शामे-श्हरे-यारां : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Shaam-e-Shehar-e-Yaran in Hindi Faiz Ahmed Faiz
- आपकी याद आती रही रात-भर
- अबके बरस दस्तूरे-सितम में क्या-क्या बाब ईज़ाद हुए
- ग़म-ब-दिल, शुक्र-ब-लब, मस्तो-ग़ज़लख़्वाँ चलिए
- हैरां है जबीं आज किधर सजदा रवां है
- हमीं से अपनी नवा हमकलाम होती रही
- हमने सब शे’र में सँवारे थे
- हसरते दीद में गुज़राँ है ज़माने कब से
- किस शह्र न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का
- कुछ पहले इन आँखों आगे क्या-क्या न नज़ारा गुज़रे था
- न अब रकीब न नासेह न ग़मगुसार कोई
- नासेहम गुफ़त बजुज़ ग़म चे हुनर दारद इश्क
- सभी कुछ है तेरा दिया हुआ, सभी राहतें सभी कुलफतें
- सहल यूं राहे-ज़िन्दगी की है
- सितम सिखलाएगा रस्मे-वफ़ा ऐसे नहीं होता
- तुझे पुकारा है बेइरादा
- वो बुतों ने डाले हैं वस्वसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
- याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िरे-शब
- यह मौसमे-गुल गर चे तरबख़ेज़ बहुत है
- य' किस ख़लिश ने फिर इस दिल में आशियाना किया
- उमीदे-सहर की बात सुनो
- जिस रोज़ क़ज़ा आएगी
- अश्क आबाद की इक शाम
- मेरे दर्द को जो ज़बाँ मिले
- पाँवों से लहू को धो डालो
- सज्जाद ज़हीर के नाम
- ऐ शाम मेहरबां हो
- गीत-चलो फिर से मुस्कुराएं
- हम तो मज़बूर थे इस दिल से कि जिसमें हर दम
- ढाका से वापसी पर
- बहार आई
- तुम अपनी करनी कर गुज़रो
- मोरी अरज सुनो
- लेनिनगराड का गोरिसतान
- कुछ इश्क किया कुछ काम किया
- दर-ए-उमीद के दरयूज़ाग
- आज इक हरफ़ को फिर
