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वेणु लो गूँजे धरा : माखनलाल चतुर्वेदी

Venu Lo Goonje Dhara Makhanlal Chaturvedi

  • वेणु लो, गूँजे धरा
  • प्यारे भारत देश
  • समय के समर्थ अश्व
  • जाड़े की साँझ
  • संध्या के बस दो बोल सुहाने लगते हैं
  • कैसी है पहिचान तुम्हारी
  • अंजलि के फूल गिरे जाते हैं
  • दूबों के दरबार में
  • कल-कल स्वर में बोल उठी है
  • ये प्रकाश ने फैलाये हैं पैर
  • दूधिया चाँदनी साँवली हो गई
  • और संदेशा तुम्हारा बह उठा है
  • गाली में गरिमा घोल-घोल-गीत
  • मधु-संदेशे भर-भर लाती
  • इस तरह ढक्कन लगाया रात ने
  • ये वृक्षों में उगे परिन्दे
  • मूर्त्ति रहेगी भू पर
  • जीवन-जीवन यह मौलिक महमानी
  • उठ महान
  • समय के साँप
  • कितनी मौलिक जीवन की द्युति
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