Maulana Rumi | मौलाना रूमी
मौलाना जलालुद्दीन रूमी (1207 - 17 दिसम्बर 1273) तेरहवीं सदी के फ़ारसी भाषा के प्रसिद्ध कवि, कानूनदान, इस्लामी विद्वान और सूफ़ी रहस्यवादी थे। उनकी अधिकांश रचनाएँ फ़ारसी में हैं, किन्तु उनमें तुर्की, अरबी और यूनानी शब्द भी मिलते हैं। उनकी प्रमुख काव्य रचनाएँ 'दीवान-ए-शम्स तबरेज़ी' (दीवान-ए-कबीर) और 'मसनवी मानवी' हैं।
मौलाना रूमी की रचनाएँ हिन्दी में
मौलाना रूमी की कविताएँ एवं अशआर (Hindi Translation)
- बिन मेरे (Bin Mere)
- हंगामा-ए-रात के (Hangaame Raat Ke)
- मैकदे में आज (Maikade Mein Aaj)
- हमारे सुरसाज़ (Hamare Sursaaz)
- मूल के मूल में आ (Mool Ke Mool Mein Aa)
- गुलाबी गाल तेरे (Gulabi Gaal Tere)
- सुने कौन आलाप मेरे (Sune Kaun Aalap Mere)
- जादूगर (Jaadugar)
- मुरली का गीत (Murli Ka Geet)
- रुबाइयाँ (Rubaiyan)
- दुश्वार (Dushwar)
- नायाब इल्म (Nayab Ilm)
- लतीफा (Latifa)
- बदशकल (Badshakal)
- तौबा - 1 (Tauba-1)
- तौबा - 2 (Tauba-2)
- इश्क़ (Ishq)
- दर्द (Dard)
- रूह के राज़ (Rooh Ke Raaz)
- जंग और जलाल (Jang Aur Jalaal)
- दिल (Dil)
- रहबर (Rahbar)
- हू से हवा में (Hoo Se Hawa Mein)
- मुखालिफ़ (Mukhalif)
- मस्जिद (Masjid)
- पहाड़ (Pahaar)
- एक (Ek)
- खुदा (Khuda)
- यार (Yaar)
- पस्ती (Pasti)
- बुत (But)
- सूफी - 1 (Sufi-1)
- सूफी - 2 (Sufi-2)
- दरवेश (Darvesh)
