शब्द राग सूहा : संत दादू दयाल जी
Shabd Raag Suha : Sant Dadu Dayal Ji
शब्द राग सूहा संत दादू दयाल जी
(गायन समय दिन 9 से 12)
1 एकताल
तुम बिच अंतर जिन परे माधाव, भावै तन-धान लेहु।
भावै स्वर्ग-नरक रसातल, भावै करवत देहु।टेक।
भावै विपति देहु दुख संकट, भावै सम्पत्तिा सुख शरीर।
भावै घर-वन राव-रंक कर, भावै सागर तीर माधावे।1।
भावै बन्धा मुक्त कर माधाव, भावै त्रिभुवन सार।
भावै सकल दोष धार माधाव, भावै सकल निवार माधावे।2।
भावै धारणि गगन धार माधाव, भावै शीतल सूर।
दादू निकट सदा सँग माधाव, तू जिन होवे दूर माधावे।3।
2 पंजाबी त्रिताल
अब हम राम सनेही पाया, आगम अनहद सौं चित लाया।टेक।
तन-मन आतम ताको दीन्हा, तब हरि हम अपना कर लीन्हा।1।
वाणी विमल पंच पराना, पहली शीश मिले भगवाना।2।
जीवित जन्म सफल कर लीन्हाँ, पहली चेते तिन भल कीन्हाँ।3।
अवसर आपा ठौर लगावा, दादू जीवित ले पहुँचावा।4।
।इति राग सूहा सम्पूर्ण।