नक़्शे-फ़रियादी : फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Naqsh-e-Faryadi Faiz Ahmed Faiz
- चश्मे-मयगूँ ज़रा इधर कर दे
- दोनों जहान तेरी मोहब्बत मे हार के
- हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए
- हिम्मते-इल्तिजा नहीं बाक़ी
- हुस्न-मरहूने-जोशे-बादः-ए-नाज़
- इश्क़ मिन्नतकशे-क़रार नहीं
- कई बार इसका दामन भर दिया हुस्ने-दो-आलम से
- कुछ दिन से इंतज़ारे-सवाले-दिगर में है
- नसीब आज़माने के दिन आ रहे हैं
- फिर हरीफ़े-बहार हो बैठे
- फिर लौटा है ख़ुरशीदे-जहाँताब सफ़र से
- राज़े-उल्फ़त छुपा के देख लिया
- वफ़ा-ए-वा'दः नहीं, वा'दः-ए-दिगर भी नहीं
- वो अह्दे-ग़म की काहिशहा-ए-बेहासिल को क्या समझे
- ख़ुदा वह वक्त न लाये कि सोगवार हो तू
- इंतेहा-ए-कार
- अंजाम
- सरोदे-शबाना-1
- आख़िरी ख़त
- हसीना-ए-ख्याल से
- मिरी जां अब भी अपना हुस्न फेर दे मुझको
- बा’द अज़ वक़्त
- सरोदे-शबाना-2
- इंतज़ार
- तहे-नुज़ूम
- हुस्न और मौत
- तीन मंज़र
- सरोद
- यास
- आज की रात
- एक रहगुज़र पर
- एक मंज़र
- मेरे नदीम
- मुझसे पहली-सी मुहब्बत मिरे महबूब न मांग
- सोच-क्यों मेरा दिल शाद नहीं है
- रक़ीब से
- तनहाई
- चन्द रोज़ और मिरी जान
- मरगे-सोज़े-मुहब्बत
- कुत्ते
- बोल-बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे
- इक़बाल
- मौज़ू-ए-सुख़न
- हम लोग
- शाहराह
