असंकलित रचनाएँ जावेद अख़्तर
Misc. Poetry Javed Akhtar
- नया हुकुमनामा
- हर ख़ुशी में कोई कमी-सी है
- जाते जाते वो मुझे अच्छी निशानी दे गया
- कभी यूँ भी तो हो
- मैनें दिल से कहा
- तमन्ना फिर मचल जाए, अगर तुम मिलने आ जाओ
- आप भी आइए हमको भी बुलाते रहिए
- अब अगर आओ तो जाने के लिए मत आना
- क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगा
- इक पल गमों का दरिया, इक पल खुशी का दरिया
- कुछ मेरी सुनो, कुछ अपनी कहो
- ज़रा मौसम तो बदला है मगर पेड़ों की शाख़ों पर
- कुछ शेर
