रोही मेंघ मल्हारां ।कुल गुल गुलज़ार बहारां ।
विच्च सोंहदियां घंड तवारां ।हर टोभे छांगा छेड़े ।
सो कररे कंडड़े काठियां ।लक्ख डूंगर औखियां घाटियां ।
सब डंगड़े वट्टड़े चाटियां ।जथ थीवम फ़रीद वहीरे ।

255. वैंदीं वल्ल केच डों

वैंदीं वल्ल केच डों ।पुन्नल केंदे कान ।
जैदीं सांवल रल मिल माणूं ।शहर भंभोर सुहान ।
तूं है जीवन जोगा साडी ।डुक्खड़ी दिल दा मान ।
नाज़ो अदा दी जानी लाययो ।जानी जिगर विच्च कान ।
डित्तड़ी जमदीं अमड़ी खुतड़ी ।गम गट्ठड़ी डुक्ख डान ।
ईं जग ऊं जग मोईं जींदी ।हां तैड्डड़ी जान न जान ।
तौं बिन गांवन यार मुट्ठी दे ।वैन तत्ती दे वान ।
जे डेंह भलड़े मितर वी भलड़े ।है मशहूर अखान ।
दरद मोठा चक चूंढियां पावे ।मारम सूल वडान ।
लेला मजनूं हीर ज़लैखा ।सै लुढ़ गए हैं घान ।
बाझों यार फ़रीद निभाया ।जींव कैंदे तरान ।

256. वैसों संझ सबाहीं

वैसों संझ सबाहीं ।ख़ाली रहसन जाईं ।
पक्खी परदेसी उभे सरदे ।दो दिन दे खलकाईं ।
मुलक बेगाना देस पराया ।कोझियां कूड़ बिनाईं ।
ना कोई साथी ना कोई संगती ।कैनूं दरद सुनाईं ।
किसमत सांगे डिट्ठम ए धरती ।आदा कौन इथाईं ।
हुसन नग्गर डों थीवम रवाना ।या रब्ब तोड़ पुराईं ।
मंगां दुआईं अल्ला साईं ।विच्छड़्या ढोल मलाईं ।
इशक फ़रीद बहूं डुक्ख डित्तड़े ।बिछियां बिरहों बलाईं ।

257. वल कहीं डुखड़े वे डेंदी

वल कहीं डुखड़े वे डेंदी ।सांवल दिलड़ी बरमा ग्युं सोहना यार ।
कन्ने कन्ने बुन्दे गल झप माला ।अनहद बीन बजा ग्या सोहना यार ।
रावल जोगी शाह हुसन दा ।परम जड़ी जुड़ लाग्यों सोहना यार ।
अक्खियां सेहरी सेहर कमावन ।जादू चोट चला ग्यों सोहना यार ।
सोज़ तपश मौजूद हमेशा ।भा बिरहों भड़का ग्यों सोहना यार ।
ला कर यारी यार विसार्यो ।खोट फरेब कमा ग्यों सोहना यार ।
कल्हड़ी छड के केच सिधाययों ।परभत रोह रुला ग्यों सोहना यार ।
तौं बिन यार फ़रीद डुखां विच ।सूलीं जान अड़ा ग्यों सोहना यार ।

258. वल वस वसा ओहे टोल वे

वल वस वसा ओहे टोल वे ।कर लाड मिट्ठड़ा बोल वे ।
हर वकत सांवल ढोल वे ।पिया हो असाडड़े कोल वे ।
अन सुहेंदी घुंडड़ी खोल वे ।अन संग मैं संग बोल वे ।
अतहों नाज दे टुक टोल वे ।लक्ख लक्ख अलोल मख़ौल वे ।
अथां मुट्ठड़ी जान सड़ोल वे ।थई डुक्खड़ेंदी कचकोल वे ।
क्या डुक्खड़ीं लद्धड़म गोल वे ।थए चूर ज़िर्हा ते खोल वे ।
मार्या है क्या जुड़ तोल वे ।अबरू गुलेल गलोल वे ।
पै होस दे विच्च भोल वे ।जीरे अन्दर सौ पोल वे ।
थया जिसम चीची ठोल वे ।दिल डित्तड़े कई घर रोल वे ।
जे ए फ़रीद दा डौल वे ।इहा टोर ते एहा जोल वे ।
कई डेह न फोला फोल वे ।अझूं शहरीं वज्जसन दोल वे ।

259. वसल हिजर यकस

वसल हिजर यकस ।वसदा दोसत करीब दिलींदे ।
अलवी सिफ़ली यार दियां झोकां ।ख़बर नहीं इन्हां कमल्यां लोकां ।
ए दिल जान पछान ।हर जा देरे चाक महीं दे ।
डुक्ख डुहाग ते बै हुज़न में ।सुख सुहाग ते मुलक अमन में ।
आशक समंझ सुंजान ।सभ मज़हर में यार चहींदे ।
चाक बबाना मन नूं भाना ।तन मन उस दे राह विकाना ।
क्या वत दीन ईमान ।शरम भरम सब मिलक तहींदे ।
इशक फ़रीद तसर्रफ़ कीता ।लायस जुड़ कर परम पलीता ।
सब सूरत सुबहान ।ज़ाहर अक्खियां नाल डस्सींदे ।

260. वसो वी अक्खियां घनघोरां लाके

वसो वी अक्खियां घनघोरां लाके ।
सावन आया यार न आया ।थए बादल तूफ़ान बला के ।
आवन कह गए वल्ल न आए ।दिल नूं मुफ़ती चोट चला के ।
दिल बरमाए रावल जोगी ।धुन धुन बंसी फूक बजा के ।
इतना ज़ुलम मुनासब नाहीं ।पहलों अपना यार बना के ।
रोह जबल विच्च मारू थल विच्च ।मारू ग्या परदेस रुला के ।
मारू मुलक मल्हेर दा मालक ।लड्ड न जावीं झोक वसा के ।
जोगन थीसां मुलक ढुंडेसां ।वैसां अंग भब्बूत रमा के ।
अलड़े ज़खम न चूल पपीहा ।साड़ न कोइल कूक सुना के ।
करवटियां लै हुट्ट हुट्ट जांदी ।बेवस्स डुक्खड़े सूल सुहा के ।
तुम बिछड़त मोहे चैन न आवे ।पाप मटाउ अंगन सुहा के ।
गरजत बदरा लिशकत बिजली ।रिम झिम बारश ज़ोर घटा के ।
साजन बाझ फ़रीद है जीना ।मुशकल अेसे बार उठा के ।

261. वतन बेगाने वल नहीं आवणा

वतन बेगाने वल नहीं आवना ।याद कीतम दिलदार ।
कोले रहसां मूल न सहसां ।हजर दा बारी बार ।
विसर्या सारा राज बबाना ।विसर ग्या घर बार ।
भान मणेसां मान नभेसां ।घोले आर व यार ।
सुरखी कजल मुसाग ग्युसे ।बठ प्या हार सिंगार ।
पारों डिसदी झोक सजन दी ।क्युं रहसां उरवार ।
मैं मनतारी ते नेंह बारी ।कादर नेसम पार ।
बठ पई सिंधड़ी कीतम मूला ।मुलक मल्हेर मल्हार ।
देस अरब दा मुलक तरबदा ।सारा बाग बहार ।
रोही रावे रोहीं रुलेस ।नस ग्या करहूं कतार ।
डेंह डुखां दा डूंगर डिसदा ।रात गमां दी ग़ार ।
सांवन आया रोही वुठड़ी ।बार थई गुलज़ार ।
दार मदार फरीद है दिल नूं ।डुखड़े तारो तार ।

262. वे तूं सांवला न मार नैनां दे तीर

वे तूं सांवला न मार नैनां दे तीर ।
अक्खियां शर कारन नित बुखियां ।हन पापी बे पीर ।
ज़ुलफां मुशकीं बन्न्ह बन्न्ह डेवन ।दिलड़ी कूं तअज़ीर ।
तैंडे नाल है सांवल सोहना ।दिल लांवन तकसीर ।
नाज़ नेहोरे गमज़े तैंडे ।मसहफ दी तफ़सीर ।
काकल पणियां नांग वराधा ।डिठड़ी चढ़म सरीर ।
झोकां आन सवलड़ियां सींगा ।नैन लोढ़ेदे नीर ।
पाह हम्बाह उगार गईंदे ।मैं लेखे अकसीर ।
वुठ कनूं थई धरती थलड़ी ।सागी मुलक मल्हेर ।
रलड़े सजन सुहावन थलड़े ।कार, ककी, कीड़ ।
जैसलमेर नरहाई माणूं ।थी डोहीं खंड खीर ।
थल चतरांग अन्दर में सस्सी ।बेलीं बेटीं हीर ।
रोज़ अज़ल दा तैंडा साडा ।माल मवैशी सीर ।
जांवन लादा मिलक तुसाडा ।तन मन सीस सरीर ।
कोझी कमली तैडे नां दी ।ना कर यार करीर ।
मूंझां दोसत ते खुशियां दुशमन ।सुख वैरी डुख वीर ।
जानी जोड़ चलइयो कानी ।संध संध दे विच पीड़ ।
बठ चूचक बठ खेड़े भैड़े ।तौं ना थी दिलगीर ।
डेहों डेंह कोराड़ा थीवे ।वाह सिक दी तासीर ।
रो रो तुठली पईआं नासूरां ।दिल विच सौ सौ चीर ।
उर्यानी दी खलअत मिलड़ी ।सुंजबर दा जागीर ।
हो हो फकड़ी शहर खवारी ।साडी है तौकीर ।
गौस कुतब सब तौं तू सदके ।कौन फ़रीद फकीर ।

263. विच्च रोही दे रहन्दियां

विच्च रोही दे रहन्दियां ।नाज़क नाज़ो जट्टियां ।
रातीं करन शिकार दिलें दे ।डेहां वलोड़न मट्टियां ।
गुझ्झड़े तीर चलावन कारी ।सै सै दिल्लड़ियां फट्टियां ।
कर कर दरदमन्दां कूं ज़खमी ।है है बधन न पट्टियां ।
छेड़न भेडां बक्करिया गाईं ।ले ले गाबे कट्टियां ।
कई मसकीन मुसाफर ।चौड़ कीतो ने तरट्टियां ।
धूई दार फ़कीर थ्यु से ।फ़खर वड्डाईआं स्ट्टियां ।
हउं दिलबर दै कुतड़े दर दै ।बिरहों पईआं गल गट्टियां ।
मूझे फ़रीद मज़ीद हमेशा ।अज्ज कल्ह खुशियां घट्टियां ।

264. वाह ! हजरत इशक मजाज़ी

वाह ! हजरत इशक मजाज़ी ।सब राज रमूज़ दी बाज़ी ।
सभो शाहद असलीं जाणीं ।है वाहद परम कहानी ।
है वहदत समंझ सुंजानी ।विच्च परदे कसरत साज़ी ।
कर रफ़ा मलाल कदूरत ।टुक्क समंझ सजन बे सूरत ।
थयां ज़ाहर विच्च हर मूरत ।छुप्प ओले नूर हजाज़ी ।
सुन हुसन अज़ल दी चाली ।सब नाज़ नहोरे वाली ।
किथ ख़ालक ख़लक दा वाली ।किथ आबद रीत न्याज़ी ।
किथ आशक दरद कशाले ।किथ हुसन मलाहत चाले ।
थी हर शिंगार डखाले ।खुश सीरत नाज़ नवाज़ी ।
किथ मुतरब ते मैखाने ।किथ रिन्दी रसम यगाने ।
किथ सौम सलवात अज़ाने ।किथ ज़ाहद नेक नमाज़ी ।
है ग़ैरियत ज़न्दीकी ।पा विरसा रक्ख सदीकी ।
कर ज़ुहद ज़हाद हकीकी ।बन मरद मुअला गाज़ी ।
ठप्प फ़िका असूल मसायल ।सट्ट नहवी फ़ेअल ते फ़ायल ।
बट्ठ इलमी बहस दलायल ।है फ़कर फ़कत जां बाज़ी ।
ए सिलक सलूक फ़रीदी ।है रीत अजब तौहीदी ।
पर ज़ौक लज़ीज़ जदीदी ।छड्ड लम्बिड़ दूर दराज़ी ।

265. वाह ! वाह!! दिलबर दी यारी

वाह ! वाह!! दिलबर दी यारी ।यारी करम न कारी ।
थी रुक्खड़ा रखम बरीत ।ना पुच्छदा हाल हकीकत ।
ना सुणदा वेदन सारी ।
मैं मुट्ठड़ी डुक्खड़ीं कुट्ठड़ी ।सै तीरी ग़मदीं चुट्टड़ी ।
दिल लड़ी सूलां मारी ।
ना डिट्ठड़म मिठड़ा मक्खना ।ग्या सांवन साफ़ सलक्खना ।
गई मौसम चेतर बहारी ।
ना खोज ना खोब उठां दे ।सब परभत पंध थलां दे ।
दिल रुल रुल रो रो हारी ।
मैं सिंधरी केवें जालां ।परदेस बैठी तन गालां ।
थए रोही डेंह मल्हारी ।
दिल खस्सदा भेत न डसदा ।थी ओपरा दूरों हस्सदा ।
ला हू हू शहर खवारी ।
हक्क यार फ़रीद अवैड़ा ।ब्या सस्स ननान दा झेड़ा ।
पई पलड़े मुंझ मुंझारी ।

266. वाह वाह सोहने दा वरतारा

वाह वाह सोहने दा वरतारा ।हर सूरत विच करे उतारा ।
हक जा चावे इशक इजारा ।बइ जा डेवे हुसन उधारा ।
यो मालक मै अदना सग दा ।हर सूरत विच मिट्ठड़ा लगदा ।
मै क्या मोह लेइस मन जगदा ।मारेस हर जा नाज़ नकारा ।
मैं बे आस उमीद दा माना ।हर कस नाकस दे मन भाना ।
दोसत अवैड़ा यार याना ।हर इक दिल कूं लगे प्यारा ।
जो मैं वांग बुझारत बुझदा ।सो थिया वाकफ सारी गुझ दा ।
हरगिज़ दख़ल नहीं कहीं कुझदा ।जान नज़ारा यार दा सारा ।
चरन गुरु दे सीस नवाईं ।जो आखे चुम अखियां चाईं ।
जोहद जहाद दा बार उठाईं ।करब कमाल हैई मतलब बारा ।
थी गुर पीर दा चेला सच्चा ।ना हो कदम हटा कर कच्चा ।
बिरहो कड़ाह चड़्या मच्च मच्च्या ।जल बल मार अना दा नाअरा ।
जो कोई रखसी ऐ गुन चारे ।जो राती जग जोग जगारे ।
वंज खुश वस सी शाम दवारे ।रहसी जगत सौं न्यारा ।
जगरत सुपनस सकोपत टुरिया ।तैंडी सैर दे सांगे जड़्या ।
जैंदा पीर संजानों थुड़्या ।फिरसी थी चौ गुठ आवारा ।
तूं इह समझ संजान न छोड़ीं ।निरगुन सरगुन विच जा जोड़ीं ।
आपने आप तूं मूंह न मोड़ीं ।सब है रूप सरूप तेहारा ।
चारों बेद बदांत पुकारन ।योम ब्रम नारायन धारन ।
आतम उतम सरूप सधारन ।दवैत फरीद है जूठा लहरा ।

267. याद आविन यार दे रलड़े

याद आविन यार दे रलड़े ।नित्त पौवन करूप कुलल्लड़े ।
क्युं चढ़दी चन्दरी खारे ।क्युं करदी ज़ेवर बारे ।
जे जानी हिजर दे वारे ए नेड़े सख़त सवल्लड़े ।
डुक्ख यार सुखां दे देरन ।लए सूलां सीने ढेरन ।
मूंह काला नीले पैरिन ।वाह ! होत पुन्नल दे भलड़े ।
क्युं डुखड़ी उम्मर निभावां ।हन मौत दा मुलक वसावां ।
वंज गोरसतान सुहावां ।बट्ठ जीवन कूड़ तसल्लड़े ।
गल पेच हिजर दे वलड़े ।दिल ज़खम अवल्लड़े अल्लड़े ।
इह नेंह लावन दे भल्लड़े ।पए मैं मुट्ठी दे पल्लड़े ।
सब ज़ोर हवस वस लायम ।पर यार फ़रीद न आइम ।
ग़म दरद अन्दर सर पायम ।कर आपें गल्लड़े गल्लड़े ।

268. यार बरोचल काण

यार बरोचल कान ।रुलदी रोह डूंगर विच ।
लायस जुड़ कर बान ।दिलड़ी, जान, जिगर विच ।
सेंगियां सुरतियां कंथ रिझाया ।अपने अपने ढोल कूं पाया ।
मैकूं मैडरे मांन ।रोल्या सुंजड़े बरोच ।
यार न पावां बार उठावां ।नीर वहावां गावन गावां ।
रक्ख रक्ख वैन दी वान ।हर कूचे घर घर विच ।
रेत तत्ती प्या डुखड़े घाटे ।खुड़ बण खोब गपाटे घाटे ।
सट्ट ग्या जान पछान ।कानी मार अन्दर विच ।
हुसन हकीकी नूरे हजाज़ी ।खेडे नाज़ न्याज दी बाज़ी ।
सिदको समझ सिंजान ।आया कोट शहर विच ।
राह अवलड़े औखियां घाटियां ।चुभदे ककरे कंडरे काठियां ।
मारम सूल वडान ।आइम ज़ुलम कहर विच ।
पहले डेंह दी किसमत फुटड़ी ।जमदे वेले अमड़ी मुठड़ी ।
डितड़ा डुख दा डान ।लोढ़ेस बिरहो बरविच ।
दरद फ़रीद हमेशा होवे ।सारे पाप दूई दे धोवे ।
रहन्दी तांघ ते तान ।पहुंचां प्रेम नगर विच ।

269. यार डाढी इशक आतिश लाई है

इशक ते बाह बरोबर, इशक दा ता तखेरा ।
बाह सड़ेंदी कक्ख काने नूं, इशक सड़ेंदा जेअड़ा ।
बाहर सामे नाल पानी दे,इशक दा दारू केहड़ा ।
यार मैडे aुत्थे चाह ना रक्खीं, जित्थे इशक लायन्दा डेरा ।

यार डाढी इशक आतिश लाई है ।
सानूं लग्ग गई बेअख़त्यारी,
सीने दे विच ना समाई है ।

हुलहुला के इशक जु आया ।
मुहबत डाढा शोर मचाया ।
थां थां नाच नचाई है ।

इशक चुआया मैं सर चाई ।
शरम हया पहले स्ट्ट ल्या ई ।
इशक नूं मलामत लाई है ।

इशक अवेड़ा बहन ना देंदा ।
थी गदागर मसत करेंदा ।
घटी घटी चा मंंगाई है ।

270. यार कूं कर मसजूद

यार कूं कर मसजूद ।छड डे ब्यु मअबूद ।
हर सूरत विच यार कूं जानी ।गैर नहीं मौजूद ।
सभ दाद कूं समझी वाहद ।कसरत है मफकूद ।
फखरुदीन मिठल दे शौकों ।दम दम निकलम दूद ।
वसल फ़रीद कूं हासल होया ।जब हो ग्या नाबूद ।

271. यार कुराड़ा हाल वे

यार कुराड़ा हाल वे ।सानूं मार न ताअने ।
सांग संजोक रलाए किसमत ।सांगे दोसत बगाने ।
जां जां सूंह बणांवां ।तां तां डिस्सदे दूर टिकाने ।
आवन कान न मंगनीं दिल्लड़ी ।कच्चड़े करन बहाने ।
बे दरदां दी परीत न भली ।मुला मौत कूं आने ।
रोवां रो रो लोक सुणावां ।जी न आंविम खाने ।
कोई आखे मन मचल कूड़ी ।कोई आखे दीवाने ।
सूलीं नाल सुंजेदे जाले ।संज सबाह गुज़राने ।
आंवीं देर न लांवी माही ।जिन्द डूं ढैंदी महमाने ।
इशवे ग़मज़े नाज़ नहोरे ।क्या क्या हुसन दा शाने ।
जो है शान फ़रीद दी सारी ।मारन दा सामाने ।

272. यार सपाहीड़ा आ वस माडरो कोल

यार सपाहीड़ा आ वस माडरो कोल ।
इक लख डेंदी डो लख डेसां ।हक वारी चा बोल ।
पहलों दे कर बाह सिरांदी ।सावल यार न रोल ।
नैं सांवन दी मै मनतारी ।सै छोलियां लख झोल ।
यार चहेंदा मान महींदा ।आवस माडरे कोल ।
सावल्यां दे नैन सलोनड़ी ।कजले दे टक टोल ।
पापन चकवी कर कर चीकां ।अल्हड़े ज़खम न चोल ।
मर मर जांदी रसक न सहन्दी ।दिलड़ी सखत सड़ोल ।
बैने बोंले बेंसर विसरे ।गए नूरे रमझौल ।
नखरे नाज़ नहोरे हरदम ।ब्या ब्या करन अलोल ।
औगन हारी नासक कंम दी ।सोहना ऐब न फोल ।
समझ फ़रीद न थी गमवासू ।अल्ला मिलेसम ढोल ।

273. ज़ानत फेलन कुल शै बातल

ज़ानत फेलन कुल शै बातल ।हक है फायल ब्यु सभ आतल ।
ज़ौक वगईं तौर अकल दे ।भट घत कूड़ी बहस दलायल ।
उठदीं बहन्दीं टुरदीं फिरदीं न हो ज़ाहल न थी गाफल ।
गैर मुहाले वैर ख्याले ।हर हिक डूं रख गफत शामल ।
साडा है महबूब दिलेंदा ।जो कोई है तौहीद दा कायल ।
इलम हकायक दा है लायक ।नफस मुज़की मादा काबल ।
बाझ मुहबत जान बराबर ।क्या नातक क्या नाहक साहल ।
इबनुल अरबी दी रख मिल्लत ।ठप रख फिका असूल मसायल ।
बह कर कल्हड़ीं रमज़ सुझाई ।पीर मकमल आरफ कामल ।
वज्हा अल्ला फरीद है बाकी ।बाकी हालक ज़ाहक ज़ाहल ।

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