शब्द भक्त कबीर जी
Shabad Bhakt Kabir Ji in Hindi
- अगम द्रुगम गड़ि रचिओ बास
- अनभउ किनै न देखिआ बैरागीअड़े
- अमलु सिरानो लेखा देना
- अलहु एकु मसीति बसतु है अवरु मुलखु किसु केरा
- अवर मूए किआ सोगु करीजै
- अवलि अलह नूरु उपाइआ कुदरति के सभ बंदे
- अंतरि मैलु जे तीरथ नावै
- आकासि गगनु पातालि गगनु है चहु दिसि गगनु रहाइले
- आपे पावकु आपे पवना
- इन्हि माइआ जगदीस गुसाई तुम्हरे चरन बिसारे
- इसु तन मन मधे मदन चोर
- इहु धनु मेरे हरि को नाउ
- इंद्र लोक सिव लोकहि जैबो
- उदक समुंद सलल की साखिआ नदी तरंग समावहिगे
- उलटि जाति कुल दोऊ बिसारी
- उसतति निंदा दोऊ बिबरजित तजहु मानु अभिमाना
- ऐसो इहु संसारु पेखना रहनु न कोऊ पईहै रे
- ओइ जु दीसहि अम्बरि तारे
- काहू दीन्हे पाट पट्मबर काहू पलघ निवारा
- काम क्रोध त्रिसना के लीने गति नही एकै जानी
- कहा नर गरबसि थोरी बात
- कहा सुआन कउ सिम्रिति सुनाए
- करवतु भला न करवट तेरी
- कउनु को पूतु पिता को का को
- किआ जपु किआ तपु किआ ब्रत पूजा
- किआ पड़ीऐ किआ गुनीऐ
- कोरी को काहू मरमु न जानां
- कवन काज सिरजे जग भीतरि जनमि कवन फलु पाइआ
- किउ लीजै गढु बंका भाई
- कोटि सूर जा कै परगास
- कूटनु सोइ जु मन कउ कूटै
- कोऊ हरि समानि नही राजा
- काइआ कलालनि लाहनि मेलउ गुर का सबदु गुड़ु कीनु रे
- किनही बनजिआ कांसी तांबा किनही लउग सुपारी
- खसमु मरै तउ नारि न रोवै
- गगन नगरि इक बूंद न बरखै नादु कहा जु समाना
- गज साढे तै तै धोतीआ
- गुड़ु करि गिआनु धिआनु करि महूआ भउ भाठी मन धारा
- गुर सेवा ते भगति कमाई
- ग्रिहि सोभा जा कै रे नाहि
- गंगा कै संगि सलिता बिगरी
- गंग गुसाइनि गहिर ग्मभीर
- गरभ वास महि कुलु नही जाती
- ग्रिहु तजि बन खंड जाईऐ चुनि खाईऐ कंदा
- चारि दिन अपनी नउबति चले बजाइ
- चारि पाव दुइ सिंग गुंग मुख तब कैसे गुन गईहै
- चरन कमल जा कै रिदै बसहि सो जनु किउ डोलै देव
- चंदु सूरजु दुइ जोति सरूपु
- जउ तुम्ह मो कउ दूरि करत हउ तउ तुम मुकति बतावहु
- जनम मरन का भ्रमु गइआ गोबिद लिव लागी
- जैसे मंदर महि बलहर ना ठाहरै
- जिह सिमरनि होइ मुकति दुआरु
- जल महि मीन माइआ के बेधे
- जोइ खसमु है जाइआ
- जब जरीऐ तब होइ भसम तनु रहै किरम दल खाई
- जब लगु मेरी मेरी करै
- जब लगु तेलु दीवे मुखि बाती
- जा के निगम दूध के ठाटा
- जलि है सूतकु थलि है सूतकु
- जननी जानत सुतु बडा होतु है
- जीवत पितर न मानै कोऊ
- जिह बाझु न जीआ जाई
- जिह कुलि पूतु न गिआन बीचारी
- जिह मुख बेदु गाइत्री निकसै सो किउ ब्रहमनु बिसरु करै
- जिह सिरि रचि रचि बाधत पाग
- जिनि गड़ कोट कीए कंचन के छोडि गइआ सो रावनु
- जो जनु भाउ भगति कछु जानै ता कउ अचरजु काहो
- जो जन लेहि खसम का नाउ
- झगरा एकु निबेरहु राम
- टेढी पाग टेढे चले लागे बीरे खान
- डंडा मुंद्रा खिंथा आधारी
- तरवरु एकु अनंत डार साखा पुहप पत्र रस भरीआ
- तूं मेरो मेरु परबतु सुआमी ओट गही मै तेरी
- तूटे तागे निखुटी पानि
- थाके नैन स्रवन सुनि थाके थाकी सुंदरि काइआ
- दीनु बिसारिओ रे दिवाने दीनु बिसारिओ रे
- देही गावा जीउ धर महतउ बसहि पंच किरसाना
- देइ मुहार लगामु पहिरावउ
- देखौ भाई ग्यान की आई आंधी
- दिन ते पहर पहर ते घरीआं आव घटै तनु छीजै
- दुइ दुइ लोचन पेखा
- दरमादे ठाढे दरबारि
- दुनीआ हुसीआर बेदार जागत मुसीअत हउ रे भाई
- धंनु गुपाल धंनु गुरदेव
- नाइकु एकु बनजारे पाच
- नांगे आवनु नांगे जाना
- नगन फिरत जौ पाईऐ जोगु
- ना इहु मानसु ना इहु देउ
- नरू मरै नरु कामि न आवै
- निंदउ निंदउ मो कउ लोगु निंदउ
- निरधन आदरु कोई न देइ
- नित उठि कोरी गागरि आनै लीपत जीउ गइओ
- पाती तोरै मालिनी पाती पाती जीउ
- पडीआ कवन कुमति तुम लागे
- पंडित जन माते पड़्हि पुरान
- प्रहलाद पठाए पड़न साल
- बंधचि बंधनु पाइआ
- बहु परपंच करि पर धनु लिआवै
- बनहि बसे किउ पाईऐ जउ लउ मनहु न तजहि बिकार
- बारह बरस बालपन बीते
- बेद कतेब इफतरा भाई दिल का फिकरु न जाइ
- बेद कतेब कहहु मत झूठे झूठा जो न बिचारै
- बेद की पुत्री सिम्रिति भाई
- बेद पुरान सभै मत सुनि कै करी करम की आसा
- बिदिआ न परउ बादु नही जानउ
- बुत पूजि पूजि हिंदू मूए तुरक मूए सिरु नाई
- भुजा बांधि भिला करि डारिओ
- भूखे भगति न कीजै
- माथे तिलकु हथि माला बानां
- मैला ब्रहमा मैला इंदु
- मनु करि मका किबला करि देही
- मन रे छाडहु भरमु प्रगट होइ
- माता जूठी पिता भी जूठा जूठे ही फल लागे
- मउली धरती मउलिआ अकासु
- मुंद्रा मोनि दइआ करि झोली पत्र का करहु बीचारु रे
- मुसि मुसि रोवै कबीर की माई
- राजन कउनु तुमारै आवै
- राजास्रम मिति नही जानी तेरी
- राम जपउ जीअ ऐसे ऐसे
- राम सिमरि राम सिमरि राम सिमरि भाई
- रे जीअ निलज लाज तोहि नाही
- रे मन तेरो कोइ नही खिंचि लेइ जिनि भारु
- राखि लेहु हम ते बिगरी
- रिधि सिधि जा कउ फुरी तब काहू सिउ किआ काज
- रामु सिमरु पछुताहिगा मन
- री कलवारि गवारि मूढ मति उलटो पवनु फिरावउ
- रोजा धरै मनावै अलहु सुआदति जीअ संघारै
- लख चउरासीह जीअ जोनि महि भ्रमत नंदु बहु थाको रे
- लंका सा कोटु समुंद सी खाई
- सभु कोई चलन कहत है ऊहां
- सनक सनंद महेस समानां
- संतु मिलै किछु सुनीऐ कहीऐ
- संतहु मन पवनै सुखु बनिआ
- सरपनी ते ऊपरि नही बलीआ
- सो मुलां जो मन सिउ लरै
- सुंन संधिआ तेरी देव देवाकर अधपति आदि समाई
- सुरग बासु न बाछीऐ डरीऐ न नरकि निवासु
- सुतु अपराध करत है जेते
- सरीर सरोवर भीतरे आछै कमल अनूप
- संता मानउ दूता डानउ इह कुटवारी मेरी
- सिव की पुरी बसै बुधि सारु
- सतरि सैइ सलार है जा के
- सुरह की जैसी तेरी चाल
- हज हमारी गोमती तीर
- हम घरि सूतु तनहि नित ताना कंठि जनेऊ तुमारे
- हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राजसु मनि भावै
- हरि बिनु कउनु सहाई मन का
- हरि जसु सुनहि न हरि गुन गावहि
- हिंदू तुरक कहा ते आए
- ह्रिदै कपटु मुख गिआनी
