तन्हा सफ़र की रात जाँ निसार अख़्तर
Tanha Safar Ki Raat Jaan Nisar Akhtar
- ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है
- फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो
- उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे
- हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है
- इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं
- ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था
- ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं
- वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है
- ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो
- लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं
- अश्आर मिरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं
- हमने काटी हैं तिरी याद में रातें अक्सर
- ज़ुल्फ़ें सीना नाफ़ कमर
- ख़ुद-ब-ख़ुद मय है कि शीशे में भरी आवे है
- चौंक चौंक उठती है महलों की फ़ज़ा रात गए
- हर एक शख़्स परेशान-ओ-दर-बदर सा लगे
- लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से
- एक तो नैनां कजरारे और तिस पर डूबे काजल में
- हौसला खो न दिया तेरी नहीं से हम ने
- रंज-ओ-ग़म माँगे है अंदोह-ओ-बला माँगे है
- उफ़ुक़ अगरचे पिघलता दिखाई पड़ता है
- मिज़ाज-ए-रहबर-ओ-राही! बदल गया है मियाँ
- जब लगें ज़ख़्म तो क़ातिल को दुआ दी जाए
- हर एक रूह में इक ग़म छुपा लगे है मुझे
- रही हैं दाद तलब उनकी शोख़ियाँ हमसे
- सुबह के दर्द को रातों की जलन को भूलें
- सुबह की आस किसी लम्हे जो घट जाती है
- ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का
- दिल को हर लम्हा बचाते रहे जज़्बात से हम
- जिस्म की हर बात है आवारगी ये मत कहो
- एक है ज़मीन तो सम्त क्या हदूद क्या
- तुम्हारे हुस्न को हुस्न-ए-फ़रोज़ाँ हम नहीं कहते
- आए क्या क्या याद नज़र जब पड़ती इन दालानों पर
- तू इस क़दर मुझे अपने क़रीब लगता है
- तुम पे क्या बीत गई कुछ तो बताओ यारो
- वो हम से आज भी दामन-कशाँ चले है मियाँ
- माना कि रंग रंग तिरा पैरहन भी है
- लाख आवारा सही शहरों के फ़ुटपाथों पे हम
- ज़मीं होगी किसी क़ातिल का दामाँ हम न कहते थे
- आहट सी कोई आए तो लगता है कि तुम हो
- तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा
- मुझे मालूम है मैं सारी दुनिया की अमानत हूँ
- ज़िंदगी तुझ को भुलाया है बहुत दिन हम ने
- सौ चाँद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
- हम से भागा न करो दूर ग़ज़ालों की तरह
- तुलू-ए-सुब्ह है नज़रें उठा के देख ज़रा
- अच्छा है उन से कोई तक़ाज़ा किया न जाए
- आँखें चुरा के हम से बहार आए ये नहीं
- मौज-ए-गुल मौज-ए-सबा मौज-ए-सहर लगती है
- ख़ाक-ए-दिल
- तजज़िया
