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फ़िल्मी रचनाएँ साहिर लुधियानवी हिंदी कविता
Filmi Rachnayen Sahir Ludhianvi
अगर मुझे न मिली तुम तो मैं ये समझूँगा
अब अगर हमसे ख़ुदाई भी खफ़ा हो जाए
अब कोई गुलशन ना उजड़े
अभी न जाओ छोड़ कर के दिल अभी भरा नहीं
आप आए तो ख़्याल-ए-दिल-ए-नाशाद आया
इतनी हसीन इतनी जवाँ रात क्या करें
इश्क़ की गर्मी-ए-जज़्बात किसे पेश करूँ
इस रेशमी पाज़ेब की झंकार के सदके
उड़ें जब जब ज़ुल्फ़ें तेरी
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है-1
कभी कभी मेरे दिल में, ख़याल आता है-2
कभी ख़ुद पे कभी हालात पे रोना आया
कह दूँ तुम्हें या चुप रहूँ
कहीं और मिला कर मुझसे
किस का रस्ता देखे, ऐ दिल, ऐ सौदाई
किसी पत्थर की मूरत से मुहब्बत का इरादा है
क्या मिलिए ऐसे लोगों से
गंगा तेरा पानी अमृत
ग़ैरों पे करम, अपनों पे सितम
चंदा रे, मेरे भैया से कहना
चलो इक बार फिर से
चांद मद्धम है
छू लेने दो नाज़ुक होठों को
जब भी जी चाहे नई दुनिया बसा लेते हैं लोग
जाएँ तो जाएँ कहाँ
जाने वो कैसे लोग थे जिनके
जिसे तू कुबूल कर ले वह अदा कहाँ से लाऊँ
जीवन के सफ़र में राही
जो बात तुझ में है, तेरी तस्वीर में नहीं
ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात-1
ज़िन्दगी भर नहीं भूलेगी वो बरसात की रात-2
तदबीर से बिगड़ी हुई तक़दीर बना ले
तंग आ चुके हैं कश-म-कश-ए-जिन्दगी से हम
तुझको पुकारे मेरा प्यार
तुम अगर मुझको न चाहो तो कोई बात नहीं
तुम अगर साथ देने का वादा करो
तुम चली जाओगी
तुम न जाने किस जहाँ में खो गए
तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
तुम्हारी नज़र क्यों खफ़ा हो गई
तुम्हारी मस्त नज़र अगर इधर नहीं होती
तू हिन्दू बनेगा ना मुसलमान बनेगा
तेरा ख़याल दिल से मिटाया नहीं अभी
तेरा मुझसे है पहले का नाता कोई
तेरे चेहरे से नज़र नहीं हटती
तेरे दर पे आया हूँ कुछ कर के जाऊँगा
तेरे बचपन को जवानी की दुआ देती हूँ
तोरा मन दर्पण कहलाये
दिल कहे रुक जा रे रुक जा, यहीं पे कहीं
दिल जो न कह सका वही राज़-ए-दिल
दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया
दुखी मन मेरे सुन मेरा कहना
दुनिया करे सवाल तो हम क्या जवाब दें
देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना क़रीब से
नग़मा-ओ-शेर की सौगात किसे पेश करूँ
न तू ज़मीं के लिए है
ना तो कारवाँ की तलाश है
न मुँह छुपा के जियो
निगाहें मिलाने को जी चाहता है
नीले गगन के तले
प्यार कर लिया तो क्या प्यार है खता नहीं
बच्चे मन के सच्चे
बरबाद मुहब्बत की दुआ साथ लिए जा
मतलब निकल है तो, पहचानते नहीं
माँग के साथ तुम्हारा
मिलती है जिंदगी में मोहब्बत कभी कभी
मेरा तुझ से है पहले का नाता कोई
मेरे घर आई एक नन्ही परी
मेरे दिल में आज क्या है
मेरे भैया मेरे चँदा मेरे अनमोल रतन
मेरे महबूब कहीं और मिला कर मुझ से
मैं ज़िन्दगी का साथ निभाता चला गया
मैंने तुझे माँगा तुझे पाया है
मैं पल दो पल का शायर हूँ
मैं हर इक पल का शायर हूँ
ये कूचे ये नीलामघर
ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहीं
ये देश है वीर जवानों का
ये वादियाँ ये फ़ज़ाएँ बुला रही हैं तुम्हें
रंग और नूर की बारात किसे पेश करूँ
रात भी है कुछ भीगी-भीगी
लागा चुनरी में दाग
वादा करो नहीं छोड़ोगी तुम मेरा साथ
वो सुबह कभी तो आएगी
संसार की हर शैय का
साथी हाथ बढ़ाना
हम इन्तज़ार करेंगे तेरा क़यामत तक
हुस्न हाज़िर है मुहब्बत की सज़ा पाने को