प्रणय पत्रिका हरिवंशराय बच्चन
Pranay Patrika Harivansh Rai Bachchan
- क्या गाऊँ जो मैं तेरे मन को भा जाऊँ
- भावाकुल मन की कौन कहे मजबूरी
- तुम छेड़ो मेरी बीन कसी, रसराती
- सुर न मधुर हो पाए, उर की वीणा को कुछ और कसो ना
- राग उतर फिर-फिर जाता है, बीन चढ़ी ही रह जाती है
- बीन, आ छेडूँ तुझे, मन में उदासी छा रही है
- आज गीत मैं अंक लगाए, भू मुझको, पर्यंक मुझे क्या
- सो न सकूँगा और न तुझको सोने दूँगा, हे मन-बीने
- एक यही अरमान गीत बन, प्रिय, तुमको अर्पित हो जाऊँ
- अर्पित तुमको मेरी आशा, और निराशा, और पिपासा
Pranay Patrika Harivansh Rai Bachchan