कूकरा : बुन्देली लोकगीत
Kookra : Bundeli Lok Geet
कै अब ढुर लागै कूकरा
कै अब ढुर लागै कूकरा, बड़े भोरहि बोले कूकरा, अटारिन राजा आजुल सोइये औ वा पै आजी रानी चढ़ गईं। तुम जागौ बड़न के लाल अब ढुर बोलै कूकरा। बड़े भोरहि बोले कूकरा। काना बसै भलौ कूकरा औ काना बसै बन मोर। बागन बसै भलौ कूकरा औ महलन बसै बन मोर। कहा चुगै भलौ कूकरा औ कहा चुगे बन मोर। दाना चुगै भलौ कूकरा औ दूदा पिये बन मोर। कै अब ढुर लागै कूकरा... ऊँची अटारिन बाबुल सोइये औ वा पै मैया रानी चढ़ गईं। तुम जागौ बड़न के लाल अब ढुर बोलै कूकरा। बड़े भोरहि बोले कूकरा
कौन कौ मुरगा रंगौ चंगौ
कौन कौ मुरगा रंगौ चंगौ मगरे दै आवाज। हमरे ससुरा कौ मुरगा रंगौ चंगौ सो मगरे दै आवाज। ननदी की सास नै मोलायो सो लै गई मगरे मार। कौन कौ मुरगा... हमरे जेठा कौ मुरगा रंगौ चंगौ सो मगरे दे आवाज। दूल्हा की बहिना ने मोलायौ सो लै गई मगरे मार। कौन कौ मुरगा...
घूरे पै मुरगा चुनै रे
घूरे पै मुरगा चुनै रे कोउ जिन मारौ ढेल। ओ मेरी बिन्नू ने मोलाये कोई जिन मारौ ढेल। सो घूरे पै मुरगा चुगै रे।