हिन्दी कविताएँ : राजेश जोशी
Hindi Poetry : Rajesh Joshi
1. आस की उड़ान
राही से शिकायत कौन करे, जब मंज़िल उसके पास नहीं पंखों की हिमायत कौन करे, जब उड़ने की ही चाह नहीं ना साथ किसी का देते है, पर रिश्तों की बुराई करते हैं ना क़ाबू मन पे होता है, और जीवन से शिकायत करते हैं जो बीते सारा पल ये सोच के, अपना पल भी आएगा और अपने जीवन मे खुशियां वो, अंबर से बरसाएगा तो पहले अपने सोच बदलना, फिर अंतरमन से बात करो अपने मन मे यथाशक्ति से, शुभ कर्मों का आचार भरो कर्म प्रधान है जीवन का, क्या इसको तुम झुठलाओगे इस तथ्य को जो समझोगे तुम, तो नया सवेरा पाओगे इक आशा ही वो दीपक है, जो कल की राह दिखाती है हर एक कदम पे मंजिल तेरे, पास मे आती जाती है
2. ध्यान मन का ज्ञान
जीवन के संघर्षों से जब, हो जाए ये मन दुर्बल ध्यान योग ही इस मन को, देगा पूर्ण मनोबल ध्यान लगाने सर्वप्रथम इक, शांत स्थल मे जाना पद्मासन मे बैठ के हाथों से, ज्ञान मुद्रा को बनाना बंद आँखें से इन साँसों की, गति पे ध्यान लगाना मन जो भटके बाहर तो उसे, वापिस ध्यान मे लाना लाखों रूप है ध्यान के जिसका, चयन ना मन कर पाता सबसे सरल है रूप ध्यान जो, मन मे स्थिरता लाता अपने प्रभु या गुरु के रूप का, मन मे चिंतन लाना मन जो भटके बाहर तो उसे, वापिस ध्यान मे लाना धीमे गहरी साँसे लेकर उनको अपने पेट मे भरना पलभर रोक के स्वांश छोड़ना, तन को ढीला करना इसी अवस्था बैठ के मन से कोई विचार ना बनाना मन जो भटके बाहर तो उसे, वापिस ध्यान मे लाना कुछ पल रिश्ते नातों को तुम, मन से पूर्ण हटाना बस अपने मे खो जाना और, मन को शून्य बनाना अपने काम की सूची को तुम, अपने मन से भगाना मन जो भटके बाहर तो उसे, वापिस ध्यान मे लाना मन तो चंचल होता है जो, देता यश और अपयश पर ध्यान लगाएं बार बार तो, होगा अपने ये वश
3. नारी के दिव्य रूप
जिए है लाखों पल जीवन के, रहे अधूरे ये अरमान । फिर बचपन मिल जाये मैया, हो तुझसे मेरी पहचान ॥ जन्म दिया है मैया तूने, रहा शीश पे तेरा हाथ हुआ कष्ट जब मेरे मन को, जागी है तू सारी रात गुरु भी तू है सख़ा भी तू, और तू ही है मेरा भगवान धन दौलत से बड़ी है मैया, तेरे होंठों की मुस्कान ॥ लड़ते थे हम देखो हरपल, फिर भी तेरा क्या कहना मन तू मेरा पड़ लेती थी, ओ मेरी प्यारी बहना राखी के एक तार से तूने, बांध लिया है मेरा मन । दूर देश में रहते हैं पर, प्यार कभी ना होगा कम ॥ पत्नी रूप में मिली जो शक्ति, पूर्ण हुआ मेरा संसार स्वार्थ रहित है क़र्म तुम्हारा, करता हूँ तेरा आभार जीवन के हर पल में तूने, साथ दिया है एक समान अपने कष्ट छुपाये तुमने, त्याग तुम्हारा बड़ा महान ॥ तेरी किलकारी से मेरे, घर को मिली नयी पहचान कर्म भाव में सेवा तेरी, पूर्ण हुए मेरे अरमान सामवेद संग यजुर्वेद भी, तू ही मेरा वेद अथर्व ऐसी मेरी बिटिया रानी, यही सोच के होता गर्व ॥
4. अरमानों की बारिश
अरमानों की बारिश है, तू बुझा ले उम्मीदों की प्यास अपने दिल की कोने मे ना, बचा के रखना कोई आस ज्यादा उम्मीदों का अपने, दिल मे बोझ ना तु रखना अरमानों की बारिश का ना, सदा भरोसा तुम करना सुख लाता है खुशहाली तो, दुख भी कुछ बतलाता है जीवन के संघर्ष मे कैसे, लड़ना है सिखलाता है ध्यान योग अपनाके तुम, मन को नियंत्रण मे रखना अरमानों की बारिश का ना, सदा भरोसा तुम करना कर्म प्रधान है जीवन मे, जो फल हमको दिलवाता है मन वश मे करता बुध्दि जो, सारे कर्म करवाता है शुद्ध भावना रखना मन मे, पाप कर्म से तुम डरना अरमानों की बारिश का ना, सदा भरोसा तुम करना याद रहे जो पाया है वो, खोने से भी है ज्यादा सकारात्मक सोचे मन मे, खुद से करना ये वादा अपने आप से बातें करके, मन मे शक्ति को भरना अरमानों की बारिश का ना, सदा भरोसा तुम करना
