चांद का मुँह टेढ़ा है : गजानन माधव मुक्तिबोध
Chand Ka Munh Tedha Hai Gajanan Madhav Muktibodh
- प्रथम संस्करण से
- भूल-ग़लती
- पता नहीं
- ब्रह्मराक्षस
- दिमाग़ी गुहान्धकार का ओरांगउटांग!
- लकड़ी का रावण
- चांद का मुँह टेढ़ा है (कविता)
- डूबता चांद कब डूबेगा
- एक भूतपूर्व विद्रोही का आत्म-कथन
- मुझे पुकारती हुई पुकार
- मुझे क़दम-क़दम पर
- मुझे याद आते हैं
- मुझे मालूम नहीं
- मेरे लोग
- मैं तुम लोगों से दूर हूँ
- एक अंत:कथा
- एक अरूप शून्य के प्रति
- शून्य
- जब प्रश्न-चिह्न बौखला उठे
- एक स्वप्न-कथा
- अंधेरे में
