साधना ठकुरेला (Sadhana Thakurela)
साधना ठकुरेला (06 मार्च, 1967-) का जन्म उत्तर प्रदेश राज्य के हाथरस शहर में हुआ। उनके पिता का नाम श्री राम प्रसाद राना और माता का नाम श्रीमती राजेश्वरी राना है।
साधना ठकुरेला उन महिला साहित्यकारों में से एक हैं, जिन्होंने कुण्डलिया छंद को आधार बनाकर सृजन किया है। उनकी कुण्डलियाँ 'अनुभूति' जैसी पत्रिकाओं तथा 'कुण्डलिया कानन', 'कुण्डलिया संचयन' एवं 'मानक कुण्डलिया' जैसे संकलनों में प्रकाशित हैं। इन्होंने 'कुण्डलिया छंद के नये शिखर' का सह-सम्पादन भी किया है।
कुण्डलियाँ : साधना ठकुरेला
- चलती रहती जिंदगी
- चढ़ती चींटी सर्वदा
- जाला मकड़ी बुन रही
- गढ़ता काँटा पैर में
- नेकी कर के भूल जा
- पीड़ा दें संसार में
- आजादी की आड़ में
- सेवा का अवसर मिले
- पाला जिसने भी यहाँ
- बेटी को दे दीजिये
- सपने देखो जागकर
- योगी तन से हो गये
- सुख-सुविधा ज्यादा मिली
- रोगी, दीन, दरिद्र पर
- वाणी औ' मन पर रखो
- सीमा पर लड़ते हुए
- माता अपनी कोख से
- रोटी, कपड़ा और घर
- द्वापर में कब मिल सका
- शुक्ल पक्ष का चाँद है
